मनमोहन, भीष्म और हम

पीके खुराना

राजनीतिक रणनीतिकार

सन् 1998 में कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हुई तो कांग्रेस का हाल बेहाल था। कांग्रेस के तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष सीताराम केसरी कांग्रेस को संभाल पाने में असमर्थ हुए तो एक दिन सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्यालय पर कब्जा करके स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाल लिया। हिंदी न जानने और अपने विदेशी उच्चारण के बावजूद उन्होंने कुशलतापूर्वक कांग्रेस का नेतृत्व किया और सन् 2004 में उनके नेतृत्व में कांग्रेस वापस सत्ता में आई...

26 सितंबर 1932 को जन्मे डा. मनमोहन सिंह सन् 1972 में भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार बने। वह भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, योजना आयोग के उपाध्यक्ष और स्विटजरलैंड के शहर जेनेवा में मुख्यालय वाले एक स्वतंत्र आर्थिक नीति थिंक टैंक ‘साउथ कमीशन’ के महासचिव भी रहे और फिर नरसिंह राव सरकार में उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए भारतवर्ष में उदारवाद की शुरुआत करके नाम कमाया। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे और अंततः 22 मई 2004 को देश के तेरहवें प्रधानमंत्री बने और 26 मई 2014 तक इस पद पर आसीन रहे। सन् 1998 में कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हुई तो कांग्रेस का हाल बेहाल था। कांग्रेस के तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष सीताराम केसरी कांग्रेस को संभाल पाने में असमर्थ हुए तो एक दिन सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्यालय पर कब्जा करके स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाल लिया।

हिंदी न जानने और अपने विदेशी उच्चारण के बावजूद उन्होंने कुशलतापूर्वक कांग्रेस का नेतृत्व किया और सन् 2004 में उनके नेतृत्व में कांग्रेस वापस सत्ता में आई। तब तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उनके विदेशी मूल के कारण उन्हें प्रधानमंत्री बनाने से इनकार किया तो उन्होंने डा. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनवा दिया। डा. मनमोहन सिंह मूलतः राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं और उनका कोई राजनीतिक आधार भी नहीं था, इसलिए अपने बूते इस पद पर पहुंच पाना उनके लिए संभव नहीं था। यही कारण है कि प्रधानमंत्री बनने पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह हमेशा सोनिया गांधी के वफादार रहेंगे और उन्होंने अपने इस कथन पर पूरी ईमानदारी से अमल भी किया। इस प्रकार उनकी प्राथमिक निष्ठा देश और देश के संविधान के प्रति न होकर, सोनिया गांधी के प्रति हो गई जिसका खामियाजा सारे देश ने भुगता क्योंकि यूपीए सरकार में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा और खुद ईमानदार होने के बावजूद डा. मनमोहन सिंह भ्रष्टाचारी कांग्रेसियों और गठबंधन के अन्य भ्रष्ट मंत्रियों को बर्दाश्त करते रहे।

अपनी संस्कृति के पुरातन इतिहास में हमें भीष्म पितामह का जिक्र मिलता है जिनकी तुलना डा. मनमोहन सिंह से की जा सकती है। अपने पिता की खुशी के लिए उन्होंने जीवन भर विवाह न करने, खुद राजा न बनने तथा अपने राजा के प्रति निष्ठावान रहने की प्रतिज्ञा की और उसे पूरी तरह से निभाकर इतिहास में अमर हो गए। इसलिए कोई बहुत बड़ा त्याग करने वाले या कठिन प्रतिज्ञा को निभाने वाले व्यक्ति की शपथ को ‘भीष्म प्रतिज्ञा’ बताया जाने लगा। भीष्म के इस महान त्याग के बावजूद उनका चरित्र सर्वथा दोषरहित नहीं रहा है। उन्होंने राजा के प्रति वफादार रहने की शपथ ली थी, चुप रहने की शपथ नहीं ली थी, सही मार्गदर्शन न करने की कोई बंदिश उन पर नहीं थी। वह परिवार के सर्वाधिक उम्रदराज सदस्य थे, सम्मानित थे, वह समय-समय पर राजा को नीति की सलाह दे सकते थे। यदि वह बलपूर्वक सलाह देते तो उनकी सलाह का अनादर किसी के लिए भी संभव न हो पाता। पर वे मौन रहे। जब दुर्योधन ने पांडवों को सूई की नोक भर भी जमीन देने से मना कर दिया तो वे चुप रहे, जब दुर्योधन ने पांडवों को जुआ खेलने के लिए आमंत्रित किया तो वे चुप रहे, जब पांडवों ने द्रोपदी को दांव पर लगाया तो वे चुप रहे, उस समय तो वे पांडवों को समझा सकते थे, रोक सकते थे, उसमें तो राज्य के विरोध का भी कोई सवाल नहीं था, लेकिन वे चुप रहे।

