Sunday, July 21, 2019 12:03 AM

मानसून के बाद ‘वूली एफिड’ से रहें सचेत

अब थोड़े दिनों बाद मानसून के समाप्त होने का समय आ गया है। बागबान भाई एवं बहनें सेब तोड़ कर शीघ्र ही फारिग होने वाले हैं। इस व्यस्तता के बाद बागबानों का सेब के बागीचों की तरफ ध्यान थोड़ा कम हो जाता है, लेकिन यह समय ‘वूली एफिड ’ (रुएंदार तेला) के आक्रमण के लिए उपयुक्त है। इसकी बागीचों में पहचान वृक्षों पर रुएंदार झुंडों से होती है, क्योंकि अभी वृक्षों में एक-दो महीने तक वृद्धि लेने का समय है। इस कीट के आक्रमण से होने वाली क्षति से बचाव हो सके। यदि रूई को हटाया जाए, तो बहुत छोटे-छोटे बैंगनी रंग के कीट नजर आते हैं, जो टहनियों से रस चूसते हैं। इनका अधिक आक्रमण नई शाखाओं पर होता है। यदि वृक्ष पर कोई जख्म या दरारें हो, वहां पर भी कीट पनपता है तथा अगले वर्ष की पैदावार प्रभावित हो जाती है। यह कीट वृक्ष के ऊपरी भागों के अतिरिक्त जड़ों पर भी आक्रमण करते हैं। प्रभावित जड़ों में गांठें पड़ जाती हैं तथा वृक्ष अपना भोजन ठीक से प्राप्त नहीं कर पाते। पौधशाला में भी यह कीट काफी क्षति पहुंचाता है। इन कीटों का शत्रु एक परजीवी (एफीलाइनस माली) इस नाशी कीट की संख्या को वृक्ष के ऊपरी भागों में कुछ कम कर देता है। परजीवी प्रभावित नाशी कीट सिकुड़ जाते हैं तथा उन पर रुईं भी नहीं रहती। इस नाशी कीट के लक्षण वृक्ष के ऊपरी भाग में तो नजर आ जाते हैं, लेकिन जड़ों में तौलिए की मिट्टी हटाकर की लक्षण देखे जा सकते हैं। इसके प्रबंधन हेतु निम्नलिखित कार्य करने की आवश्यकता है।

* वृक्ष के ऊपरी भागों में क्लोरपायरिफॉस 20 ईसी (डरमेट, ट्राइसेल, मॉसवान, नैविगेटर, डरसवान) का 20 मिली दबा प्रति दस लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। यदि बागीचों में कुछ ही वृक्षों पर आक्रमण है, तो हम केवल प्रभावित वृक्षों पर ही छिड़काव करें।

* वृक्षों पर जख्म वाले स्थानों पर ब्याधिनाशक पेस्ट का प्रयोग करें, ताकि जख्म भर जाए तथा नाशीकीट इन जख्मों पर न पनप सकें।

* इसी प्रकार वाटर शूट्स, जो वृक्ष के निचले भाग से निकलती हैं, जिन्हें हमारे बागबान जड़वे भी बोलते हैं, को काट कर नष्ट कर दें, क्योंकि यह भी एफिड की वृद्धि में सहायक हैं।

* जड़ों में नियंत्रण हेतु क्लोरपायरिफॉस 20 ईसी दवा का 40 मिली प्रति दस लीटर पानी में घोल बनाकर तौलियों को सिंचित करें। इस दवा का पौधशाला में भी प्रयोग किया जा सकता है।

* नया बागीचा लगाने के लिए किसी भी पंजीकृत पौधशाला से ही पौधे खरीदें। डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी तथा इसके अनुसंधान केंद्रों पर भी जनवरी माह में पौधे उपलब्ध होते हैं।

* एमएम सीरीज के भूलवृंत पर व्यावसायिक किस्मों को ग्राफ्ट कर पौधे तैयार किए जाएं तो जड़ें आक्रमण से बच जाती हैं। वैसे भी जड़ों में इस कीट का नियंत्रण काफी मुश्किल होता है

यदि बागबानों को परामर्श की आवश्यकता हो तो वे किसी भी नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र एवं अनुसंधान केंद्र में कार्यरत वैज्ञानिकों से संपर्क कर सकते हैं। बागबानी विभाग के अधिकारी भी आपकी समस्या का समाधान कर सकते हैं।