मेरी राब्ता मेरी मां हैं…

जी टीवी पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक ‘तुझसे है राब्ता’ में सेहबान अजीम एक पुलिस अधिकारी की भूमिका अदा कर रहे हैं। प्रस्तुत है सेहबान अजीम से उनके शो को लेकर हुई वार्ता के प्रमुख अंश...

इस शो के बारे में बताइए?

‘तुझसे है राब्ता’ एक बड़े ही खूबसूरत और दिलचस्प कान्सेप्ट पर आधारित है, मैं इस शो का हिस्सा बनकर बेहद उत्साहित हूं। मैं इसमें मल्हार राणे नाम के एक पुलिस वाले का रोल कर रहा हूं, जो अपने काम के प्रति बेहद वफादार और इमानदार है, लेकिन साथ ही वह काफी मिलनसार और प्यारा इनसान है। मल्हार की सादगी और खुलेपन के चलते मैं इस किरदार से मजबूती से जुड़ जाता हूं और इससे मुझे किरदार निभाने में आसानी हो जाती है। यह दूसरी बार है जब मैं छोटे पर्दे पर पुलिस वाले का रोल कर रहा हूं।

आपका राब्ता किससे है?

मेरी मां से, मेरी मां मेरे दोस्त की तरह है। हम पांच भाई हैं, हमारी कोई बहन नहीं है। हमारे घर पर सिर्फ  एक ही औरत है वह मेरी मां हैं, जो एक टीचर है। मैं अपने दोस्तों व गर्लफे्रंड, सबके बारे में अपनी मां से डिसकश करता हूं। मैं कहां सच बोल रहा हूं, कहां झूठ वह हमेशा मुझे पकड़ लेती हैं। इसलिए मैं अपनी मां से कुछ भी नहीं छुपाता हूं। कभी -कभी मेरी मां मुझे कोसती भी है, मगर वह ऐसा भी कहती है कि मुझे तुम पर गर्व है कि तुम मेरे बेटे हो। यह वह राब्ता है मेरे और मेरी मां के बीच में चलता रहता है। मेरा बड़ा भाई और मेरी मां दोनों थोड़े से जिद्दी हैं, तो हमेशा मैं उन दोनों में बैलेंस बनाता हूं। इस किरदार के साथ मेरा वही कनेक्शन है, तो इसी वजह से इस कैरेक्टर को मैंने हां बोला था।

आप इंडस्ट्री में किस अभिनेता के पुलिस वाले किरदार से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?

आई थिंक शशि कपूर जी, इन्होंने कई फिल्मों में पुलिस वाले के किरदार निभाए हैं। वह काफी सही व अच्छा काम करते थे। यह बात अलग है कि बच्चन साहब का रोल ज्यादा होता था। मैं हमेशा उन्हें पुलिस वाले के किरदार में पसंद करता था, क्योंकि वह कहीं न कहीं एक पुलिस वाले का परफेक्ट किरदार दर्शाते थे। चाहे वह छोटा सा ही डायलाग हो कि ‘भाई तुम साइन करते हो या नहीं’। जब तक वह फिल्मों में करते रहे मैं हमेशा शशि कपूर जी का बहुत बड़ा फैन रहा हूं।

आपकी नजर में इस शो की सबसे बड़ी क्या विशेषता है?

पुरानी कहावत है, खून का रिश्ता तो खून का होता है। यह बात सच है इसमें कोई दो राय नहीं है। दूसरी बात यह है भी है कि कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं, जो आपके दिल के इतने करीब होते हैं कि खून के रिश्ते से भी ज्यादा गहरे होते हैं। मुझे लगता है कि आज तक किसी भी चैनल ने यह ट्राई ही नहीं किया है कि इस रिश्ते को ऐसे दिखाएं कि लगे यह तो खून से बढ़कर रिश्ता है। इस शो में जो मां-बेटे का रिश्ता यह वही है। इस शो में यही दर्शाया गया है कि खून के रिश्ते दिल के करीब होते हैं व अच्छे होते हैं। मगर कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो खून के रिश्तों से बढ़कर हो जाते हैं।

मुंबई में आप दिल्ली को कितना मिस करते हैं?

सबसे पहले अपनी मां को बहुत मिस करता हूं, वह मुंबई नहीं आना चाहती व मां के हाथ का बना हुआ खाना। दिल्ली के अपने दोस्तों को बहुत मिस करता हूं। दिल्ली का मौसम यहां की सर्दी की बात ही अलग है। मुबई में बारिस अच्छी होती है, यहां सर्दी होती ही नहीं है। सबसे ज्यादा दिल्ली का खाना मिस करता हूं। दिल्ली की सबसे बड़ी खासियत है, जो शायद मुंबई में नहीं है। दिल्ली का स्ट्रीट फूड भी बहुत अच्छा होता है। इसको खाने से न तो आपका पेट खराब होगा और न ही कोई परेशानी होगी। आप देश के किसी भी कोने से आए हैं आपको दिल्ली का खाना पसंद आएगा।

पहले और आज की इंडस्ट्री में कितना बदलाव आया है?

पहले और आज की तारीख में काफी कुछ चैंज आया है। इंडस्ट्री में काफी ग्रोथ हुई है, चीजें अच्छी हो रही हैं व मीडियम बढ़ रहा है। ‘इन द सैंस’ कि पहले टीवी के दो-तीन चैनल थे, फिर चार हो गए फिर छह हो गए। आपके पास वैरायटी है कि आपने क्या देखना है। पहले ऐसा नहीं था क्योंकि एक ही चैनल था दूरदर्शन। जब आपके पास आफशन नहीं थे, अब आपके पास आफशन हैं। अब हरेक चैनल अच्छा काम दिखाना चाहता है, जब वे अच्छा दिखाएंगे जब ही दर्शक हमारा चैनल देखेंगे। पहले चैनल कम थे, काम कम था। अब इतने चैनल हैं कि जो भी कलाकार घर-परिवार को छोड़कर यहां आते हैं। यहां पर उनको ज्यादा प्लेटफार्म मिलता है, अपने आप को परूफव करने का, अपनी अभिनय प्रतिभा दिखाने का पूरा-पूरा मौका मिल रहा है।

— अजय शर्मा, दिल्ली

 

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