जब दुशासन ने भरे राज दरबार में रजस्वला द्रोपदी का अपमान किया तब भी चुप रहे। विरोध करने और सलाह देने में फर्क है। भीष्म ने इस फर्क को नहीं माना। यही उनका दोष है। डा. मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी के प्रति वफादारी रखी, लेकिन उस वफादारी की आड़ में भ्रष्टाचार को न रोक पाने का अपराध भी किया। डा. मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी के प्रति वफादारी के कारण अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया। उनकी ईमानदारी तब पूर्ण होती यदि वे भ्रष्टाचार बर्दाश्त न करते, सोनिया का विरोध किए बिना प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देते। उन्होंने ऐसा नहीं किया और अपनी नाक के नीचे हो रहे हर तरह के भ्रष्टाचार से आंखें चुराते रहे। यह एक तथ्य है कि जहां वे कुछ कर नहीं पाते थे, वे उस काम से ही विमुख हो जाते थे। सोनिया गांधी के प्रति वफादारी की शपथ निभाते हुए वे प्रधानमंत्री के रूप में ली गई शपथ का अनादर कर बैठे। डा. मनमोहन सिंह का यही अपराध है। हम सब भारतवर्ष के नागरिक हैं। नागरिक होने के नाते हमारे अधिकार ही नहीं, कुछ कर्त्तव्य भी हैं।

किसी देश का नागरिक होना भी एक संवैधानिक जिम्मेदारी है और किसी भी रूप में संविधान की भावना के विरुद्ध होने वाले कार्य को चुपचाप देखना, उसे बर्दाश्त करना, उसके बारे में अपना मत न देना भी उसी तरह के दोष के दायरे में आता है जो पुरातन इतिहास भीष्म जैसे महापुरुष ने किया और हालिया इतिहास में डा. मनमोहन सिंह जैसे ईमानदार माने जाने वाले व्यक्ति ने किया। अन्याय को चुपचाप बर्दाश्त करना या सरकार की गलत नीतियों पर चुप्पी साध लेना अपने कर्त्तव्य से विमुख होना है। हाल ही में एक राष्ट्रीय अखबार ने एक पुरस्कार सम्मेलन का आयोजन किया तो वहां प्रसिद्ध उद्योगपति राहुल बजाज ने प्रधानमंत्री की नीतियों को लेकर, देश में व्याप्त डर के माहौल को लेकर सवाल उठाया।

हम देख चुके हैं कि चुनाव आयोग अब रीढ़ विहीन है, सीबीआई और प्रवर्त्तन निदेशालय सरकार के इशारों पर चुन-चुन कर विरोधी दलों के नेताओं पर छापेमारी कर रहा है। दूसरी तरफ  भाजपा में जाते ही भ्रष्ट नेताओं के सारे पाप धुल जाते हैं। यदि हम इस पर सवाल नहीं उठाते तो हम अपने कर्त्तव्य से चूक रहे हैं। राहुल बजाज ने सार्वजनिक रूप से यह सवाल उठाकर मजबूत चरित्र का परिचय दिया है। आज मोदी मंत्रिमंडल के लोग राहुल बजाज की भर्त्सना कर रहे हैं और यह कहना मुश्किल है कि कब उनके व्यवसाय पर सीबीआई या ईडी की नजर पड़ जाएगी, लेकिन गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में डर के माहौल का सवाल उठा तो हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

इसका सीधा सा अर्थ है कि हाल में उपस्थित अन्य लोगों में से किसी अन्य ने चाहे यह सवाल नहीं उठाया, पर उनके दिल में यह सवाल था जरूर। हमें याद रखना होगा कि देश का नागरिक होने के नाते हमारे संवैधानिक कर्त्तव्य हैं और यदि हम इनसे चूकते हैं तो इतिहास अगर भीष्म सरीखे महान व्यक्ति और डा. मनमोहन सिंह सरीखे ईमानदार व्यक्ति को दोषी ठहरा रहा है तो इतिहास हमारे जैसे आम इनसान को कैसे माफ  करेगा? सबक यही है कि हम अपना कर्त्तव्य निभाएं, सरकार की गलतियों पर चुप्पी न साधें। विरोधी होना या विरोध करना आवश्यक नहीं है, यह सलाह के रूप में भी किया जा सकता है, लेकिन यदि हम चुप रहे तो यह अपने कर्त्तव्य से चूकना ही होगा। 

 ईमेलःindiatotal.features@gmail                                          

Related Stories: