Sunday, September 22, 2019 07:11 AM

मेहनत और लग्न के कारण आईएएस को बनाया मंजिल

विवेक भाटिया,  उपायुक्त चंबा

प्रोफाइल

नाम- विवेक भाटिया

जन्म तिथि- 29-10-1985

आईएएस  बैच - वर्ष 2011

पिता का नाम- उधम सिंह भाटिया

माता का नाम- विमला भाटिया

पत्नी का नाम- डा. शिखा शर्मा

जन्म स्थान- गांव भूंपल, नादौन, जिला हमीरपुर, हि. प्र.

शैक्षणिक योग्यता-  इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियर

प्रशासनिक अनुभव- डीसी लाहुल-स्पीति, डीसी बिलासपुर, निदेशक परिवहन, फूड एंड सप्लाई, लैंड रिकार्ड, एसडीएम निचार, एसी कम बीडीओ शिलाई। सरकारी सेवा से पूर्व भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में सेवाएं दे चुके हैं।

चंबा जिला के माथे से पिछडे़पन के दाग को मिटाकर मूलभूत सुविधाओं में सुधार को लेकर उपायुक्त चंबा विवेक भाटिया कार्यभार संभालते ही एक्शन मोड में आ गए हैं। विवेक भाटिया का कहना है कि चंबा जिला में स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी सुविधाओं को और बेहतर बनाने को लेकर कारगर कदम उठाए जाएंगे। विवेक भाटिया का कहना है कि चंबा जिला को केंद्र सरकार द्वारा एस्पिरेशनल जिला घोषित किए जाने के बाद सुविधाओं मंे सुधार और लोगों के जीवन स्तर को और बेहतर बनाने, क्रियान्वित होने वाली योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे हरेक पात्र को योजनाओं का लाभ मिलना सुनिश्चित हो सके। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के नादौन उपमंडल के चरोटी गांव में 29 अक्तूबर, 1985  को जन्मे विवेक भाटिया वर्ष 2011 बैच के प्रशासनिक अधिकारी हैं। विवेक भाटिया के पिता उधम सिंह भाटिया बिजली बोर्ड से एडिशनल एसई के पद से रिटायर्ड हुए हैं, जबकि माता विमला भाटिया गृृहिणी हैं।

विवेक भाटिया की बहन प्रियंका भाटिया एसजेवीएनएल में कार्यरत हैं। विवेक भाटिया की पत्नी डा. शिखा शर्मा विशेषज्ञ चिकित्सक के तौर पर मेडिकल कालेज चंबा में सेवाएं दे रही हैं। विवेक भाटिया को प्रशासनिक सेवा का लंबा अनुभव रहा है। विवेक भाटिया आईएएस अधिकारी चयनित होने के बाद एसी कम बीडीओ शिलाई, एसडीएम निचार एट भावानगर, सेटलमेंट अधिकारी धर्मशाला, लाहुल-स्पीति व बिलासपुर में बतौर डीसी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। विवेक भाटिया निदेशक लैंड रिकार्ड, निदेशक फूड एंड सप्लाई व निदेशक परिवहन का दायित्व भी निभा चुके हैं। हाल ही में प्रदेश सरकार ने विवेक भाटिया को डीसी बिलासपुर से तबदील कर डीसी चंबा की जिम्मेदारी सौंपी है। विवेक भाटिया ने बतौर डीसी चंबा का कार्यभार संभालने के बाद अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का सफल आयोजन कर अपनी प्रशासनिक कुशलता का लोहा मनवाया है। विवेक भाटिया ने पहली बार मिंजर मेले को ‘नया चंबा’ थीम से आयोजित करने के अलावा स्वच्छता पर विशेष ध्यान देकर लोगों का दिल जीत लिया। मिंजर मेले की सांस्कृतिक संध्याओं को भी कम खर्च में बेहतर बनाने का साहस दिखाया। पहली मर्तबा मिंजर मेले के दौरान गंदगी का नामोनिशान नहीं दिखा। श्री भाटिया की लोगों से सीधे संवाद की कार्यप्रणाली को भी चंबा जिला के लोग खासा पसंद कर रहे हैं। विवेक भाटिया की प्रशासनिक कुशलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि जो वह कहते हैं करके दिखाते हैं।

मुलाकात :अनुशासन के साथ अपने जीवन का ध्येय साधें...

