भाखड़ा विश्व का सबसे ऊंचा गुरुत्व बांध

यह सतलुज नदी पर बनाया गया विश्व में सबसे ऊंचा गुरुत्व बांध है। इस परियोजना में नंगल बांध,नागल विद्युत चैनल तथा गंगुवाल और कोटला के विद्युत गृह शामिल हैं। हिमालय की तराई में स्थित भाखड़ा एक छोटा सा गांव है। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसे उदीयमान भारत का नया मंदिर कहा था...

 भाखड़ा डैम

यह सतलुज नदी पर बनाया गया विश्व में सबसे ऊंचा गुरुत्व बांध है। इस परियोजना में नंगल बांध, नागल विद्युत चैनल तथा गंगुवाल और कोटला के विद्युत गृह शामिल हैं। हिमालय की तराई में स्थित भाखड़ा एक छोटा सा गांव है। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसे उदीयमान भारत का नया मंदिर कहा था। इस बांध के बनने से गोबिंद सागर नाम की एक बड़ी कृत्रिम झील बन गई, जो बिलासपुर नगर तक फैली है।

बीड़ बिलिंग

इसकी  सबसे पहले 1978 ई. में दिल्ली से आई एक नवयुवती कुमारी दीपक महाजन ने हैंग ग्लाइडिंग और पैरा ग्लाइडिंग के लिए पहचान की थी। इसके बाद इसकी पहचान इजरायल के एक सैलानी  और हिमाचल प्रदेश के वन विभाग के एक पक्ष ने सर्वोत्तम पैराग्लाइडिंग स्थान के रूप में की। 1984 ई. में बिलिंग को एक अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली जब व्यक्तिगत स्तर पर यहां एक प्रतियोगिता की व्यवस्था की गई। इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली जब फ्रांस से मिस्टर एक्स बोर रेमंड ने बीड़ से 130.9 किलोमीटर की उड़ान भरी और विश्व रिकार्ड बनाया। 2002 ई. में राज्य सरकार ने इस शौकिया और साहसिक प्रतियोगिता को प्रोन्नत करने के लिए पूर्व विश्व कप शुरू किया।

भावानगर

यह किन्नौर जिला में स्थित है। यहां से हम सतलुज का दृश्य देख सकते हैं तथा पूर्व अनुमति से भूमिगत जल विद्युत परियोजना, जिसे संजय विद्युत परियोजना के नाम से जाना जाता है तथा जो एशिया से अपनी तरह की योजना, को देख सकते हैं। इससे 5 किलोमीटर आगे वांगतू नामक स्थान है जो जनजातीय क्षेत्र किन्नौर का प्रवेश द्वार है।

बारालाचा-ला

यह केलांग से 73 किलोमीटर की दूरी पर लाहुल घाटी में स्थित है। बारालाचा नाम का अर्थ है एक दर्रा  जिसके शिखर पर चारों ओर से सड़कें आती हों। इसके सिरे लद्दाख, स्पीति और लाहुल से सड़कें आ मिलती हैं। स्पीति से कोई सड़क नहीं है, मात्र एक रास्ता है। यह दर्रा चंद्र, भागा और यूनाम नदियों का उद्गम स्थल भी है।  यह तीन दिशाओं में चंद्र, भागा और लिंगती घाटियों से बहती हैं।

क्रमशः

 

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