Wednesday, September 18, 2019 05:22 PM

मोदी का वैश्विक वर्चस्व

प्रो. एनके सिंह

अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार

सम्मान की जिस दृष्टि के साथ विश्व आज हमें देख रहा है, वह सम्मान चंद्रयान जैसी परियोजना के कारण और बढ़ गया है। जब मैंने यूएन सर्विस की यात्रा की अथवा एयर इंडिया के बोर्ड में जब मैं डायरेक्टर था तो उस समय अन्य देश भारत अथवा भारतीयों की ओर इतना ध्यान नहीं देते थे। किंतु जब अटल बिहारी वाजपेयी ने पोखरण में परमाणु परीक्षण की इजाजत दी तो पहली बार विश्व का ध्यान भारत की ओर गया और वे कहने लगे, ‘ओह, आप भारतीय  अब परमाणु शक्ति से संपन्न हैं।’ अब जब मैं भारतीय के रूप में विदेश जाता हूं तो वे मेरा यह कहकर अभिवादन करते हैं, ‘वाह, मोदी के देश के नागरिक।’ विश्व उसकी ओर ध्यान देता है जिसके पास शक्ति होती है तथा उसे सम्मान देता है जो इसके परिक्षेत्र में बदलाव लाने में सक्षम हो...

 जो व्यक्ति परिवर्तनशील विश्व परिदृश्य का अध्ययन करता है, वह भारत की विश्व दृष्टि में नरेंद्र मोदी की ओर से लाए गए सुधारात्मक बदलावों से स्तब्ध हो जाता है। यह दोनों रास्तों के जरिए है, कि हम विश्व को कैसे देखते हैं तथा विश्व हमें कैसे देखता है। मीडिया में वह फोटो धड़ल्ले से आ रहे हैं जिसमें मोदी और  डोनाल्ड ट्रंप एक-दूसरे के हाथ में हाथ रखकर खूब मजाक कर रहे हैं। दो राष्ट्रों के मध्य संबंधों में बदलाव को कैसे देखा जाए तथा विशेषकर एक उभरते भारतीय नेता के वैश्विक नजरिए को कैसे समझा जाए। विश्व में प्रदर्शित इस मैत्री का मर्मस्पर्शी चित्रण जहां साझा है, वहीं वह उस याद को भी दिलाता है जब दस साल पहले इसी अमरीका ने मोदी को अपने देश में यात्रा करने के लिए वीजा देने से इनकार कर  दिया था।

अब वह शक्ति मोदी से मैत्री में आलिंगनबद्ध हो गई लगती है। सम्मान की जिस दृष्टि के साथ विश्व आज हमें देख रहा है, वह सम्मान चंद्रयान जैसी परियोजना के कारण और बढ़ गया है। जब मैंने यूएन सर्विस की यात्रा की अथवा एयर इंडिया के बोर्ड में जब मैं डायरेक्टर था तो उस समय अन्य देश भारत अथवा भारतीयों की ओर इतना ध्यान नहीं देते थे। किंतु जब अटल बिहारी वाजपेयी ने पोखरण में परमाणु परीक्षण की इजाजत दी तो पहली बार विश्व का ध्यान भारत की ओर गया और वे कहने लगे, ‘ओह, आप भारतीय  अब परमाणु शक्ति से संपन्न हैं।’ अब जब मैं भारतीय के रूप में विदेश जाता हूं तो वे मेरा यह कहकर अभिवादन करते हैं, ‘वाह, मोदी के देश के नागरिक।’

 विश्व उसकी ओर ध्यान देता है जिसके पास शक्ति होती है तथा उसे सम्मान देता है जो इसके परिक्षेत्र में बदलाव लाने में सक्षम हो। अमरीका, भारत की ओर पहले इतना ध्यान कभी नहीं देता था जितना अब दे रहा है। यह मोदी की सोच के कारण संभव हो पाया है, न कि उस तरह जिस तरह पाकिस्तान के विश्व से संबंधों के कारण जिसमें वह अपने हित साधने में लगा रहता है। डोनाल्ड ट्रंप एक ऐसे अमरीकी राष्ट्रपति हैं जो खुलकर आतंकवाद तथा इसे पोषित करने वाले देशों की आलोचना करते हैं। फाउंडेशन आफ नेशनल सिक्योरिटी ने भारत के नजदीक देशों की परिगणना करते हुए 86 के स्कोर पर परिगणित किया है।

