Tuesday, November 19, 2019 04:14 AM

मां-बेटे को सात साल की कैद

जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंबा राजेश तोमर की अदालत ने सुनाई सजा, 25 हजार जुर्माना ठोंका

चंबा -विशेष जज कम जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंबा राजेश तोमर की अदालत ने मां- बेटे को गैर इरादत्न हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और पच्चीस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न अदा करने की सूरत में दोषी मां गीता देवी व बेटे परस राम दोनों वासी गांव टिपरा पोस्ट आफिस गरोला को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना पडेगा। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में मुकदमे की पैरवी जिला न्यायवादी विजय रेहालिया ने की। अभियोजन पक्ष के मुताबिक टिपरा गांव की सावित्री देवी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी कि ताया ससुर हामा राम की अपनी कोई औलाद न होने के कारण परस राम को गोद लिया था। परस राम और हामा राम एक साथ ही रहते थे। 19 मई 2016 को वह अपने खेतों से जौ लेकर घर में रखने के कार्य में जुटी थी। जब वह घर में जौ रखकर दोबारा खेतों की ओर जा रही थी तो रास्ते में उसने देखा कि परस राम व अपनी माता गीता देवी संग हामा राम के साथ मारपीट कर रहा था। उन्होंने हामा राम को धक्का दिया, जिससे वह पत्थरों पर गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गया। चोट लगने के कारण उसके माथे से खून भी बहने लगा था। अगली सुबह पता चला कि हामा राम की मौत हो गई है। बाद में पुलिस को घटना की सूचना दी गई। पुलिस ने आरंभिक जांच के आधार पर मां गीता उर्फ खेल व बेटे परस राम के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल पूर्ण कर चालान अदालत में दायर कर दिया। अदालत में आरोपी मां- बेटे के खिलाफ भादंसं की धारा 302 की बजाय 304-11 के तहत सुनवाई हुई। अभियोजन ने अदालत में तेरह गांव पेश कर मां- बेटे पर लगे आरोप को साबित किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मां- बेटे को दोषी पाते हुए सात वर्ष की कैद और पच्चीस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।