Wednesday, July 08, 2020 12:52 PM

मोहाली की फर्म पर मेहरबानी क्यों

40 फर्मों ने भरा था टेंडर, पर एक को ही दे दिए चार सप्लाई ऑर्डर

शिमला - वायरल ऑडियो के मामले में स्वास्थ्य निदेशालय की नौ करोड़ की खरीद सवालों के घेरे में आ गई है। दलाली और घूस के इस केस में स्वास्थ्य निदेशालय की मोहाली की एक ही फर्म पर मेहरबानी पर सवाल उठ गए हैं। विजिलेंस के हाथ लगे 20 मार्च से लेकर 30 अप्रैल तक के रिकार्ड में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। इससे पता चला है कि कोविड फंड और  आपदा प्रबंधन के पैसों से स्वास्थ्य निदेशालय ने जमकर मौज उड़ाई है। कोरोना संकट के बीच निदेशक डा. अजय गुप्ता की परचेजिंग कमेटी ने नौ करोड़ के सप्लाई ऑर्डर दिए थे। इनमें मोहाली की एक ही फर्म को पांच हजार पीपीई किट का ऑर्डर दिया गया। हालांकि इसके लिए देशभर की 40 कंपनियों ने टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। खास है कि ऑडियो में पांच लाख की दलाली भी इन्हीं पीपीई किट की डील के लिए की जा रही थी। इसके अलावा ग्लब्ज, मास्क तथा थर्मल स्कैनर के सप्लाई ऑर्डर भी परचेज कमेटी ने अपने चहेतों को दिए। बता दें कि कोरोना से निपटने के लिए राज्य सरकार ने निदेशालय तथा जिला स्तर पर खरीद की छूट दे रखी थी। विजीलेंस का कहना है कि हैल्थ डिपार्टमेंट में हुई इस दलाली के तार जिला तक जुड़े हैं। इसके चलते स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन के जांच दल ने जिला में हुई खरीद का रिकार्ड भी तलब कर लिया है। बहरहाल इस कोरोना संकट के बीच स्वास्थ्य विभाग के दामन पर लगे इस दाग के कारण सरकार की भी किरकिरी हुई है। हालांकि आरोपी निदेशक अजय कुमार गुप्ता अब भी आईजीएमसी में उपचाराधीन हैं। कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। आरोपी के स्वस्थ होने के बाद विजिलेंस अदालत से रिमांड की पेशकश करेगी। इसके उपरांत ही डा. अजय कुमार गुप्ता पांच लाख की घूस की परतें खोलेंगे।

सेनेटाइजर घोटाला भी

इससे पहले प्रदेश के सचिवालय में सेनेटाइजर घोटाले ने सरकारी तंत्र की चूल्हें हिलाकर रख दी हैं। महज 50 रुपए के सेनेटाइजर को भाजपा से जुड़े एक  तथाकथित नेता ने 150 रुपए का फर्जी ठप्पा लगाकर बेच दिया था। अब स्वास्थ्य निदेशालय का मुखिया कोरोना उपकरणों की खरीद को लेकर विजीलेंस के जाल में आ गया है।

दलाल ने क्या बताया

वायरल ऑडियो में घूस की पेशकश करने वाले दलाल ने विजिलेंस को बताया कि उसने पीपीई किट का ऑर्डर मोहाली की फर्म को दिलाने के लिए पैरवी की थी। इसकी एवज में डायरेक्टर अजय गुप्ता ने पांच लाख की रिश्वत मांगी थी। दलाल का कहना है कि सप्लाई ऑर्डर  लेने के बाद उसने रिश्वत देने से मना कर दिया। इस कारण डायरेक्टर गाली-गलौज कर  उसे ऑफिस से बाहर निकलने को कह रहा था। बार-बार तंग करने पर उसने रिकॉर्डिंग कर ली और इसे उच्चाधिकारियों को सुना दिया।