Tuesday, March 31, 2020 07:04 PM

यहां बीमार होने पर लगता है हेलिकाप्टर का किराया

लाहुल के क्षेत्रीय अस्पताल में एक भी विशेषज्ञ तैनात नहीं, सरकार के दावों की खुली पोल

केलांग - प्रदेश का एक जिला ऐसा है, जहां बीमार होने पर हेलिकाप्टर का किराया खर्च करना पड़ता है। या यूं कहें कि सर्दियों में यहां बीमार होना किसी अभिशाप से कम नहीं है। हम बात कर हरे हैं जनजातीय जिला लाहुल की। यहां दम तोड़ती स्वास्थ्य सुविधाओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला के सबसे बडे़ क्षेत्रीय अस्पताल में आज तक विशेषज्ञों के पदों को भरा नहीं गया है। अस्पताल में ही विशेषज्ञों के न होने से लोगों को मजबूरन हेलिकाप्टर का किराया खर्च  कर जिला से बाहर जाना पड़ता है। यहां उपचार के लिए मरीज को करीब 200 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। प्रदेश सरकार के जनजातीय जिलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की पोल खोलता लाहुल प्रदेश का एक मात्र ऐसा जिला हैं, जहां के जिला के सबसे बड़े क्षेत्रीय अस्पताल में ही एक भी विशेषज्ञ की तैनाती आज तक नहीं हो पाई है। हालांकि सरकार ने यहां सात विशेषज्ञों के पद सृजित कर रखें हैं, लेकिन आज तक इन पदों को भरा नहीं गया है। जनजातीय जिला में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के सरकार के दावे महज कागजों में ही दिखाई देते हैं, जबकि लाहुल में हालात कुछ और ही वयां कर रहे हैं। यहां क्षेत्रीय अस्पताल के अलावा सीएचसी शांशा की स्थिती भी काफी खराब है। यहां विभिन्न पदों के करीब 16 पद लंबे समय से खाली है, वहीं छह माह से सीएचसी में लैब टेक्नीशियन तक नहीं है। उक्त सीएचसी पर जहां घाटी के आठ गांवों के लोगों की सेहत की जिम्मेदारी है, वहीं सर्दियों में न तो यहां के लोग उपचार के लिए केलांग जा सकते हैं और न ही उदयपुर। ऐसे में जनजातीय जिला के लोगों का कहना है कि सर्दियों में यहां बीमार होना किसी अभिशाप से कम नहीं है। प्रदेश सरकार ने जहां जनजातीय जिला के लिए हेलिकाप्टर सेवा शुरू कर रखी है, वहीं मरीजों के लिए हेलिकाप्टर के किराए में विशेष रियात भी दी है। हेलिकाप्टर में मरीज को 700 रुपए एक तरफ का किराया अदा करना पड़ता है, वहीं अन्य यात्री को 1500 रुपए प्रति यात्रा किराया निधारित किया गया है। लिहाजा लाहुल में विशेषज्ञों की कमी के चलते लोगों को उपचार के लिए जिला से बाहर का रूख करना पड़ता है। सर्दियों में यहां बीमार होने पर लोगों को इस बात की चिंता सताती है कि मरीज को जिला से बाहर समय पर पहुंचाएंगे कैसे। लाहुल को न कांग्रेस और न ही भाजपा सरकार विशेषज्ञ दिला पाई है। राजनीतिक दलों के प्रत्याशी जहां विभिन्न मंचों से जनजातीय जिला में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे करते हैं, वहीं जमीनी हकिकत कुछ और ही दास्तां वयां करती है। केलांग के क्षेत्रीय अस्पताल में विशेषज्ञों की तैनाती न होने से लोगों को जिला से बाहर उपचार करवाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। बहरहाल यहां सर्दियों में बीमार होना लोगों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। उधर, डा. पलजोर बोद्ध सीएमओ केलांग ने कहा कि अस्पताल में सात विशेषज्ञों के पद खाली हैं। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।