Saturday, July 04, 2020 11:25 AM

मैं मजदूर हूं और मैं अभी बहुत मजबूर हूं…

चांदपुर-बिलासपुर लेखक संघ के प्रधान डा. रोशन लाल शर्मा व महासचिव सुरेंद्र मिन्हास की देखरेख  में ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन प्रतिदिन किया जा रहा है। इसमें जिलाभर के सभी लेखक बढ़ चढ़कर भाग ले रहे हैं। संघ के कार्यकारी महासचिव रविंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि जब से लॉकडाउन चल रहा है, तब से लेकर अभी लगभग 25 ऑनलाइन काव्य गोष्ठियां आयोजित की जा चुकी हैं। जिला संघ लॉकडाउन के दौरान लिखी गई इन कविताओं को एक किताब का रूप देने का प्रयास करेगा। उन्होंने बताया कि रविवार को कवि गोष्ठी का विषय  मजदूर था। सभी कवियों ने मजदूर पर बहुत ही सुंदर रचनाएं लिखीं। रविंद्र कुमार शर्मा ने मैं एक मजदूर हूं और मैं अभी बहुत मजबूर हूं, मेरी सरकार भी नहीं सुन रही और पुलिस वाले भी तंग कर रहे हैं..., कर्नल जसवंत सिंह चंदेल ने मैं मजदूर की मजबूरी जानता हूं और मजबूर को देवता मानता हूं, क्योंकि मैं मजदूर का बेटा हूं..., भीम सिंह नेगी ने जिस मजदूर के फौलादी इरादों के आगे कुछ भी असंभव नहीं है, वह मजदूर इस देश में लाचार क्यों है..., रविंद्र पढ़ लिख कर भी मजदूरी करना उनकी मजबूरी बन गया है, सूखी रोटी खाकर गुजारा करता है..., चंद्रशेखर पंत ने आजादी का सपना देखते-देखते मजदूरों का जीवन बंधक बन गया है, उनकी मेहनत से ही यह धरती जन्नत बनी है..., संतोष कुमारी ने मजदूरों के अपने मकान कच्चे हैं, लेकिन उनके इरादे बहुत पक्के हैं..., जसवंत सिंह चंदेल ने मैं मजदूरी करके अपना पेट पालता हूं, मैं घर जाने से भी लाचार हो गया हूं..., डा. रविंद्र ठाकुर विकास का कार्य करने वाले जिस व्यक्ति के श्रम से पसीने की खुशबू आती है। डा. हेमा ठाकुर ने दूसरों के हर सुख का रचयिता स्वयं दुख में रहता है..., हेमराज शर्मा ने हम तो मजदूर हैं और हर गम से दूर है..., सुरेंद्र मिन्हास ने मैंने बड़े-बड़े लोगों के भवन बनाए, लोगों के लिए कई किस्म की वस्तुएं तैयार की, परंतु हमें दूध में से मक्खी की तरह निकाल दिया गया..., रविंद्र चंदेल कमल ने मजदूरी मेरा धर्म और कर्म  है और मजदूर के नाम से ही मेरी पहचान है..., विजय कुमारी सहगल ने सड़कें, पुल, आलीशान भवन व होटल मैं ही बनता हूं, लेकिन बनने के बाद मुझे इनका प्रयोग करने की इजाजत नहीं है... व सुशील पुंडीर ने कुछ लोग मजदूर का मज़ाक उड़ाते हैं, लेकिन खुद को मजदूर कहते हैं। मजदूर हमारे राष्ट्र का सम्मान है और मेहनत का परिचायक है।