बेरोजगारों को अपनी सोच बदलनी होगी

कर्म सिंह

लेखक, मंडी से हैं

आज का युवा इतना अल्प संयमी हो गया है कि हल्की सी बात को भी समझने के लिए तैयार ही नहीं है। इसी परिप्रेक्ष्य में लाखों की संख्या में युवा हर वर्ष अपना समय बर्बाद करते हैं तथा उनके हाथ में निराशा के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। ऐसे में युवा वर्ग को सर्वप्रथम अपने सामर्थ्य तथा अपनी योग्यता को समझना होगा...

हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारी चरमोत्कर्ष पर है। सरकारी रोजगार कार्यालयों के मुताबिक करीब आठ लाख पढ़े-लिखे व्यक्तियों ने रोजगार पाने के लिए अपना नाम दर्ज करवाया है। बेरोजगारी का आलम यह है कि एक पद के लिए हजारों की संख्या में आवेदन आ रहे हैं। 19 नवंबर 2019 को हिमाचल प्रदेश में पटवारी परीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें तीन लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इस परीक्षा का आयोजन करने के लिए प्रशासन को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी तथा बेरोजगारों को भी अनेक त्रुटियों तथा समस्याओं का सामना करना पड़ा। जहां एक तरफ युवा वर्ग डिग्री धारक बनता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ  सरकारी क्षेत्र में नौकरियां घटती जा रही हैं, लेकिन युवा वर्ग का सरकारी नौकरियों के प्रति लगाव तथा चारम सिर चढ़कर बोलता है। गत वर्ष हिमाचल प्रदेश सचिवालय क्लर्क की परीक्षा में भी 54 पदों के लिए करीब 92,000 युवाओं ने अपना भविष्य आजमाया था जिसमें 7 से 8 पदों पर बाहरी राज्यों ने अपना कब्जा जमा लिया था। हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा स्कूल लेक्चरर के पदों के लिए बाहरी राज्य के लोगों को आवेदन करने की छूट दी थी जिसका कड़े शब्दों में बेरोजगारों ने विरोध किया तथा सरकार को कैबिनेट मीटिंग में बाहरी राज्यों के लोगों को नौकरी के लिए आठवीं, दसवीं तथा बारहवीं शिक्षा की कंडीशन को अनिवार्य करना पड़ा तथा वर्तमान में जारी सभी तृतीय व चतुर्थ श्रेणी की विज्ञप्तियों को सरकार द्वारा निरस्त करना पड़ा। अब बेरोजगार असमंजस की स्थिति में हैं कि उनके द्वारा जो फीस पे की गई है उसका क्या होगा तथा परीक्षाओं की अगली तिथियां कब निर्धारित होंगी। बेरोजगारों से नौकरियों के नाम पर हजारों में फीस वसूली जाती है, लेकिन नौकरियां गिने-चुने लोगों को ही मिल पाती हैं।

