Friday, October 18, 2019 12:04 PM

भारत सरकार जीतेगी कश्मीरी मन

फिरोज बख्त अहमद

 स्वतंत्र लेखक

जब से कश्मीर में अनुच्छेद 370 एवं 35-ए को हटाया गया है तब से ही मीडिया दो भागों में बंटा हुआ है। एक भाग तो कहता है कि जो काम पिछले 70 वर्ष से रुका हुआ था, मोदी और अमित शाह एंड कंपनी ने उसे बखूबी अपने अंजाम को पहुंचा दिया। मीडिया की दूसरी लीग जिस रास्ते पर चल रही है, उसका मानना है कि कश्मीर में वहां के निवासियों को जो विशेषाधिकार दिए गए थे, उनकी अनदेखी हुई है। मीडिया कुछ भी कहे मगर धारा 370 का जाना ही कश्मीरियों के लिए बेहतर था। इस बीच, लेखक की दिल्ली में बसे काफी कश्मीरी छात्रों एवं निवासियों से बात हुई। बात तो इन सभी कश्मीरियों ने ठीक ढंग से करी, मगर लेखक इसलिए कुंठित था कि ये सभी कश्मीरी एक-जुबान हो धारा 370 के निष्कासन के विरुद्ध बोल रहे थे और साथ ही साथ सरकार के खिलाफ अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। पिछले 70 वर्षों में जिस प्रकार से पिछली सरकारों और विशेष रूप से अब्दुल्ला एवं मुफ्ती परिवारों ने कश्मीरियों के साथ घोर अन्याय व अत्याचार किए हैं, स्वयं को अमीर तरीन बनाया है और सही मायनों में इस जन्नत-उल-फिर्दौस का लाभ उठाया है और कश्मीरियों को गोलियों से भूना है, यह उसी का परिणाम है कि कश्मीर से धारा 370 का स्खलन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृहमंत्री,अमित शाह और रक्षा विषेशज्ञ एवं सलाहकार, अजित डोवाल द्वारा स्थापित कराकर धारा 370 व 35-ए को हटवाया। इंद्रेश का मानना है कि जिस प्रकार से 1990 से पूर्व कश्मीर वादी जन्नत का नजारा हुआ करती थी, वहां के फल व ड्राई फ्रूट बड़ी संख्या में उगाए जाते हैं और जिस प्रकार से डल झील व वूलर झील में सैलानी शिकारों के अंदर स्वर्ग के मजे लूटते थे, आज भी ऐसा ही वातावरण वापस लाना है। दाद देनी होगी इंद्रेश कुमार की कि जिस समय लालचौक पर पाकिस्तानी एवं अल-कायदा के झंडे फहराए जाते थे और पत्थरबाजी की जाती थी, वहां उन्होंने तिरंगा यात्रा निकाली और जिस प्रकार से इस मृदुभाषी संघ कार्यकर्ता ने वह भाषण देकर सभी कश्मीरियों के दिल जीते, उसका नतीजा यह निकला कि पहली बार तिरंगा यात्रा में इतने सारे कश्मीरी दिखाई दिए। आज भारतीय सेना में सैकड़ों कश्मीरी नौजवान देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। वास्तव में, दिल्ली में कश्मीरियों से वार्तालाप एवं गोष्ठियों का जिम्मा दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. गीता सिंह ने संभाल रखा है और समय-समय पर समाजसेवी संस्था ‘विश्वग्राम’ के द्वारा वह दिल्ली में रह रहे लगभग 30 हजार या उससे अधिक कश्मीरियों को ये समझाने पर तुली हैं कि कश्मीरी भारत के हैं और भारत कश्मीरियों का है, और यह कि धारा 370 से एक भी कश्मीरी को हानि नहीं अपितु लाभ होगा। पहले तो कश्मीरी छात्र यह मानने को ही तैयार नहीं थे कि धारा 370 को पूर्ण रूप से हटा लिया गया है। ख्वाब-ए-खरगोश की तरह आज भी उनका विचार है कि आने वाले दिनों में, धारा 370 शायद वापस आ जाए। यह संगोस्ठी जो कि शालीमार बाग में हुई थी। जब कश्मीरियों से पूछा गया कि वे आखिर क्या चाहते हैं, जैसे पाकिस्तान के साथ जाना चाहते हैं, पृथक कश्मीर देश बनाना चाहते हैं या भारत के साथ जोड़ना चाहते हैं, तो पाकिस्तान को तो उन्होंने पूर्ण रूप से नकार दिया। क्या वे भारत के साथ जुड़े रहना चाहते हैं अन्यथा एक आजाद देश चाहते हैं, इस पर उन्होंने खुल कर तो कुछ नहीं कहा, मगर उनकी बातों से जाहिर होता था कि वे अपनी शर्तों के साथ भारत से जुड़े रहना चाहते हैं कि जिनमें वे जेलों में बंद बेकसूर लड़कों को छोड़ा जाए, बेरोजगार कश्मीरी को बेरोजगारी भत्ता दिया जाए और उन्हें धन का रोजगार दिया जाए व अच्छी शिक्षा प्रदान कराई जाए, जिसके लिए प्रधानमंत्री मोदी, दिल-ओ-जान से तैयार हैं।