मशरूम ने की विटामिन डी की भरपाई

खुंभ अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट में सजा राष्ट्रीय मेला, 17 राज्यों के किसान पहुंचे

सोलन - देश की 62 प्रतिशत जनसंख्या शहरों में रह रही है और विटामिन-डी जैसी समस्या का सामना कर रही है। खुंभ इस समस्या को दूर करने में अहम भूमिका निभा रहा है और इसकी डिमांड पूरा करने लिए खुंभ अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) चंबाघाट (सोलन) की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह बात भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के बागबानी विभाग के उपमहानिदेशक डा. एके सिंह ने कही। वह मंगलवार को डीएमआर में आयोजित 22वें राष्ट्रीय मशरूम मेले के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्यातिथि पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि प्रेस-मीडिया का योगदान मशरूम को लोकप्रिय बनाने के अहम है। वर्ष 1997 से यह निदेशालय खुंभ मेले का आयोजन करता आ रहा है व खुंब के क्षेत्र में नए-नए अविष्कार व नई-नई तकनीकियों को किसानों तक पहुंचा रहा है। उन्होनें कहा कि सोलन शहर में खुंभ 1961 से उगाई जा रही है और तब से लेकर अब तक मशरूम उत्पादन में 20 गुना बढ़ोतरी हुई है। इससे पूर्व मुख्यातिथि ने प्रदर्शनी का शुभारंभ किया साथ ही निदेशालय के प्रतिवेदन व खुंभ पर अखिल भारतीय अनुसंधान समन्वित परियोजना व पांच तकनीकी फोल्डर्ज का विमोचन किया और ई-लर्निंग पोर्टल भी लांच किया। इस बहुभाषी पोर्टल से देशभर के मशरूम उत्पादक मशरूम से संबंधित जानकारी घर बैठे हासिल कर सकेंगे।  कार्यक्रम के दौरान डीएमआर निदेशक डा. वीपी शर्मा ने मुख्यातिथि सहित विशिष्ट अतिथियों और मेले में आए समस्त किसानों, खुंभ उत्पादकों, वैज्ञानिकों का स्वागत किया व पिछले एक वर्ष की उपलब्धियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर कुलपति डा. परविंदर कौशल, डीएमआर के पूर्व निदेशक डा. मनजीत सिंह, प्रधान वैज्ञानिक डा. बीके पांडे सहित अन्य उपस्थित रहे। मेले में 17 राज्यों के 1200 किसानों आदि ने भाग लिया।

इन्हें किसान उत्कृष्ट अवार्ड

कार्यक्रम में मशरूम उत्पादन के लिए देश भर से चयनित सात उत्पादकों को किसान उत्कृष्ट अवार्ड दिया गया। इनमें बिहार के योगेंद्र प्रसाद, हमीरपुर हिमाचल प्रदेश के पृथी चंद,  यूपी के मनोज थरेजा, मणिपुर के निनगोमबा रोलेंद्रो मितेई, ओडिशा के लक्ष्मण कुमार, सोलन के अनिल ठाकुर व बसना महासामुंद के राजेंद्र कुमार शामिल रहे।