ऐसे में बेरोजगार अपने आप को छला हुआ महसूस कर रहे हैं। वर्तमान समय में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों से 300 से लेकर 1000 तक फीस ली जाती है जबकि सुविधाओं के नाम पर महज औपचारिकताएं ही की जाती हैं। हाल ही में आयोजित पटवारी की परीक्षा में एक अनुमान के मुताबिक रेवेन्यू विभाग को 8 से 10 करोड़ के आसपास धन एकत्रित हुआ होगा, जबकि इस परीक्षा के संचालन, पेपर निर्धारण इत्यादि आधारभूत विषयों पर भी अनेक त्रुटियां सामने आई हैं। बहुत बड़ा प्रश्न खड़ा हो जाता है कि इस तरह की बड़ी-बड़ी परीक्षाओं में भी प्रशासन तथा सरकार बेरोजगारों के साथ ढुल-मुल नीति अपनाती है। कुछ महीने पहले हिमाचल प्रदेश पुलिस की लिखित परीक्षा को भी रद्द करना पड़ा था क्योंकि उसका प्रश्न पत्र लीक हो गया था जबकि पटवारी की परीक्षा में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन कांगड़ा के धीरा परीक्षा केंद्र में अभ्यर्थियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा और वहीं से अभ्यर्थियों के मन में अनेक प्रश्न उत्पन्न हो गए और इन प्रश्नों को सोशल मीडिया तथा समाचार पत्रों के माध्यम से अत्यधिक तवज्जो दी गई। इस तरह की घटनाओं से भी युवा वर्ग अपनी पढ़ाई से अपना ध्यान आसानी से भटका लेता है। इस भारी-भरकम कंपीटीशन में सरकारी नौकरी प्राप्त करने के लिए निरंतर अध्ययन, दृढ़ संकल्पित तथा आशावादी दृष्टिकोण का परिचय देने की आवश्यकता होती है, लेकिन आज का युवा इतना अल्प संयमी हो गया है कि हल्की सी बात को भी समझने के लिए तैयार ही नहीं है। इसी परिप्रेक्ष्य में लाखों की संख्या में युवा हर वर्ष अपना समय बर्बाद करते हैं तथा उनके हाथ में निराशा के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। ऐसे में युवा वर्ग को सर्वप्रथम अपने सामर्थ्य तथा अपनी योग्यता को समझना होगा। उसी के अनुरूप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटना होगा। यदि आप हर दो-चार मिनट में अपने मोबाइल फोन पर सोशल मीडिया तथा कमेेंट्स में समय बर्बाद करने के आदी हैं तो आपको सरकारी नौकरी प्राप्त करने में बहुत परेशानी होगी। आपकी आयु तथा समय कमेंट्स तथा विरोध में ही निकल जाएगा। यदि आपको ऐसा प्रतीत होता है कि आप में सरकारी नौकरी को प्राप्त करने का सामर्थ्य नहीं है तो वर्तमान आधुनिक दौर में निजी क्षेत्रों तथा स्व-निर्मित व्यवसाय में भी कोई कमी नहीं है। सर्वप्रथम अपनी योग्यताएं अपने बल, अपने सामर्थ्य को समझें। उसके बाद ही अपने करियर का चुनाव करें। प्रदेश सरकार बेरोजगारों के लिए अनेक वित्तीय सहायता कार्यक्रमों का संचालन कर रही है। यदि युवा वर्ग स्व-निर्मित व्यवसायों की तरफ  अपना ध्यान केंद्रित करें तो उसे सरकारी क्षेत्र से ज्यादा धन तथा इज्जत मिल सकती है।

जब तक आप अपने आप को डिफेंसिव जोन में रखेंगे, घर से बाहर नहीं निकलेंगे, तब तक आपमें उद्यमशीलता विकसित नहीं हो पाएगी और सरकारी नौकरियों के लिए हर वर्ष सरकारी खजाने में करोड़ों रुपए भरने में लगे रहेंगे। ऐसे परिप्रेक्ष्य में सरकार तथा अधिकारी वर्ग को भी युवाओं के लिए विशेष मार्गदर्शक कैंपों का आयोजन करना चाहिए ताकि युवा वर्ग अपनी ऊर्जा तथा सामर्थ्य का सही इस्तेमाल अपने करियर निर्माण तथा सुनहरे हिमाचल को समर्पित कर पाए। हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा धर्मशाला में इन्वेस्टर मीट का सफल आयोजन किया गया जिसमें करीब 92,000 करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए गए हैं। युवा वर्ग को भी इस इन्वेस्टर मीट से रोजगार की काफी उम्मीद है। प्रदेश सरकार को इन एमओयू को शीघ्र ही धरातल पर उतारने के लिए कड़े प्रयास करने चाहिए। युवा वर्ग को उद्योगों के माध्यम से रोजगार के साधन उपलब्ध करवाकर उनके भविष्य को संवारने का प्रयास शीघ्र करना होगा अन्यथा युवा वर्ग पटवारी, फारेस्ट गार्ड, क्लर्क इत्यादि परीक्षाओं में अपनी एनर्जी बर्बाद करता रहेगा। सरकार को स्पष्ट शब्दों में युवाओं को यह एहसास करवा देना चाहिए कि सभी को सरकारी क्षेत्र में नौकरी नहीं दी जा सकती। इसलिए समय रहते युवा वर्ग अपनी आजीविका अपने सामर्थ्य के अनुसार अर्जित करने का प्रयास करें।

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