Tuesday, June 02, 2020 11:28 AM

मार्च-अप्रैल का नहीं मिला वेतन

सोलन-कोरोना महामारी के कारण प्रदेश की तमाम जनता एक तरफ महामारी के गंभीर खतरे से त्रस्त है, वहीं दूसरी ओर इस महामारी से उत्पन्न आर्थिक व सामाजिक संकट ने जनता का सुख छीन लिया है। लोग आर्थिक व सामाजिक रूप से भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। इससे सबसे बुरी तरह से मजदूर वर्ग प्रभावित व पीडि़त हुआ है। उद्योगों में कार्यरत मजदूरों के बड़े हिस्से का मार्च, अप्रैल 2020 के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। असंगठित क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले श्रमिक वर्ग का बहुत बड़ा हिस्सा इस महामारी से आर्थिक तौर पर बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। मजदूर वर्ग पर विपदा के दौर में उसे आर्थिक सामाजिक मदद की दरकार थी, उसे प्रदेश सरकार की सहानुभूति की जरूरत थी ताकि वह संकट काल से बाहर निकल कर अपना गुजार बसर कर सके। इन सभी बातों को लेकर शुक्रवार को ट्रेड यूनियन संयुक्त मंच मध्य प्रदेश  एटक की अध्यक्षता में इंटक व सीटू ने डीसी के माध्यम से ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपा है। जिसमें विभिन्न मांगों का ब्यौरा दिया गया है। एटक के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश का कहना है कि हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और त्रिपुरा जैसे राज्य में श्रम कानूनों में किए गए अथवा प्रस्तावित मजदूर विरोधी संशोधनों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए ।

आठ घंटे काम करवाना सही नहीं

इंटक के प्रदेशाध्यक्ष बाबा हरदीप सिंह का कहना है कि आज पूरे देश में आज 12 श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा एमपी यूपी और गुजरात में जिस तरह से श्रम कानूनों को निरस्त करने का निर्णय लिया है उसका इंटक विरोध करती है। उन्होंने कहा की भाजपा के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने अगवाई करते हए एकतरफा रुप से फैक्ट्ररी एक्ट के अनुसार वैध मुआवजे के बगैर दैनिक कामकाज का समय आठ से 12 घंटे कर दिया है। जिससे मजदूर वर्ग पर काफी असर पड़ रहा है।