Saturday, September 21, 2019 05:09 PM

भरमौर में सेब का तुड़ान जोरों पर

भरमौर -मणिमहेश यात्रा के संपन्न होने के बाद अब जनजातीय क्षेत्र भरमौर में सेब सीजन ने भी रफ्तार पकड़ ली है। बागबानों ने सेब तुड़ान जोर-शोर से आरंभ कर दिया है। वहीं, इन्हें पेटियों में बंद कर पड़ोसी राज्य पंजाब की मंडियों में भेजने का क्रम भी आरंभ हो चुका है। आरंभिक तौर पर समूचे क्षेत्र में इस मर्तबा रिकार्ड सेब उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है। बहरहाल निचले क्षेत्रों में सेब सीजन आरंभ हो गया है, तो उंचाई पर स्थित सेब बगीचों में इस से पंद्रह दिनों बाद तुड़ान शुरू होगा। जानकारी के अनुसार जनजातीय क्षेत्र भरमौर सेब उत्पादन के मामले में जिले भर में पहले नंबर पर आंका जाता है।  यहां के अधिकांश ग्रामीणों की रोजी-रोटी का जरिया कृषि-बागबानी है। लिहाजा क्षेत्र की आर्थिकी को सदृढ बनाने में सेब उत्पादन यहां पर अहम रोल निभा रहा है। इस वर्ष सीजन में करोड़ों रुपए का कारोबार यहां पर सेब का ही होता है। उधर, मौजूदा समय में जनजातीय उपमंडल मुख्यालय भरमौर में बागीचों में तुड़ान का कार्य जोरों पर है। वहीं, क्षेत्र की होली घाटी के निचले इलाकों में भी कार्य पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। रोचक है कि मणिमहेश यात्रा के दौरान लाखों रुपए के सेबों की बिक्री सड़क किनारे ही हो जाता है, लेकिन इस मर्तबा उम्मीद के मुताबिक कारोबार नहीं हो पाया हैं। जबकि होली घाटी के अधिकतर बागबान पड़ोसी राज्य पंजाब की अमृतसर, जालंधर व पठानकोट की मंडियों में ही अपने सेब की बिक्री करते है।  क्षेत्र के बागबानों का कहना है कि इस मर्तबा सेब की यहां पर बंपर फसल होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं, क्षेत्र में कई बगीचों में स्कैब की जद में भी फसल आई है। कई हिस्सों में सेब का साईज कम होना भी बागबानों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।