मृत्युंजय जप कैसे करें

प्राचीन काल में दुर्गय नामक एक महाबली असुर ने जन्म लिया था। उसने ब्रह्मा से एक अद्भुत वरदान प्राप्त करने के पश्चात विश्व के चारों वेदों को लुप्त कर दिया। बल के घमंड के कारण उसने संपूर्ण ब्रह्मांड को आतंकित एवं परेशान किया हुआ था। उसके अत्याचारों को देखकर देवता एवं समस्त प्राणी आतंकित हो गए। वेदों के लुप्त हो जाने के कारण संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान नष्ट हो गए एवं अवर्पण होने से घोर अकाल पड़ गया। नदी व नाले सूख ही गए, समुद्र भी सूखने लगे। भोजन एवं पानी के अभाव के कारण लोग चेतनाहीन होने लगे, तीनों लोकों में त्राहि-त्राहि मच गई...

-गतांक से आगे...

दुर्गा देवी का आविर्भाव

प्राचीन काल में दुर्गय नामक एक महाबली असुर ने जन्म लिया था। उसने ब्रह्मा से एक अद्भुत वरदान प्राप्त करने के पश्चात विश्व के चारों वेदों को लुप्त कर दिया। बल के घमंड के कारण उसने संपूर्ण ब्रह्मांड को आतंकित एवं परेशान किया हुआ था। उसके अत्याचारों को देखकर देवता एवं समस्त प्राणी आतंकित हो गए। वेदों के लुप्त हो जाने के कारण संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान नष्ट हो गए एवं अवर्पण होने से घोर अकाल पड़ गया। नदी व नाले सूख ही गए, समुद्र भी सूखने लगे। भोजन एवं पानी के अभाव के कारण लोग चेतनाहीन होने लगे, तीनों लोकों में त्राहि-त्राहि मच गई। तब देवताओं ने भगवती की शरण ली।

उन्होंने विनय पूर्वक प्रार्थना की मां, जैसे आपने शुंभ-निशुंभ धूम्राक्ष, चंड-मुंड, रक्तबीज, मधु-कैटभ तथा महिष आदि राक्षसों का वध करके हमारी रक्षा की है, उसी प्रकार दुर्गमासुर से भी हमारी रक्षा करो। हमें बचाइए तथा इसके द्वारा लाए गए अकाल से प्राणियों की रक्षा कीजिए। देवताओं के इस मनुहार से कृपामयी देवी प्रकट हो गईं और अपने अनंत नेत्रों से युक्त रूप का उन्हें दर्शन कराया। अन्न व जल के बिना व्याकुल जीवों को देखकर उन्हें बड़ी दया आई और उनके अनंत नेत्रों से अश्रुजल की धाराएं बहने लगीं। उन धाराओं से सब लोग लुप्त हो गए। सरिताओं एवं समुद्रों में अगाध जल भर गया। देवी ने सभी प्राणियों के लिए यथायोग्य भोजन प्रस्तुत किए। उन्होंने महात्मा पुरुषों के लिए अपने हाथों से दिव्य फलों का वितरण किया। देवता, ब्राह्मण और मनुष्य सभी प्राणी संतुष्ट हो गए।

तब देवी से देवताओं ने प्रार्थना की हे मां, जैसे आपने समस्त विश्व को मरने से बचाकर हम लोगों पर कृपा की है, वैसे ही अब इस दुष्ट दुर्गमासुर से हमें निजात दिलाइए, उसने वेदों का अपहरण कर लिया है, जिससे संपूर्ण धार्मिक क्रिया नष्ट हो गई है। देवी ने कहा-देवगण आप चिंतित न हों, मैं आपकी सभी मनोकामना पूरी करूंगी। अब आप निर्भय होकर अपने-अपने स्थानों पर वापस चले जाएं। देवतागण उन्हें प्रणाम कर अपने यथास्थान लौट गए। तीनों लोकों में आनंद की लहर दौड़ गई। दुर्गमासुर यह जानकर अत्यंत विस्मित हुआ तथा सोचने लगा मैंने तीनों लोकों को रुला डाला था। यह सब भूख-प्यास से मर रहे थे। देवता भी भयभीत थे, किंतु अचानक यह क्या हो गया है, वस्तुस्थिति से अवगत होते ही उसने अपनी आसुरी सेना लेकर देवलोक पर चढ़ाई कर दी।

                                          -क्रमशः

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