मध्य हिमालय की मिट्टी फसलों के लिए बहुत उपयोगी है

हिमाचली का भौगोलिक परिचय -भाग-8

मध्य हिमालय की मिट्टी हल्की चिकनी, हल्की रेतीली तथा गहरे भूरे रंग की है, जो कि बीज आलू तथा अन्य शीतोष्ण फसलों के लिए उपयोगी है। इस प्रकार की मिट्टी मुख्यतः पछाद, रेणुका, अर्की, सोलन जोगिंद्रनगर, कांगड़ा, पालमपुर, डलहौजी, चंबा, ऊपरी भटियात तथा चुराह क्षेत्रों में पाई जाती है...

गतांक से आगे

इस शृंखला में अवस्थित प्रमुख स्थल हैं। जिला सिरमौर के पछाद व रेणुका तहसील, जिला मंडी के चच्योट व करसोग तहसील, जिला कांगड़ा के कांगड़ा तथा पालमपुर तहसील के ऊपरी भाग, ऊपरी शिमला पहाडि़यां तथा जिला चंबा की चुराह तहसील के ऊपरी भाग। शिमला के दक्षिण में स्थित ऊंची चोटी ‘चूड़धार’ (3647 मीटर) जिसे चूड़चांदनी के नाम से भी जाना जाता है, इसी क्षेत्र में स्थित है। सतलुज के उत्तर में मध्य हिमालय का उठाव समरूप से है। मध्य हिमालय को मिट्टी हल्की चिकली, हल्की रेतीली तथा गहरे भूरे रंग की है, जो कि बीज आलू तथा अन्य शीतीष्ण फसलों के लिए उपयोगी है। इस प्रकार की मिट्टी मुख्यतः पछाद रेणुका, अर्की, सोलन जोगिंद्रनगर, कांगड़ा, पालमपुर डलहौजी, चंबा, ऊपरी भटियात तथा चुराह क्षेत्रों में पाई जाती है। 

बृहद हिमालय

 यह पर्वत शृंखला हिमाचल प्रदेश की पूर्वी सीमा के साथ-साथ चलती है और इसकी ऊंचाई समुद्रतल से मुख्यतः 5000 मीटर से 6000 मीटर तक उठती है। सतलुज का तंग रास्ता इसे काटता है।  यह स्पिति के जल-निस्सारण को ब्यास के जल-निस्सारण से अलग करती है। इस क्षेत्र में वर्षा बहुत ही कम होती है। भूमि की उपजाऊ क्षमता शृंखला में स्थित अलग-अलग क्षेत्रों की अलग-अलग है। इस क्षेत्र का मौसम तथा मिट्टी सूखे फलों व फसलों के लिए उपयोगी है। बृहद हिमालय में हिमपात सामान्यतः अक्तूबर माह के मध्य में शुरू होता है तथा मार्च-अप्रैल तक जारी रहता है। इस समय पूरा क्षेत्र बाहरी दुनिया से कटा रहता है तथा जीवन एकाकी एवम कंटीला महसूस होता है। इस क्षेत्र के प्रसिद्ध दर्रे हैं-साच दर्रा, चिन्नी दर्रा, छबिया दर्रा और कुगटी दर्रा (चंबा जिला में ) स्पिति सुप्रसिद्ध जॉसकर शृंखला इसी क्षेत्र में पड़ती है। यह प्रदेश की अंतिम और पूर्वतम पर्वत शृंखला है, जो स्पिति, किन्नौर और कश्मीर को तिब्बत से अलग करती है। नदी सतलुज इसे शिपकी के पास काटती है।

                   -क्रमशः