म्यूजियम से है प्यार तो बनाएं करियर

पश्चिम में तो संग्रहालय विज्ञान काफी समय से लोकप्रिय है, लेकिन भारत में पढ़ने के एक विषय के तौर पर इसका महत्त्व बढ़ रहा है। संस्कृति और विरासत का शिक्षा से गहरा संबंध है। अवशेषों और प्राचीन सामग्रियों को सुरक्षित रखकर संग्रहालय मानव इतिहास, संस्कृति और धर्म आदि की रक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। यह अतीत को सुरक्षित रखने, शोध करने और उसके बारे में जानकारी हासिल करने में मदद करता है। आप चाहें तो संग्रहालय की फील्ड में करियर बनाकर अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर रखने में मदद कर सकते हैं। मौजूदा समय में संग्रहालय विज्ञान बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है..

पहला संग्रहालय

पुरातत्त्व विषय अवशेषों को संग्रहित करने की सबसे पहले 1796 ई.में आवश्यकता महसूस की गई जब बंगाल की एशियाटिक सोसायटी ने पुरातत्त्वीय, नृजातीय, भूवैज्ञानिक, प्राणि-विज्ञान दृष्टि से महत्त्व रखने वाले विशाल संग्रह को एक जगह पर एकत्र करने की आवश्यकता महसूस की। किंतु उनके द्वारा पहला संग्रहालय 1814 में प्रारंभ किया गया। इस एशियाटिक सोसायटी संग्रहालय के नाभिक से ही बाद में भारतीय संग्रहालय, कोलकाता का जन्म हुआ। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण में भी, इसके प्रथम महानिदेशक एलेक्जेंडर कनिंघम के समय से प्रारंभ किए गए विभिन्न खोजी अन्वेषणों के कारण विशाल मात्रा में पुरातत्त्व विषयक अवशेष एकत्रित किए गए। स्थल संग्रहालयों का सृजन सर जॉन मार्शल के आने के बाद हुआ, जिन्होंने सारनाथ 1904, आगरा 1906, अजमेर 1908, दिल्ली किला 1909, बीजापुर 1912, नालंदा 1917 तथा सांची 1919, जैसे स्थानीय संग्रहालयों की स्थापना करना प्रारंभ किया। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के एक पूर्व महानिदेशक हरग्रीव्स द्वारा स्थल-संग्रहालयों की अवधारणा की बड़ी अच्छी तरह से व्याख्या की गई है।  भारत सरकार की यह नीति रही है कि प्राचीन स्थलों से प्राप्त किए गए छोटे और लाने एवं लेजा सकने योग्य पुरावशेषों को उन खंडहरों के निकट संपर्क में रखा जाए जिससे वे संबंधित है ताकि उनके स्वाभाविक वातावरण में उनका अध्ययन किया जा सके और स्थानांतरित हो जाने के कारण उन पर से ध्यान हट नहीं जाए।  मॉर्टिन व्हीलर द्वारा 1946 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एएसआई, में एक पृथक संग्रहालय शाखा का सृजन किया गया। आजादी के बाद, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण में स्थल-संग्रहालयों के विकास में बहुत तेजी आई। वर्तमान में, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के नियंत्रणाधीन 41 स्थल संग्रहालय हैं।

भारत में भी बढ़ी डिमांड

पश्चिम में तो संग्रहालय विज्ञान काफी समय से लोकप्रिय है, लेकिन भारत में पढ़ने के एक विषय के तौर पर इसका महत्व बढ़ रहा है। राष्ट्रीय संग्रहालय के संग्राहलय विज्ञान विभाग की अध्यक्ष मान्वी सेठ ने बताया, संग्रहालय का विचार पश्चिम में पैदा हुआ। इसलिए वहां भारत की तुलना में संग्रहालय का अध्ययन ज्यादा लोकप्रिय है, लेकिन भारत में भी इसकी मांग पिछले कुछ सालों में बढ़ी है। देश के अंदर कई प्राइवेट आर्ट गैलरी आ गई हैं। सरकार भी राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण पर जोर दे रही है। संग्रहालय विज्ञान के मैदान में करियर के कई ऑप्शन हैं जैसे संग्रहालय निदेशक, क्यूरेटर, एजुकेटर, एगजिबिट डिजाइनर, आर्किविस्ट और कन्जर्वेशन स्पेशलिस्ट।

कौन कर सकता है संग्रहालय विज्ञान में कोर्स

किसी भी उपयुक्त विषय में बैचलर्स डिग्री के बाद आप संग्रहालय विज्ञान का कोर्स कर सकते हैं। वैसे एंथ्रोपॉलजी, आर्ट हिस्ट्री, बोटनी, केमिस्ट्री, कम्प्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, जिऑलजी, हिस्ट्री, फिजिक्स, विजुअल आर्ट, जूलोजी या मेकैनिकल, ईसीई, सीएसई आदि में बीई बीटेक के बाद म्यूजियॉलजी का कोर्स करें तो ज्यादा बेहतर है।

कोर्स कराने वाले संस्थान

कुछ यूनिवर्सिटियों में पीजी लेवल पर मुख्य रूप से म्यूजियॉलजी का कोर्स आफर किया जाता है। उन यूनिवर्सिटियों में...

* एमएस यूनिवर्सिटी आफ बड़ौदा,

* बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी  , वाराणसी

* यूनिवर्सिटी ऑफ  कोलकात्ता,

* नैशनल म्यूजियम इंस्टिच्यूट, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी,

* रबिंद्र भारती यूनिवर्सिटी , कोलकाता

दिल्ली इंस्टिच्यूट ऑफ  हेरिटेज रिसर्च ऐंड मैनेजमेंट शामिल हैं। इसके अलावा कुछ यूनिवर्सिटियों में सेंटर्स आफ म्यूजियॉलजी हैं जैसे जम्मू यूनिवर्सिटी सीबीसीएस के हत म्यूजियॉलजी का ऑप्शनल पेपर, राजस्थान यूनिवर्सिटी, असम यूनिवर्सिटी सिल्चर कैंपस आदि।

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