Tuesday, September 17, 2019 03:48 PM

मां ! मुझे सलाम !

अशोक गौतम

साहित्यकार

खैर छोडि़ए सर! ये साहब भक्ति, बीवी भक्ति की बातें। साहब भक्ति, बीवी भक्ति की महिमा तो इतनी बृहद है कि जो इसे आज व्यासजी समय निकाल लिखने बैठ ही जाएं तो उन्नीसवां, बीसवां पुराण बन जाए। पर अपने व्यासजी तो इन दिनों अखबारों के संपादन, कॉलम लिखने में मग्न हैं। तो मैं फिर हट कर अपने पंद्रह अगस्त पर आता हूं। मत पूछो मेरी देशभक्ति ने कितना धमाल मचाया अबके पंद्रह अगस्त को। जिस तरह देश को स्वतंत्र करवाने के लिए अपनी पूरी ताकत स्वतंत्रता सेनानियों ने कभी झोंक दी थी, उसी तरह मैंने भी अपनी पूरी ताकत अबके पंद्रह अगस्त सेलिब्रेट करने में झोंक दी ताकि देश को स्वतंत्र करवाने वालों को मुझसे कोई गिला न हो। सबसे पहले बिन नहाए ऑफिस गया। बिन नहाया इसलिए कि नल में दस दिनों से जल नहीं। वहां पंद्रह अगस्त मनाने को सरकार द्वारा भेजे बजट का हम कुछ ने जमकर उपभोग किया। साहब ने साफ -साफ  कह दिया था कि पंद्रह अगस्त मनाने को आए बजट से एक भी पैसा सरकार को वापस नहीं जाना चाहिए। इंडिपेंडंेस डे सेलिब्रेशन ऐसा हो कि स्वर्ग से पंद्रह अगस्त देखने वाले भगत सिंह, बापू भी चौंक जाएं। तो मित्रो! हमने आफिस में वैसा ही पंद्रह अगस्त सेलिब्रेट किया। मैंने तब साफ -साफ  देखा कि स्वर्ग से हमारा स्वतंत्रता दिवस सेलिब्रेशन देखने वाले हमारे इस सेलिब्रेशन को देख सचमुच दंग थे। जो बचे खुचे समर्पित देशभक्त ऑफिस में पंद्रह अगस्त सेलिब्रेट करने आए थे, सबने डटकर पंद्रह अगस्त का रंग जमाया। खा पीकर एक से एक वीर रस से लथपथ देशभक्ति गीत गाए। और वह जिसके रंग में देशभक्ति बसी हुई है, उसने तो पीकर इतने देशभक्ति के गीत गाए कि सुन सुनकर हमारे कानों के पर्दे तक फट गए, पर उसका मुंह बंद न हुआ। जब वह देशभक्ति के गीत गाते-गाते बेसुध हो गया तो बाद में उसे ओला मंगवाकर उसके घर छुड़वाना पड़ा। आफिस में पंद्रह अगस्त मनाकर घर आया तो बीवी ने पूरियां बना रखी थीं। जमकर उन पर मुंह तो भांजा ही, पर आठ-दस पेट पर भी बांध लीं। फिर दोस्तों के दोस्त का फोन आ धमका यार! क्या कर रहा है पंद्रह अगस्त नहीं मनाना क्या? यार। अब मनाने का कतई मन नहीं मैंने पेट पर हाथ फेरते कहा तो वह बोला हद है यार। हम सब मिलकर कबसे तुम्हारा पंद्रह अगस्त मनाने को इंतजार कर रहे हैं और एक तुम हो, क्या कुछ खास है अबके पंद्रह पर बहुत कुछ खास है। उसके घर पार्टी रखी है। उसमें क्या है जो तुमने कहा था, वह सब है, पर इतना कैसे मैनेज कर गए तुम लोग कैसे क्या हम सबने आफिस में जो भी काम करवाने आता रहा, उससे पंद्रह अगस्त मनाने को चंदा लेते रहे। तो क्या। पूरे दस हजार हैं हमारे पास पंद्रह अगस्त मनाने को, दस हजार सुन मैं सोते- सोते जागा। हद है यार। बड़े कमीने देशभक्त निकले ये तो। दस हजार जमा कर गए। पंद्रह अगस्त के नाम पर भी हां तो। पिछली दफा हमने साहब के कुत्ते की क्रीमेशन के लिए जनता से पचास हजार इकट्ठा किए थे, उसने सीना चौड़ा कर कहा तो एक बार तो मुझे जनता की हम लोगों की खिलाने की शक्ति पर विश्वास ही नहीं हुआ। फिर मैंने इधर-उधर देखा कि कहीं बीवी तो आसपास नहीं। पर वह किचन में डटी थी। पंद्रह अगस्त मनाने पत्ती भी खेलेंगे और मित्रो। बस अभी-अभी बड़ी मुश्किल से जैसे-तैसे पंद्रह अगस्त मनाकर घर लौटा हूं। सच पूछो तो आज पंद्रह अगस्त मनाते- मनाते बहुत थक गया। हे पंद्रह अगस्त, उम्मीद है, तुझे मैं सारा साल याद रहूंगा। तुझे मेरे जैसा देशभक्त अलादीन का चिराग लिए किसी भी लोक में शायद ही मिले।