Saturday, January 25, 2020 11:20 PM

यह फन कुचलना होगा

-डा. विनोद गुलियानी, बैजनाथ

जिंदगी के आखिरी मोड़ पर बैठी पल-पल गिनती एक निःसहाय 81 वर्ष की वृद्ध अबला अंध विश्वास की बलि चढ़ते-चढ़ते कैसे बची सब जानते हैं। रौंगटे खड़ी करने वाली इस घटना के पीछे अनभिज्ञता के आवरण के साथ-साथ सामाजिक जागृति की शून्यता व प्रशासनिक लापरवाही साफ झलकती है। इस सबके चलते असामाजिक व स्वार्थी तत्त्व इसकी आड़ में अपना उल्लू सीधा भी करते हैं। खसरा कांख लिम्फाडेनोपैथी व पीलिया में झाड़ फूंक का सहारा लेना तथा मिर्गी जैसे रोगों के निवारण के लिए जूता सुंघाना अवांछित के साथ-साथ हास्यास्पद भी है। अतः आज के वैज्ञानिक युग में इनसे बाहर निकल पाना मानवता के लिए कल्याणकारी होगा।