Friday, December 13, 2019 07:29 PM

मौज-मस्ती संग नशे पर होगा वार

 राजधानी के स्कूलों में खास होगा चिल्ड्रन-डे, बच्चों को नकारात्मक सोच से बचाने को छिड़ेगी मुहिम

शिमला -राजधानी शिमला में बाल दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। हजारों निजी व सरकारी स्कूलों ने बाल दिवस के मौके को खास बनाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। खास बात यह है कि इस बार बाल दिवस पर छात्रों को मौज मस्ती के साथ ही नशे के खिलाफ पाठ भी पढ़ाया जाएगा। शिमला जिला के शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को आदेश जारी कर बाल दिवस मनाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि बाल दिवस के मौके पर छात्रों को नकारात्मक सोच से बाहर निकाला जाए, वहीं सकारात्मक की ओर ले जाने के लिए उन्हें सामाजिक कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाए। शिमला के उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से जारी की गई अधिसूचना में इस मौके पर सभी शिक्षक व छात्रों को आने के निर्देश देने को प्रधानाचार्य को कहा गया है। अहम यह है कि बाल दिवस हर साल स्कूलों में मनाया जाता है, लेकिन इस बार खास यह रहेगा कि छात्रों को आपस में तालमेल बढ़ाने को लेकर जागरूक किया जाएगा। खासतौर पर नशे से छुटकारा दिलवाने के हर कक्षा के छात्रों को नशे के दुष्प्रभाव के बारे में काउंसिलिंग की जाएगी। बता दें कि बाल दिवस के मौके पर इस बार छात्र न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ही हिस्सा लेंगे, बल्कि उन्हें किचन गार्डन व खेलकूद गतिविधियां भी  करवाई जाएंगी। शिक्षा विभाग ने केंद्र सरकार की गाइडलाइन को देखते हुए सभी स्कूलों को आदेश जारी कर दिए हैं। फिलहाल शिमला के सरकारी स्कूलों से लेकर निजी स्कूलों ने बाल दिवस की तैयारी कर ली है। आज स्कूलों में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयाजित करवाए जाएंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम में पहली से जमा दो तक  के छात्र एक साथ बाल दिवस को यादगार बनाएंगे। बता दें कि शिक्षा विभाग को बाल दिवस मनाने के बाद उपशिक्षा निदेशक कार्यालय में रिपोर्ट  भेजनी होगी।

बाल दिवस क्यों मनाया जाता है

बता दें कि बाल दिवस महान नेता पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिवस पर 14 नवंबर को मनाया जाता है। पंडित नेहरू महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका जन्म 14 नवंबर, 1889 को इलाहाबाद में हुआ था । 15 अगस्त, 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ तो नेहरू जी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने। उन्होंने देश को उन्नतिशील बनाया। उन्हें बच्चों से प्रगाढ़ लगाव था। वे बच्चों में देश का भविष्य देखते थे। बच्चे भी उनसे अपार स्नेह रखते थे । अतः उनके जन्मदिवस 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।