Friday, December 06, 2019 09:41 PM

महीनों कैसे सेफ रही खाल, बनी सवाल

हमीरपुर - उपमंडल बड़सर के तहत पड़ते क्षेत्र में लैपर्ड की स्किन के साथ पकड़े दो तस्करों ने आखिर कैसे महीनों तक जानवर की खाल को सुरक्षित रखा, वन विभाग के लिए यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। आरोपियों के अनुसार तेंदुए छह महीने पहले जंगल में मृत मिला था। अगर ऐसा है तो इसकी खाल को इतने स्टीक तरीके से कैसे निकाला गया। निकालने के उपरांत महीनों तक स्किन को बिलकुल सुरक्षित रखा गया। यह सारा घटनाक्रम इस जानवर की खाल की तस्करी की तरफ इशारा कर रहा है। मामला सामने आने के बाद जहां वन विभाग अलर्ट हो गया है वहीं, पुलिस भी सतर्कता बरत रही है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के उपरांत तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस रिमांड के दौरान सच्चाई सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस पूछताछ में इस अवैध धंधे से जुड़े और नामों का भी पर्दाफाश हो सकता है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब लैपर्ड मृत मिले हैं। इनके नाखुन निकाल लिए गए थे। वन मंडल अधिकारी हमीरपुर डा. एलसी वंदना ने बताया कि प्रादेशिक और वन्य प्राणी, वन मंडल हमीरपुर के कर्मचारियों तथा वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, नई दिल्ली के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने एनएच रोड़ करेर मोड़ के पास करेर पंचायत कार्यालय, तहसील बड़सर, जिला हमीरपुर, में 14 नवंबर, 2019 लगभग सायं 4ः30 बजे संयुक्त रूप से छापामारी की थी। वाइल्ड लाइफ क्राईम कंट्रोल ब्यूरो के मुखबिर द्वारा तेंदुए की खाल के अवैध कब्जे के बारे में खुफिया सूचना प्राप्त होने पर विभाग द्वारा तुरंत कार्रवाई की गई। इस दौरान दो व्यक्तियों बांकू राम निवासी गांव पलेहड़ा तहसील बड़सर तथा पप्पू निवासी ग्राम लुहारड़ी, तहसील मुल्थान जिला कांगड़ा, को तेंदुए की खाल के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया। इनसे मौके पर तेंदुए की खाल बरामद हुई है। स्किन इतनी सफाई से निकाली गई थी कि कोई एक्सपर्ट ही ऐसा कर सकता है।  दोनों आरोपियों को तेंदुए की खाल के साथ पुलिस हिरासत में लिया गया है। मामले की विस्तृत जांच व वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत आगे की कारवाई के लिए हमीरपुर पुलिस को सौंप दिया गया है।