Saturday, August 08, 2020 06:06 PM

मुलम्मा उतर गया

निर्मल असो

स्वतंत्र लेखक

अपने चीनू राम की जिंदगी ठीक चल रही थी, लेकिन पड़ोसी चीन की हरकतों से दुखी होकर उसको सबसे पहले अपने नाम पर ऐतराज हो गया। उसे लगा यह देशभक्ति के खिलाफ होगा अगर वह आइंदा चीनू राम बनकर जीए, लिहाजा उसने मियां मिट्ठू नाम रख लिया। अब उसे चीनी पर संदेह हो गया, तो गुड़ की ओर भागा, लेकिन इस बीच आपसी सहमति से गांव वालों ने चीनी खाना ही छोड़ दी। पूरा गांव एकमत था और उन्हें लगने लगा कि चीनी वस्तुएं छोड़ देंगे, तो देश बदला ले लेगा और बदल भी जाएगा। फिर क्या था चीनू राम उर्फ मियां मिट्ठू सबसे पहले आगे आया और सोचने लगा कि खुद को चीन से अलहदा करने का इससे बड़ा अवसर कहां मिलेगा। उसका हाथ जेब में गया तो मोबाइल तोड़ना पड़ा और इसी तरह उसके टीवी-फ्रिज चकनाचूर हो गए। घर धीरे-धीरे खाली हो गया और उसकी जगह देश प्रेम भर गया। कुछ देर बाद वह केवल दर्जी से सिले कच्छे-बनियान में नंगे पांव खड़ा था। उसके सामने केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के आदर्श नाच रहे थे। कुछ दिन पहले जैसे उन्होंने ‘गो कोरोना गो’ कह कह कर देश में नाम कमाया था, अब चीनी रेस्तराओं का विरोध कर रहे थे। उसे भी लगा कि अगर हिंदोस्तानी चोमिन बगैरा नहीं खाएंगे, तो चीन डर जाएगा और हुआ भी ऐसे ही। चीन ने अपनी सरकार से समझौता कर लिया और शर्त रखी कि अगर भारतीय चाइनीज व्यंजन छोड़ दें, तो वह शर्म में डूब कर पीछे हट जाएगा, लेकिन रेस्तरां चलते रहे तो ऐसी खुशबू सूंघने के लिए उसे कभी लद्दाख तो कभी किसी और रास्ते से आना पड़ेगा। चीनू राम तब से जोर लगा रहा है कि भारतीय लोग चाइनीज वस्तुओं व खाद्य पदार्थों का बहिष्कार करें। वह चलता-चलता गुजरात में सरदार पटेल की तीन हजार करोड़ की मूर्ति के पास पहुंच गया। पास ही उसे पटेल जी मिल गए जो अपनी मूर्ति से ही भयभीत थे। उन्हें जबसे पता चला है कि मूर्ति पर चीन की परत चढ़ी है, तब से आहत होकर फिर से देश की परिक्रमा कर रहे हैं। उन्हें दुख था कि वह नेहरू के युग में क्यों हुए वरना आज मूर्ति के बजाय हकीकत होते, तो न पाकिस्तान बोलता और न ही चीन। वह देश प्रेमियों के मुरीद होकर सोच रहे थे कि उनके समय में कांग्रेस ही क्यों थी और अगर भाजपा होती, तो तमाम गलतियां न होतीं। चीनू राम ने उनसे पूछा, ‘क्या आप मूर्ति में रहना पसंद करते हैं और चीन की परत के नीचे कैसा महसूस करते हैं?’ पटेल ने जवाब दिया, ‘दरअसल यह भी नेहरू की ही गलती है।’ चीनू हैरान था कि मूर्ति तो मोदी जी ने बनवाई, तो नेहरू की इसमें क्या गलती? पटेल बोल रहे थे, ‘नेहरू ने अगर यह सोचा होता कि 2014 के बाद क्या होगा, तो न मेरी मूर्ति होती और न ही राहुल गांधी की यह हालत होती। नेहरू की गलतियों के कारण मैं मूर्ति बन गया, लेकिन महात्मा गांधी तो अब मूर्तियों में भी दिखाई नहीं देते।’ पटेल को अपनी मूर्ति पर चढ़े चीनी मुलम्मे का दुख था, लेकिन इससे भी अधिक रंज इस बात का था कि नेहरू के समकालीन होने के कारण न जाने कब तक ये मुलम्मे यूं ही कभी चढ़ते और कभी उतरते रहेंगे। अंत में वह चीनू राम पर प्रसन्न हुए कि उसके कारण चीन का मुलम्मा उतर गया, वरना भारत को तो अब यह भी मालूम नहीं कि उसके शरीर पर परत किसकी चढ़ी है और हकीकत कितनी विपरीत खड़ी है।

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