इसके अनुसार 62 के स्कोर के साथ रूस सबसे निकट है, इसके बाद 58 के स्कोर के साथ अमरीका है, फिर 51 के स्कोर के साथ फ्रांस है, जबकि ब्रिटेन, जर्मनी और जापान इनके बाद आते हैं। दो घटनाक्रमों के कारण भारत तथा विश्व के संबंधों में व्यापक बदलाव आया है ः पहला है बालाकोट में एयर स्ट्राइक तथा दूसरा है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए संकल्प का कार्यान्वयन। जैसा कि विदित है कि अनुच्छेद 35 ए संविधान में बिना किसी वैधानिक समर्थन के ही आ गया था, जिससे यह गैर कानूनी बन गया। अनुच्छेद 370 को हटाने पर विरोध में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारी हो-हल्ला किया, लेकिन प्रयासों के बावजूद उन्हें विश्व में इस पर समर्थन नहीं मिल पाया। जी-7 समूह ने पाकिस्तान को दुत्कार कर बाहर कर दिया तथा यहां तक कि मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुस्लिम देशों ने भी इमरान का समर्थन नहीं किया, बल्कि उनकी निंदा करते हुए उन्हें अपना घर संभालने की सलाह दी। अब पाकिस्तान विश्व में अलग-थलग पड़ गया है जिससे चिढ़ कर वह युद्ध का उन्माद फैलाने में लगा हुआ है। वह निरंतर भारत को युद्ध की धमकियां देने में लगा हुआ है। वह तिलमिला गया है। इमरान और उनके सहयोगी मंत्री अब भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दे रहे हैं तथा विश्व को भी चेता रहे हैं कि अगर पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों का प्रयोग किया, तो उससे विश्व भी बुरी तरह प्रभावित होगा। इमरान अब निराश और भयभीत महसूस कर रहे हैं क्योंकि उनका अस्तित्व इस बात पर टिका है कि वह किसी तरह भारत पर बढ़त बनाए रखें।

उधर पाकिस्तान की सेना भी अधीर हो उठी है। ऐसी स्थिति में विश्व मोदी तथा भारत को आतंक व उसके खतरे के रास्ते में बड़ी बाधा के रूप में देख रहा है। दूसरी ओर मोदी अपने फिटनेस मिशन के जरिए दूसरों देशों के मध्य अपनी सकारात्मक छवि भी बना रहे हैं। यह मोदी तथा भारत, दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी कि अपनी सत्ता के शुरुआती दिनों में ही वह विश्व को यह बात मनाने में सफल रहे कि यूएन ने योग को अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मान लिया है तथा अब योग एक आंदोलन बनकर उभरा है। मोदी विश्व से अपने विचार मनवाने अर्थात उन्हें मान्यता दिलाने में सफल रहे हैं। उनका फिटनैस मूवमेंट अब एक बड़ा आंदोलन बन गया है।

आतंकवाद पर भारत की अब तक जो नरम नीति थी, मोदी ने उसे बदल दिया है। ऐसे भी देश हैं जिन्होंने बंधक प्रकरणों से निपटने के लिए समझौता वार्ता को कानून बनाए हैं। मोदी ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब बंधक प्रकरण में कोई समझौता नहीं करेगा। यही कारण था कि भारत ने पाकिस्तान से एयर फोर्स के अधिकारी कमांडर अभिनंदन की रिहाई के लिए समझौता वार्ता करने से इनकार कर दिया था। उसने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया कि अगर भारतीय सैन्य कमांडर अभिनंदन को कोई क्षति पहुंचाई गई तो पाकिस्तान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। इसी कारण भारतीय वायु सेना के इस अधिकारी का पाकिस्तान कुछ भी बिगाड़ नहीं पाया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मुफ्ती मुहम्मद सईद की पुत्री की रिहाई तथा काबुल बंधक प्रकरण में बंधक बनाए गए यात्रियों (हाइजैक किए गए विमान के यात्रियों) की रिहाई के बदले में भारत को आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा था। आतंकवाद के मसले से निपटने के लिए भारत की नई कड़ी नीति ने नजरिए में एक बदलाव लाया है तथा इससे दोनों देशों के संबंधों में भी परिवर्तन आया है। विश्व अब भारत की संबंधों की शक्ति तथा शांतिपूर्ण दर्शन को मान्यता देता है। यह नीति भारत के प्राचीन मूल्यों पर आधारित रही है।        

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