Monday, October 21, 2019 07:39 AM

भावी पीढ़ी का कल्याण होगा

- कर्म सिंह ठाकुर, सुंदरनगर, मंडी

‘राजा का सुख प्रजा में ही है, राजा को प्रजा के साथ पिता तथा पुत्र की तरह संबंध रखना चाहिए’। भारतीय पाश्चात्य राजनीति के प्रकांड विद्वानों ने शासक से इन्हीं शब्दों के आधार पर शासन करने का विचार दिया था। 26 अक्तूबर, 1947 को तत्कालीन राजा हरि सिंह द्वारा जम्मू रियासत का विलय भारतीय संघ में कर दिया। तब से लेकर वर्तमान तक जम्मू-कश्मीर भारत की शांति के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। जम्मू-कश्मीर का जनमानस भी हताश व निराश था। भौगोलिक दृष्टि से जम्मू-कश्मीर एक समृद्ध राज्य है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता, समाजिक असहिष्णुता इत्यादि गंभीर मुद्दों ने जम्मू-कश्मीर को नर्क बना दिया था। अब पांच अगस्त, 2019 को भारत के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 को पेश किया तथा ऐलान किया गया कि लंबे समय से लद्दाख के लोगों की मांग को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने के रूप में स्वीकार किया गया तथा जम्मू-कश्मीर को राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 द्वारा धारा 370 स्वतः ही समाप्त हो गई। जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में भारतीय संघ में दो नए केंद्र शासित प्रदेश जुड़ गए। अब जम्मू-कश्मीर का अपना अलग से संविधान नहीं होगा, उनका अपना ध्वज नहीं होगा। अब उन्हें संपूर्ण भारत की तरह शासन व्यवस्था को अपनाना होगा। इस नवीन कार्य में जम्मू-कश्मीर का जनमानस भी भारतीय संघ का सच्ची लगन से साथ दे, तो निश्चित तौर पर जम्मू-कश्मीर की आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुनहरा होगा।