Friday, September 20, 2019 12:35 AM

यह स्वतंत्रता दिवस संपूर्ण है

यह स्वतंत्रता दिवस ही अलग है। इस 15 अगस्त और उसके आसपास जश्न-ए-आजादी भी अलग होगा। हमारे मुकुट-मणि जम्मू-कश्मीर का सौंदर्य और लंबी जकड़नों से आजादी भी अलग होगी। इस बार श्रीनगर के लालचौक और हजरतबल के पास जब तिरंगा लहराएगा ,तो उसके मायने ही अलग होंगे। इस बार ‘जन्नत’ के चप्पे-चप्पे पर, घरों-दुकानों-दफ्तरों पर, असंख्य हाथों में तिरंगा शोभित होगा, तो वह स्वतंत्रता भी अलग होगी। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में युवा चेहरे गाएंगे, नृत्य करेंगे, अपने खास लिबास भी पहनेंगे और किसी की आतंकी, पाकपरस्त घुड़की या धमकी नहीं होगी, तो उस 15 अगस्त की व्यंजना ही अलग होगी। इस बार हमें हमारा अलग-थलग जम्मू-कश्मीर हासिल हुआ है, समावेशी हिस्सा बना है, सही मायनों में ‘भारतीय’ बना है, तो उस प्रसन्नता का एहसास भी अलग होगा। सिर्फ  एक क्षेत्र ही संपूर्ण भारत का स्वतंत्रता दिवस नहीं है, लेकिन वह हमारी ‘दूसरी आजादी’ का प्रतीक है, तो व्याख्याओं का फोकस भी अलग लगता है। हमारे लोकतंत्र का मंदिर संसद भवन 800 से अधिक लाइटों की रोशनियों में नहाया हुआ है, जरा उस जगमगाहट के एहसास को तो जीकर देखिए। बेशक 15 अगस्त एक तारीख है, एक दिन है, मुक्ति-पर्व का मौका है, लेकिन कल्पना करें कि यह राष्ट्र कितना विराट है! कितने छोटे-छोटे, विविध देश इसके भीतर समाए हैं! कितनी बोलियां और भाषाएं हैं! कितने पर्व, मान्यताएं और आस्थाएं हैं, लेकिन कश्मीर से कन्याकुमारी तक इस राष्ट्र का एक ही नाम है-भारत। एक ही संविधान और संसद है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी एक-एक हैं और राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ भी एक है। लिहाजा यह स्वतंत्रता दिवस अलग है और संपूर्ण भी है। इस संपूर्णता पर हमारा ‘सहोदर पड़ोसी’ पाकिस्तान बौखलाहट में है, युद्ध की बातें कर रहा है, नियंत्रण-रेखा पर लड़ाकू विमान, तोपें,अस्त्र-शस्त्र तैनात कर रहा है और हमारे ही कश्मीरी भू-भाग पर आजादी का झंडा फहराया है। उनके वजीर-ए-आजम इमरान खान ने भारत के खिलाफ जहर उगला है। भारत की कश्मीरियत पर अमरीका, चीन, रूस, ब्रिटेन से लेकर सऊदी अरब और बांग्लादेश तक तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी पाकिस्तान को ठेंगा दिखाया है। भारत का विरोध करने या मध्यस्थता करने से साफ      इंकार कर दिया है। पाकिस्तान अकेला और लुटा-पिटा है, लेकिन 14 अगस्त को उसने अपनी आजादी हमारी कब्जाई जमीन पर मनाई है, लिहाजा जिस दिन वह कश्मीर भी भारत की परिधि में होगा, उस बार का स्वतंत्रता दिवस अति संपूर्ण, सार्थक, सुरक्षित, स्वर्णिम होगा। यह भारत का ऐतिहासिक स्वतंत्रता दिवस है, लिहाजा कुछ काली ताकतें हमारा पीछा करती हैं, हमलों की साजिशें रचती हैं, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से जम्मू तक 30 मीटर लंबी और 3 मीटर गहरी सुरंग बनाती हैं, ताकि आतंकी राक्षसों को भेजा जा सके और भारत को अस्थिर किया जा सके। यह हमारी काबिल खुफिया इकाइयों की ‘लीड’ है, जो 15 अगस्त तक सटीक साबित हुई है। आतंकी हमारे ऐतिहासिक लाल किले को ही निशाना बनाना चाहते थे, लेकिन उसी प्राचीर से प्रधानमंत्री  मोदी देश को संबोधित करेंगे। बेशक आजादी के दिन भी हमारे सुरक्षा बलों ने पूरी पहरेदारी की, कई सड़कें और बाजार सुनसान कर दिए गए, लालकिले और संसद के आसपास के सभी  दफ्तर, संस्थान, दुकानें दिन में भी 12 बजे तक बंद करा दिए गए, लिहाजा आजादी के दिन भीतर से यह हूक उठती है कि जिस दिन देश इस आतंकवाद से मुक्त होगा, उस दिन का स्वतंत्रता दिवस कितना सजीव होगा! यह स्वतंत्रता दिवस इसलिए भी अलग है, क्योंकि ‘तीन तलाक’ को संसद ने आपराधिक पारित कर दिया है। आज़ादी के 72 सालों में ऐसा बिल पारित होकर कानून बना है। अब हलाला पर भी कड़ा कानून बनेगा। अब भारत में वह दिन भी दूर नहीं, जब समान नागरिक संहिता लागू होगी। कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद यह पहला स्वतंत्रता दिवस है। जरा पूछिए आम कश्मीरियों से कि जड़ता की जंजीरों से मुक्त होकर आज आजादी कैसी लग रही है। अब आजादी का सफरनामा काफी लंबा हो गया है, लिहाजा अब सामाजिक विसंगतियां, आर्थिक विकृतियां और असमानताएं दूर होनी चाहिए और राजनीतिक तौर पर हमें और परिपक्व होना चाहिए। अभी सही मायनों में आजादी, लोकतंत्र और विकास कुछ अधूरे हैं। वे भी ऐसे नहीं रहेंगे, तो स्वतंत्रता कितनी संपूर्ण होगी, जरा आज तो सोच कर देखिए।