प्रशासनिक अधिकारी बनने का क्या मतलब होता है?

आज के दौर में लाखों अभ्यर्थी प्रतिवर्ष अपने जीवन की सुख- सुविधाओं का त्याग करके अपने जीवन में जनसेवा को साध्य बनाकर कुछ न कुछ करने की चेष्टा करते हैं। कुछ लोग यूपीएससी व एचपीएएस परीक्षा देकर इस लक्ष्य को पूरा करते हैं।

आपने अपनी स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

मेरी स्कूली शिक्षा हिमाचल प्रदेश के अलग- अलग स्थानों जैसे परवाणू, रामपुर, हमीरपुर, डलहौजी व ऊना इत्यादि स्थानों पर हुई। दसवीं कक्षा डीपीएस डलहौजी, बारहवीं डीएवी हमीरपुर तथा स्नातक डिग्री इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन में एनआईटी हमीरपुर 2007 में पूर्ण की।

खुद पर कितना विश्वास है और यह ताकत कहां से आती है। अध्ययन के दौरान खास उपलब्धि क्या रही?

आत्मविश्वास किसी भी कार्य को अंजाम तक पहंुचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। परंतु मनुष्य चलायमान है। आत्मविश्वास का स्रोत, परिवार के संस्कार, हृदय की पवित्रता, कार्यों में पारदर्शिता व सोच में अडिगता व हृदय में संवेदना से उत्पन्न होता है। जैसा मैंने कहा कि सही डगर पर चलना उल्ट वेग में तलवार की धार में चलने के समान है। पढ़ाई में मुख्यतः दसवीं के साइंस में स्टेट टापर रहा। पढ़ाई ठीक पटरी पर चलती रही। इसके अलावा स्पोर्ट्स, फोटोग्राफी, ट्रेवलिंग व राइटिंग  का शौक रहा।

कितने प्रयास के बाद आईएएस के लिए चुने गए। और इसके पीछे की प्रेरणा?

प्रथम प्रयास में इंडिया आडिट एंड अकाउंट्स सर्विस अलाट हुई। छह माह के प्रशिक्षण की अवधि के बीच ही आईएएस के लिए चयन हुआ। आईएएस एक ऐसी सेवा है, जिसमें विभिन्न आयामों में रहकर हम राष्ट्र सेवा के यज्ञ में अपनी आहुति अर्पित कर सकते हैं।

यह कब और कैसे सोचा कि आपको आईएएस आफिसर ही बनना है?

एनआईटी से मेरा चयन भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड गाजियाबाद में हुआ। वहां पहंुचकर लगा कि प्रोफेसर बना जाए, लेकिन गेट की परीक्षा में अंक कुछ कम रहे। अगली परीक्षा तक एक वर्ष था। समय का ऐसा चक्र घूमा-सोचा कि एक बार आईएएस की परीक्षा दी जाए। और प्रथम प्रयास में ही तीनों चरण क्लीयर हो गए।

आपने सिविल सेवा परीक्षा के दौरान कौन से विषय चुने और इसके पीछे कारण?

सिविल सेवा की परीक्षा में पहला विषय दर्शन शास्त्र रहा, क्योंकि मेरी इसमें रुचि थी। दूसरा विषय लोक प्रशासन रहा, क्योंकि वह इस सेवा में तर्कसंगत था।

सामान्यतः यहां तक पहंुचने के लिए आपकी दिनचर्या क्या रही?

