Thursday, October 17, 2019 01:01 AM

मंडयाली महोत्सव में छायी मंडी की संस्कृति

मंडी -चौथे मंडयाली महोत्सव में मंडी की समृद्ध संस्कृति की खूब झलक देखने को मिली। सरस्वती विद्या मंदिर के सभागार में तीन घंटे से अधिक चले इस महोत्सव में जहां मंडी जिला की दो बड़ी हस्तियों, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, को सम्मानित किया गया। वहीं रंगारंग कार्यक्रम ने भी खूब समां बांधा। मंडी नगर में भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दे रहा संस्थान संगीत सदन पिछले चार सालों से इस महोत्सव का आयोजन करता आ रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ  सुशोभित मलिक चौधरी मुख्य महाप्रबंधक एनटीपीसी कोलडैम ने दीप प्रज्वलित करके किया। तत्पश्चात मुख्यातिथि व उनकी धर्मपत्नी को स्मृति चिन्ह, शाल व टोपी पहनाकर उमेश भारद्वाज व संगीत सदन के वरिष्ठ पुरुष व महिला प्रशिक्षुओं ने सम्मानित किया। गायिकाओं ने सुरीली आवाज में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की व उसके बाद युवा कलाकारों ने उड्डी जायां कालेया कागा गाकर श्रोताओं का मनोरंजन किया। सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यत्कार केआर पंछी द्वारा लिखित मंडयाली गीत अपणी नजरा री तीरा रा नसाणा बणाई दे जब कलाकारों ने गाया तो हाल में बैठे श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा ओल्ड ब्वॉयज बैंड का गीत कश नी लगाणा धुआं नी उड्डाणा, सुणा धोरे चारे जीणा हो जिसको ठेठ मंडयाली में लिखा गया है। मंडयाली कवि विनोद बहल ने व इसका कर्ण प्रिय संगीत तैयार किया है उमेश भारद्वाज ने। गीत को सुनकर श्रोताओं ने बड़ी देर तक तालियां बजाकर ओल्ड ब्वॉयज बैंड के सदस्यों का स्वागत किया। शीघ्र ही इस गीत की रिकार्डिंग करके इससे स्कूलों व कालेज में पढ़ रहे युवाओं को जागरूक किया जाएगा,  ऐसा उमेश जी ने बताया। संगीत का प्रशिक्षण ले रही सीनियर महिला कलाकारों ने बसंत गाया, जिसके बोल थे नौईं नौईं रुत आईए नौयें आये फूल। बच्चों के कत्थक नृत्य, वेस्टर्न डांस व राजस्थान के प्रसिद्ध कालबेलिया नृत्य ने भी सभी की वाहवाही लूटी। अंतिम प्रस्तुति थी कव्वाली, मोसे नैना मिलाई के जिसे युवा कलाकारों ने विशेष अंदाज में गाकर वाहवाही लूटी। मुख्यातिथि ने इस अवसर पर विशिष्ठ सेवाओं के लिए डॉक्टर कपिल मल्होत्रा स्त्री रोग विशेषज्ञ व  सुंदरनगर के शास्त्रीय संगीत के गायक व प्रणेता रहे राष्ट्रपति मेडल प्राप्त डाक्टर बृजलाल भारद्वाज को उनके पारिवारिक सदस्यों को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। ईशा डोगरा, सर्वज्ञ व नित्यदर्शी वैद्य ने एंकर की भूमिका बखूबी निभाई व वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी तथा सदन के विजेता गायकों को मुख्यातिथि ने इनाम देकर सम्मानित किया।