Wednesday, April 24, 2019 05:23 AM

बैहना गुटकर पुल पर जरा बचके

गागल    —सुकेती खड्ड पर निर्मित बैहना गुटकर पुल आजकल आवारा पशुओं की शरणस्थली बना हुआ है। रात भर आसपास के खेतों से फसलों को चट करके ये आवारा पशु सुबह सड़कों या नालों के आसपास जमा हो जाते हैं।  दिन चढ़ने पर जब तापमान बढ़ने लगता है तो जंगली मक्खियों के डंक से खुद को बचाने के चक्कर मे ये जानवर सड़कों के बीच या पुलों पर अपना कब्जा जमा कर खड़े हो जाते हैं। जहां गाडि़यों के निकलने से उत्पन्न हवा के झोंके से उन्हें इन मक्खियों के आतंक से जरा राहत मिलती है। जिसके मोह में ये पशु सड़क के बीच या पुलों के बीच खड़े होकर अपने और वाहन चालकों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। बैहना गुटकर पुल पैदल व दोपहिया चालकों के कारण अति व्यस्त मार्ग है जहां दिनभर सैकड़ों लोगों का आवागमन लगा रहता है, खासकर सुबह और शाम को जब सैकड़ो कामगार, कर्मचारी और स्कूली बच्चे इस पुल से गुजरकर अपने गंतव्य को जाते है। लेकिन आजकल इस पुल पर तमाम आवारा पशुओं का जमघट लगा रहता है। बड़े सींगों वाले इन हृष्टपुष्ट बैलों के पास से होकर गुजरने का साहस बड़े-बड़े सूरमा भी नही जुटा पाते, फिर औरतों और बच्चों की तो बात ही क्या। अभी बीते दिनों बैहना का एक व्यक्ति इन्हीं आवारा बैलों के हमले में लहूलुहान हो गया था, जिसके शरीर पर 18 टांके लगाने पड़े थे। इन हालातों के दृष्टिगत यहां की दो पंचायतों के सैकड़ों परिवार जिनके परिवार के सदस्य विशेषत महिलाएं व बच्चे अपने कामकाज, कार्यालय और स्कूलों को जाने हेतु इस पुल मार्ग का प्रयोग करते हैं, इन आवारा पशुओं के आतंक से हमेशा चिंतित रहते हैं। जब तक उनके परिवार के सदस्य सकुशल घर न पहुंच जाएं। प्रभावित लोगों ने इन आवारा पशुओं से अपनी जान माल की हिफाजत के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है कि अतिशीघ्र इस समाधान करके लोगों को राहत पहुंचाई जाए।