भाजपा-शिवसेना की शादी टूटी

नवेंदु उन्मेष

स्वतंत्र लेखक

अंततोगत्वा महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना की चुनावी शादी टूट गई और फडणवीस को राज्यपाल की अदालत में तलाक की अर्जी लगानी पड़ी। चुनाव के बाद पहली बार लोगों की समझ में आया कि राजनीतिक दल भी प्रेमी-प्रेमिका रखते हैं। अगर एक प्रेमी या प्रेमिका शादी करने से इनकार कर दे तो दूसरी भी तैयार रखते हैं। अगर शादी न भी करें तो कम से कम मोबाइल पर प्रेमालाप अवश्य करते रहते हैं, ताकि प्रेम संबंध टूट जाए तो दूसरा प्रेमी सहारा देने के लिए तैयार रहे। शिवसेना ने भी ऐसा ही किया। प्रेम तो वह भाजपा से करती रही, लेकिन हनीमून किसी भी दल के साथ मनाने के लिए तैयार है। इसमें चाहे एनसीपी, कांग्रेस या कोई भी दल क्यों न हो। वैसे कई सालों से दोनों दल शोले फिल्म के जय और वीरू की तरह गीत गुनगुना रहे थे-‘यह दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे। तेरी जीत मेरी जीत, मेरी जीत तेरी हार, सुन मेरे यार।’ दोनों दलों की शादी से पहले खूब बैंड बाजा बजा। वोट मिलने के बाद दोनों दलों ने गली-गली में बारात निकाली और लोगों ने विधायक बने दूल्हा-दूल्हन को फूलों की माला से लाद दिया। बैंड वाले भी क्या खूब संगीत बजा रहे थे-‘ले जाएंगे, ले जाएंगे दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे।‘ लेकिन सचमुच ऐसा ही हुआ। पैसे वाले तो क्या बिना पैसे वाले भी तमाशा देखते रह गए। भाजपा को माया मिली न राम। इसके बाद मुंबई की गलियों में भाजपा के लोग गा रहे थे-‘दिल तोड़ के हंसती हो मेरा, वफाएं मेरी याद करोगी।’ अब देखना यह है कि शिवसेना भाजपा की वफाओं को कितने समय तक याद करती है या भाजपा शिवसेना की वफाओं को कितने दिनों तक याद रखती है। आखिर शादी टूटनी थी सो टूट ही गई। मुंबई की गलियों में अब सन्नाटा पसर गया है। न तो अब भाजपा के दफ्तर में खुशी के बैंड बज रहे हैं और न शिवसेना के दफ्तर में। राज्यपाल की अदालत को जो निर्णय करना है करते रहें। इससे किसी दल को कोई मतलब नहीं है। अब देखना यह है कि शिवसेना किसके साथ मिलकर शादी का नया जोड़ा पहनती है। राज्यपाल की अदालत में तलाक की अर्जी सौंपने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। यहां तक कि शिवसेना के 50-50 के फार्मूले को खारिज करते हुए कहा दोनों दलों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ था, लेकिन शायद फडणवीस को नहीं मालूम कि अब 50-50 का ही जमाना आ गया है। इसी 50-50 को अर्द्धनारीश्वर कहते हैं, जिसमें पति-पत्नी को समान अधिकार मिलते हैं। वैसे भी वर्तमान का युग 50-50 का है। लोग 50-50 के बिस्कुट खा रहे हैं। ऐसे बिस्कुट को स्वाद लेकर खा रहे हैं और पचा भी रहे हैं। तारीफ  में कह रहे हैं कि इससे हाजमा अच्छा रहता है। कहा जा सकता है कि अब प्राइवेट-पब्लिक मोड पर सरकारी योजनाओं को चलाया जा रहा है तो अगर सरकार 50-50 पर बनने की बात की जा रही है तो कोई गलत बात नहीं है। अब तो आने वाला समय ही बताएगा कि शिवसेना किस दल के साथ शादी का जोड़ा पहनती है। तब बैंड वाले बजाएंगे-‘आज मेरे यार की शादी है, लगता है जैसे सारे संसार की शादी है।’