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए अनुशासन और विविधता दोनों की दिनचर्या चाहिए। अनुशासन का मतलब है किसी भी परिवेश में किसी भी परिस्थिति में हर रोज चरणबद्ध तरीके से अपने ज्ञान की वृद्धि परीक्षा अनुसार करते रहना चाहिए। और विविधता का मतलब अगर आप दिन -रात पढ़ाई करते रहेंगे, तब भी आपका मस्तिष्क कुछ समय बाद चीजों को ग्रहण करना बंद कर देगा। इन दोनों चीजों का समावेश होना चाहिए।

वैसे तैयारी में किताबों के अलावा और किस-किस सामग्री का सहारा मिला?

आईएएस की जो तैयारी है उसमें आजकल यू ट्यूब पर बहुत टयूटोरियल हैं। अपने समय में मैंने कई अच्छी मैगजीन पढ़ी। इसके अलावा कई क्लासरूम नोट्स दिल्ली के मुखर्जी नगर व राजेंद्र नगर से मिलते थे विभिन्न स्रोत से कोई, आनलाइन पढे़। न्यूजपेपर एडीटोरियल भी तैयारियों का एक हिस्सा रहे। बस यह जो हमारा ज्ञान है वह बहुयामी होना चाहिए।

आजकल कोचिंग क्लासेज का प्रचलन बढ़ रहा है। क्या सफलता पाने के लिए कोचिंग क्लास जरूरी है या हम खुद भी सफलता पा सकते हैं?

अगर किसी के पास धन है तो कोचिंग ली जा सकती है। कोचिंग क्लास में टीचर और स्टूडेंट के साथ वार्तालाप से यह फायदा होता है कि हम वहां अपनी गलतियां सुधार सकते हैं। और अगर हम सोचें कि सिर्फ  और सिर्फ  कोचिंग की बदौलत यूपीएससी क्लीयर हो सकता है, तो वह गलत है। सबसे खास बात यह है कि आपका खुद का अनुशासन, खुद का हार्ड वर्क होना चाहिए। इसमें आपको सुपर इंटेलिजेंट होेने की जरूरत नहीं है। जो हार्ड वर्किंग लोग हैं उनकी प्रतिशतता एग्जाम क्लीयर करने की बहुत अधिक है।

किसी भी परीक्षा के लिए आज कोचिंग/ट्यूशन का फैशन बढ़ रहा है, क्या ये सब जरूरी है?

किसी भी परीक्षा के लिए कोचिंग/टयूशन का फैशन बढ़ रहा है। जैसा कि मैंने कहा कि कोचिंग/टयूशन सिर्फ  एक फैशन न लेकर अगर अपने स्किल्ज को और अच्छा करना है तो उसके लिए यह सहायक सिद्ध हो सकता है।

आपकी कार्यशैली आम अधिकारी की तरह ही है या कि कुछ हटके है?

मेरी कार्यशैली का पता उनको है जो मेरे साथ काम कर चुके हैं या जिनका मेरे साथ वास्ता पड़ा है। मैं अपनी कार्यशैली के बारे में खुद कैसे बता सकता हंू।

जो युवा आईएएस अफसर बनने का सपना देख रहे हैं, उनको आप क्या सुझाव और सलाह देना चाहेंगे?

मंै उन युवाओं को यही सुझाव देना चाहंूगा कि आप अपने लेबल पर जो अच्छा कर सकते हैं वे करें। बुरी आदतों से बचें, अनुशासन के साथ अपने जीवन का ध्येय साधंे और तैयारी करें। अगर आप सफल हो जाएं तो आपको बहुत- बहुत बधाई। अगर न भी हों तो यूपीएससी की तैयारी करने से सोच का दायरा बढ़ता है। इसलिए यूपीएससी की तैयारी बहुत अच्छी बात है। अगर किसी का यूपीएससी एग्जाम क्लीयर न भी हो तो हताश न हों ओर कोशिश करते रहें। फल की चिंता नहीं करनी चाहिए और अपनी और से बेस्ट एफर्ट्स पर ध्यान देना चाहिए।                            - दीपक शर्मा, चंबा