Monday, April 06, 2020 06:37 PM

महिला दिवस का क्या औचित्य?

राजेश कुमार चौहान, सुजानपुर टिहरा

आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सारी दुनिया में मनाया गया।  इसकी शुरुआत बेशक विदेशों से हुई हो, लेकिन भारत में भी अब इस पर विभिन्न प्रोग्रामों का आयोजन किया जाने लगा है। समय के साथ भारत की महिलाओं की दशा और सोच में काफी बदलाव आया है, आज भारत की नारी भी हर क्षेत्र, चाहे वो राजनीति का हो, सामाजिक हो या फिर अन्य, अपना वर्चस्व बेशक कायम कर रही है, लेकिन अभी भी भारत के कुछेक रूढि़वादी विचारधाराओं और धर्म के ठेकेदार लड़कियों के प्रति संकीर्ण सोच रखे हुए हैं, जिस कारण आज भारत सामाजिक बुराइयों दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, अनमेल विवाह के मकड़जाल से मुक्त नहीं हो पाया है। सामाजिक बुराइयों के लिए महिलाएं भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं, क्योंकि समाज में रूढि़वादी और अंधविश्वासी विचारधारा वाली महिलाएं कम नहीं हैं। भारत तब तक शक्तिशाली नहीं बन सकता, जब तक हर वर्ग के शत-प्रतिशत लोग लड़का-लड़की के बीच भेदभाव की संकीर्ण मानसिकता नहीं त्यागते और सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पर अमल नहीं करते।