Monday, October 21, 2019 10:54 AM

मानव के लिबास में हैवान

 राजेश कुमार चौहान

छोटी बच्चियों के साथ दुराचार की खबरें अकसर सुनने को मिलती हैं। देश का बुद्धिजीवी वर्ग भी ऐसी मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाओं पर कम ही बोलता या लिखता है। आखिर ऐसे हैवान क्यों फांसी के फंदे तक नहीं पहुंचते? क्यों सरकारें दरिंदों को सख्त सजा देने में देरी करती हैं? आखिर कब बेटियां देश में सुरक्षित होंगी? देश में बच्चियों के साथ बढ़ते अपराध बहुत बड़ी चिंता का विषय हैं। अगर इन पर नकेल कसने के लिए अभी गंभीरता नहीं दिखाई गई, तो आने वाला समय इससे भी विकट हो सकता है। सख्त कानून के साथ-साथ जब तक लोगों में नैतिकता की भावना का प्रसार नहीं होगा, तब तक ऐसी घिनौनी घटनाओं पर रोक लगना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन है।