Wednesday, July 17, 2019 08:23 PM

मिल्कफेड ने सड़ने को छोड़ी मशीनें

करसोग—जनता के खून पसीने की गाढ़ी कमाई से खरीदी गई लाखों रुपए की सरकारी मशीनरी को किस प्रकार धूल चटाई जाती है इसकी जीती जागती मिसाल पुराना मिल्क चिलिंग प्लांट का केंद्र वन मंडल करसोग के कार्यालय समीप देखी जा सकती है। लगभग छह वर्ष पहले मिल्क चिलिंग प्लांट तो नई मशीनरी के साथ किराए के नए भवन में बदला जा चुका है परंतु पुराना भवन व उसके अंदर लाखों रुपए की सारी मशीनरी मिल्कफैड द्वारा सड़ने के लिए छोड दी गई हुई है, भुला दी गई है, और जंग खा रही मषीनरी को बचाने के लिए फिलवक्त कोई भी प्रयास हो रहा है, ऐसा कतई दिखाई नहीं दे रहा है। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले करसोग बाजार के समीप प्रदेष दुग्ध प्रसंग द्वारा लगभग दो हजार लीटर दूध की क्षमता वाला मिल्क चिलिंग प्लांट स्थापित किया जो कि तंग सड़क व दूध क्षमता बढ़ने की बात कहते हुए लगभग पांच वर्ष पहले कुट्टी जोहड़ में किराए का भवन लेकर स्थानान्तरण हो चुका है परंतु हैरानी की बात है कि कर्जे के बोझ तले दबे प्रदेश में मिल्कफैड द्वारा पुराना सरकारी भवन व उसमें लगी सारी लाख रुपए की मशीनरी सड़ने के लिए भवन सहित लावारिस छोड दी हुई है, जो अनेकों दफा सुर्खिया बन चुके मामले पर मिल्कफैड के कानों तक जुं नहीं रेंग रही है। जुटाए गए तथ्यों में पशु पालन विभाग से ली गई जमीन पर मिल्कफैड द्वारा जो अपना भवन निर्माण किया गया है उसमें दूध अभिषीतन से जुडी लाखों रुपए की मशीनरी, जनरेटर, कार्यालय की कुर्सियां, मेज आदि अनेकों सामान लगभग साढे पांच वर्षों से धूल फांक रहा है, जिसकी ओर मिल्कफैड का कोई भी ध्यान नही है। हालांकि लगभग दो साल पहलेे करसोग के बगषाड़ तथा पांगणा में नए मिल्क चिलिंग प्लांट स्थापित किए गए जिसमें करसोग की सड़ रही पुरानी मशीनरी को उपयोग में लाने के स्थान पर कोई कार्रवाई नहीं की गई बल्कि नई लाखों रुपए खर्च कर मषीनरी खरीद करने का काम किया गया। जिस पर वर्तमान प्रदेश सरकार को मिल्कफैड से जबाव तलबी करनी चाहिए। पुराने मिल्क चिलिंग प्लांट भवन के अंदर वाली स्थिती को बाहर से देखा गया तो मषीनरी सहित सभी सामान पर धूल की मोटी परत जमी हुई है, मशीनों व जनरेटर को जंग लगना जारी है, कुछ समय बाद वह मशीनरी सडते हुए किसी काम की नहीं होगी व मिल्कफेड नीलामी कर कुछ हजार रुपए लेकर किसी कबाडिए के हवाले करेगा। लाखों रुपए की मशीनरी को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहें हैं जबकि करसोग का पुराना मिल्क चिलिंग प्लांट कहीं ओर आसानी से स्थापित करते हुए किसानों बागबानों को ग्रामीण क्षेत्र में सुविधा दी जा सकती है व जनता के पैसे को जंग की भेंट चढ़ने से बचाया जा सकता है परंतु यह तभी संभव है जब अधिकारियों की सोच जनता के पैसे प्रति बदलेगी। उल्लेखनीय है कि न्यायालय द्वारा यह भी गत में हिदायत दी है कि कहंीं हिंसा के दौरान नुकसान की भरपाई संबंधित लोगों से करनी चाहिए ठीक उसी तरह जिन अधिकारियों के कारण सरकारी संपति की अनदेखी हो रही है उसमें भी इसी प्रकार की कार्रवाई हो ऐसा सरकार द्वारा दिषा-निर्देष होना चाहिए। इस बारेे मिल्कफैड के वरिष्ठ प्रबंधक उतपादन उमेश गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला ध्यान में है जिसमें लावारिस पडी करसोग की मशीनरी को इसतेमाल के लिए कहीं ओर आगामी सर्दियों में लेजाने की योजना है ओर भवन में मिल्कबार खुलेगा, पर अधिकारीयो की यह बात हर बार झूठी साबित हो रही है इससे पहले लगभग पांच सालों के दोरान भी अनेकों दफा मिल्कफैड के प्रबंध निदेशक तक के अधिकारी समाधान की बात करते रहैं है, पर हकीकत में किसी अधिकारी का जनता के पेसे की बर्बादी रोकने संबधी कोई कार्रवाई नहीं हो रहीं।

ममला ध्यान में है,जल्द निकाला जाएगा समाधान

लाखों रुपए खर्च करते हुए मिल्कफेड ने करसोग में पशुपालन विभाग से जमीन लेकर अपना भवन बनाया, लगभग पांच लाख खर्च करते हुए 2000 लीटर की क्षमता वाले मिल्क चिलिंग प्लांट को स्थापित किया तथा उसके बाद दूध से लदे हुए वाहनों के लिए रास्ता सुविधाजनक नहीं होने की बात कहते हुए मिल्क चिलिंग प्लांट लगभग 8000 महीना का किराया भुगतान करते हुए नए भवन में नई मशीनरी सहित लगा दिया गया हुआ है जबकि पुराने भवन तथा पुरानी मशीनरी की सालों से कोई सुध नहीं ली जा रही है। अनेकों दफा समाचार पत्रों की सुर्खियां बन चुके इस लापरवाही वाले मामले में हर बार मिल्कफेड के अधिकारी झूठ बोलते हुए अपना पक्ष रखते हैं कि बहुत जल्द इसका समाधान किया जाएगा परंतु लगभग छह वर्षों के दौरान सरकारी भवन के अंदर जो भी मिशनरी पड़ी है उसको छोड़ने के लिए छोड़ा गया हुआ है बचाने के लिए तथा कहीं और मशीनरी स्थापित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं जिसके चलते करसोग के कुछ समाजसेवी इस मामले को आगामी दिनों में प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष रखते हुए अधिकारियों की लापरवाही तय करने की मांग करने जा रहे हैं उम्मीद है कि उससे पहले अधिकारियों के कान पर जूं रेंग जाएगी व उन्हें जनता के खर्च पैसे से खरीद की गई मशीनरी व निर्माण किया गया भवन किसी उपयोग में आ सके इसका प्रयास होगा। मिल्कफैड के चेयरमैन निहालचंद ने कहा कि मामला ध्यान में आया है बहुत जल्द संबंधित अधिकारियों के साथ इस बारे बात करते हुए कोई समाधान निकाला जाएगा।