Thursday, July 18, 2019 08:47 AM

बैसाख की संक्रांति, देवी देवताओं ने किया शाही स्नान

बंजार—संवत् 2076 के बैसाख मास की संक्रांति को बंजार के अनेक गांवों के देवालयों में  पर देवी-देवताओं को प्रमुख कारकूनों व कुल ब्राह्मणों ने सही बेेला पर देवी-देवताओं का पूजन व हार शृंगार किया और देव रीति के अनुसार देवी-देवता अपनी-अपनी पुरातन व धार्मिक जल के तालाब व खड्डों में जाकर पावन स्नान किया तथा इस पावन बेला में देवी-देवताओं के साथ उपमंडल के सैकड़ों लोगों ने भी पवित्र स्नान किया। कहते हैं कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है तथा इस बैसाख मास की संक्रांति को जो व्यक्ति देवी-देवताओं के साथ स्नान करते हैं, उसके अनेक पाप व कई प्रकार के रोगों की भी निवृति होती है। इस  पावन स्नान देवी देवताओं के पावन स्नान के बाद सभी देवी-देवता अपने-अपने देवालयों में आकर विराजे तथा प्रमुख कारकूनों के द्वारा देवी-देवताओं का फिर से पूजन करके हार शृंगार कर  भक्तों के दर्शन करने के लिए देवी-देवताओं को अपने-अपने देवालयों में सजाया गया तथा कई स्थानों पर इस पावन बेला पर देवी-देवताओं के गूरों को देव खेल में लाकर लोगों को भविष्य के बारे में भी बताया तथा गूर के माध्यम से लोगों को सरसों देकर आशीर्वाद भी प्राप्त किया। टील व शांघड़ के आराध्य देव शंचूल के आगे लगी आशीर्वाद लेने की भीड़ देवता के सामने उमड़ी रही। उपमंडल बंजार के टील पंचायत और शांघड़ पंचायत का आराध्य देवता शंचूल महादेव के पूरातन देवालय में बैसाखी की पावन बेला पर  शांघड़ व टील में प्रदेश के कोने-कोने से शंचूल महादेव के पास भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर पर लोग अपने दुख दर्द को देवता के पास आकर मिटाते हैं। इस मौके पर जो दंपति बेऔलाद हंै वे यदि देवता के पास जाकर फरियाद करें तो साल के मध्य में उसे पुत्र प्राप्ति होती है। कारकूनों का कहना है, जो भी दुखी देवता के पास आता है, उसकी मनोकांमना साल भर में अवश्य पूरी होती है, इसके कई प्रमाण हमारे पास हैं। प्रदेश के अन्य जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी लोग यहां पर अपनी मनोकांमना को पूरी करने के लिए आते हैं। देवता शंचूल शांघड़  के पूजारियों देंवेद्र शर्मा, मोहन लाल देवता शंचूल टील के पूजारी  राम लाल , कारदार गोपी चौहान  तथा अन्य लोगों का कहना है कि हर साल बैसाख की संक्रांति को देवता नई शक्ति से ओत प्रोत होते हैं।