Friday, December 13, 2019 07:25 PM

मेले में कम खरीददारी से व्यापारी निराश

 मूलभूत सुविधाओं व बेहतर कलाकारों के अभाव के चलते इस बार नहीं जुटी ज्यादा भीड़

संगड़ाह -अंतरराष्ट्रीय मेला श्रीरेणुकाजी में इस बार कम भीड़ जुटने अथवा खरीददारों की संख्या में भारी कमी के चलते मेला बाजार के व्यापारियों में निराशा है। मेले में सजी 350 के करीब मुख्य दुकानों के अधिकतर मालिकों के अनुसार इस बार अब तक गत वर्ष के मुकाबले आधी बिक्री भी नहीं हुई तथा छह दिवसीय इस मेले के दौरान शुरुआती पांच दिनों में लागत मूल्य भी पूरा नहीं हुआ।  खाद्य सामग्री अथवा मिठाई आदि की अधिकतर दुकानें जहां रेणुकाजी, संगड़ाह व नाहन आदि स्थानों के स्थानीय व्यापारियों द्वारा लगाई गई हैं। वहीं कपड़ों, चूडि़यों, बरतनों व सूखे मेवों आदि की दुकानें चलाने वाले अधिकतर व्यापारी उत्तर प्रदेश के हैं। मेला व्यापारियों तथा स्थानीय लोगों के मुताबिक इस बार मेलार्थियों के लिए बाहरी डिपो से मात्र चार अतिरिक्त बसें मंगवाए जाने, सांस्कृतिक संध्याओं में सूबे के अन्य अंतरराष्ट्रीय मेलों के स्तर के कलाकार न बुलाए जाने तथा उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री के न आ पाने जैसे कारणों के चलते इस बार भीड़ कम रही। वर्ष 1982 में रेणुकाजी बोर्ड अथवा जिला प्रशासन के हाथ मेले की कमान आने के बाद यहां डेरे व जातर जैसी परंपराएं पहले ही समाप्त हो चुकी हैं। डेरे लगने के निर्धारित अधिकतर स्थानों पर झूले व अन्य दुकानों के लिए प्लाट बेचे जाने के चलते गिरिपार व जौनसार आदि के श्रद्धालुओं ने कुछ साल हालांकि साथ लगते जंगलों में डेरे लगाए, मगर बाद में सुरक्षा कारणों के चलते ग्रामीणों ने यहां परिवार के साथ रातें बिताना बंद कर दिया। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरे में जहां सुरक्षा कर्मियों की संख्या 1600 से अधिक रहती है, वहीं इस बार रेणुकाजी मेले में मात्र 315 के करीब सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक रशीद मोहम्मद शेख के अनुसार मेले के लिए इस बार जहां अन्य डिपो से चार बसें मंगवाई गई हैं, वहीं 15 स्थानीय बसों के रूट भी डायवर्ट किए गए हैं। मेले में प्लॉट आबंटन तथा अन्य साधनों से विकास बोर्ड को हर साल एक करोड़ के करीब आमदनी होने के बावजूद यहां आने वाले श्रद्धालुओं अथवा मेलार्थियों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिलती जिसके चलते मेलार्थियों में निराशा का माहौल देखा जा रहा है। बहरहाल मेला बाजार में आए व्यापारी कम खरीददारी के चलते मायूस हैं।