Wednesday, July 17, 2019 07:49 AM

रंग-बिरंगी पोशाक में दिखेंगे नौनिहाल

सरकारी स्कूलों में प्री-नर्सरी छात्रों के लिए नहीं ड्रेस कोड, शिक्षा विभाग ने वर्दी देने का प्रोपोजल किया रद्द

 शिमला —हिमाचल के  3391 सरकारी स्कूलों में बिना ड्रेस कोड के प्री-नर्सरी के छात्र स्कूलों में पढ़ाई करेंगे। प्री-नर्सरी के छात्रों को अब सरकार व शिक्षा विभाग द्वारा वर्दी नहीं दी जाएगी। शिक्षा विभाग ने प्री-नर्सरी के छात्रों को ड्रेस कोड को लेकर तैयार किए गए प्रोपोजल को रद्द कर दिया है। वहीं यह भी साफ कर दिया है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों को फ्री वर्दी की सुविधा छह साल के बाद ही दी जाएगी। अहम यह है कि अब सरकारी स्कूलों में प्री-नर्सरी में नौनिहालों की संख्या बारह हजार से भी ज्यादा हो गई है। ऐसे में अभिभावकों द्वारा उम्मीद जताई जा रही थी कि जिस तरह से प्री-नर्सरी के छात्रों को हर सुविधा स्कूलों में दी जा रही है, उसी तरह स्कूल से फ्री वर्दी की सुविधा भी दी जाएगी, लेकिन शिक्षा विभाग के इस फैसले से अभिभावकों को बड़ा झटका लगा है। अब प्री-नर्सरी के छात्र बिना ड्रेस कोड के स्कूल आएंगे, जबकि स्कूल में पढ़ने के लिए आने वाले छात्रों को जैसी वर्दी होनी चाहिए थी। शिक्षा विभाग का कहना है कि प्री-नर्सरी के छात्र अपनी इच्छा से स्कूल में कपड़े पहन कर आ सकते हैं। हैरानी इस बात की है कि  शिक्षा विभाग ने एमएचआरडी को बिना सौंपे ही वर्दी देने के मामले को बंद कर दिया। हांलाकि शिक्षा विभाग ने एक तर्क यह भी दिया है कि आरटीई एक्ट में तीन से पांच साल तक के बच्चों को फ्री वर्दी नहीं दी जा सकती है। वहीं छात्रों को स्कूलों में वर्दी पहनने के लिए भी बाध्य नहीं किया जा सकता है, जबकि निजी स्कूलों में प्री नर्सरी से ही छात्रों को एक जैसा ड्रेस कोड होता है। बता दें कि स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए भी एक ही ड्रेस कोड होने के पक्ष में शिक्षक वर्ग और अभिभभावक भी हैं। प्री-नर्सरी के छात्रों को स्मार्ट सुविधाओं के चक्कर में विभाग का एक्स्ट्रा बजट खर्च होने की वजह से फ्री वर्दी के मामले को शिक्षा विभाग ने बंद कर दिया है। बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग एमएचआरडी से बजट को लेकर अब और बोझ नहीं डालना चाहते हैं। यही वजह है कि प्री-नर्सरी के छात्रों को कोई भी सिलेक्टिव ड्रेस नहीं होगी। फिलहाल प्री-नर्सरी के छात्रों को कोई भी ड्रेस कोड नहीं होगा, इससे अभिभावकों को झटका तो लगा है। सूत्रों की मानें, तो समग्र शिक्षा अभियान के तहत एक बार राज्य सरकार से विभाग इस बारे में बता कर सकता है।

प्रदेश के 3391 स्कूलों में प्री-नर्सरी

प्रदेश के 3391 सरकारी स्कूलों में प्री नर्सरी की कक्षाएं शुरू कर निजी स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं देने का दावा किया गया था। भारत सरकार ने प्रदेश के प्री नर्सरी स्कूलों में नौनिहालों को पढ़ाने के तरीकों में बदलाव कर खेल-खेल में पढ़ाने के निर्देश शिक्षकों को दिए थे। इस दौरान एमएचआरडी ने समग्र शिक्षा अभियान ने प्री नर्सरी स्कूलों में छात्रों के लिए रंग-बिरंगी किताबें, खिलोने सहित विभिन्न रंगों के बैंच और टेबल के लिए भी अलग से बजट मुहैया करवाया है।