Wednesday, July 17, 2019 08:22 PM

भूकंप के झटकों से हिला सोलन शहर

सोलन—उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन आथॉरिटी के अध्यक्ष केसी चमन में  कहा कि  रियल टाइम में भूकंप जैसी  घटना  के  दौरान  राहत और बचाव कार्यों के लिए अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों को आत्मसात करने की जरूरत है, ताकि वास्तविक स्थिति में भी राहत और बचाव कार्यों को  बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा सके। उपायुक्त ने यह बात गुरुवार को सोलन में भूकंप को लेकर आयोजित मेगा मॉकड्रिल  की समाप्ति के बाद समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मेगा मॉकड्रिल का मकसद आपरेशन के दौरान सामने आने वाले गैप को समझना भी है, ताकि सोलन जिला का जिला आपदा प्रबंधन प्लान व्यवहारिक रूप से  पूरी तरह से प्रभावी बने। उन्होंने यह भी कहा कि सभी टीमों ने मेगा मॉकड्रिल के दौरान अपने कार्यों को अच्छे तरीके से निभाया है।  उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले समय में जिला आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी द्वारा तय इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम के आधार पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और रिफ्रेशर कोर्स की व्यवस्था की जाएगी। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मधुसूदन शर्मा और अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी विवेक चंदेल के अलावा सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, होमगार्ड,  अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अलावा जिला आपदा प्रबंधन  अथॉरिटी से जुड़े विभिन्न विभागों के तमाम अधिकारी भी मौजूद रहे।  इससे पूर्व पहले से तय भूकंप के काल्पनिक परिदृश्य के मुताबिक सुबह सोलन में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप पर आधारित मेगा मॉकड्रिल के तहत भूकंप के झटके महसूस होने के बाद जिला आपदा प्रबंधन अथॉरिटी  (डीडीएमए) की टीम ठोडो ग्राउंड स्थित जिला आपदा ऑपरेशन सेंटर पहुंची और भूकंप से हुए नुकसान का शुरुआती आंकलन लेने के बाद राहत एवं बचाव दलों को घटना स्थल के लिए रवाना किया। मॉकड्रिल में सोलन के विवांता मॉल, साईं संजीवनी अस्पताल, डिग्री कालेज, हाउंसिंग बोर्ड कालोनी और नगर परिषद कार्यालय भवन को भूकंप के चलते काफी प्रभावित माना गया था। राहत एवं बचाव कार्यों का आपरेशन खत्म होने के बाद  ब्रीफिंग के दौरान उपायुक्त ने बताया कि सेना, सीआरपीएफ, पुलिस, होमगार्ड और अग्निशमन की टीमों ने घटनास्थल पर जाकर मॉकड्रिल को अंजाम दिया।