रघुनाथ मंदिर

जम्मू-कश्मीर मां श्रीवैष्णो दरबार के लिए तो विश्वविख्यात है ही, वहीं जम्मू शहर में तवी नदी का पुल पार करते ही रघुनाथ बाजार में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राजपरिवार द्वारा निर्मित रघुनाथ मंदिर की आभा, सुंदरता, भव्यता देखते ही बनती है। मंदिर में स्थापित 33 करोड़ देवी-देवताओं के दर्शन आस्थावान हिंदू भक्तों को नतमस्तक होने के साथ-साथ आध्यात्मिकता की भावना से ओत-प्रोत करने के लिए पर्याप्त है। जम्मू-कश्मीर राजघराने का परंपरागत रूप से जम्मू-कश्मीर एवं हिमाचल में धर्म स्थलों के नव निर्माण तथा रखरखाव में विशेष योगदान रहता आया है। मनुष्यों में भक्ति भावना, आपसी भाईचारे एवं सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार तथा भगवान के विभिन्न अवतारों, स्वरूपों और शक्तियों से लोगों को परिचित करवाने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर के पूर्व महाराजाधिराज स्वर्गीय श्री रणवीर सिंह ने विक्रमी संवत 1912 अर्थात आज से लगभग 164 वर्ष पूर्व रघुनाथ मंदिर और अन्य धार्मिक प्रतिष्ठानों का निर्माण करवाया था। जम्मू को मंदिरों का शहर भी कहा जाता है। रघुनाथ मंदिर की आधारशिला महाराज गुलाब सिंह के कर कमलों द्वारा वसंत पंचमी के दिन रखी गई थी और धर्मार्थ ट्रस्ट के सोल न्यासी कर्ण सिंह की देखरेख में राजपरिवार द्वारा इस मंदिर का सुप्रबंध किया जा रहा है। मंदिर में स्थापित सभी देव प्रतिमाएं जयपुर से बनवा कर लाई गई हैं और विक्रमी संवत 1915 में वैशाख शुक्ल पंचमी के दिन जम्मू तथा काशी के विद्वानों द्वारा इनकी प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। प्रतिष्ठा कार्यक्रम इतना भव्य था कि यह लगभग 2 महीने तक चला था और इसमें महाराजा रणवीर सिंह सहित लाखों धर्मपरायण लोगों ने भाग लिया था। भगवान श्री राम जी का मंदिर मध्य में है। भगवान श्री राम जी के दक्षिण की ओर लक्ष्मण जी और बाएं ओर श्री सीता माता जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। परिसर में प्रदक्षिणा क्रम में 14 देवताओं के मंदिर हैं। हिंदू धर्म में वर्णित 33 करोड़ देवताओं के सूक्ष्म स्वरूप सहित लगभग सभी प्रमुख देवी-देवताओं और ऋषियों की मूर्तियां मंदिर में स्थापित की गई हैं। मंदिर में प्रवेश द्वार के आगे दो सुंदर वाटिकाएं दर्शनीय हैं। मंदिर परिसर में महादेव जी की वृहदकाय अतिसुंदर लिंग प्रतिमा है, जिन्हें महानर्वदेश्वर कहा जाता है भी दर्शनीय है। मंदिर परिसर में स्थापित लगभग सभी मंदिरों में योग्य पुजारी आस्थावान भक्तों और श्रद्धालुओं को देवताओं की जानकारी देकर विधिवत पूजापाठ करवाते हैं। कई श्रद्धालु प्रसाद भी बांटते हैं। यहां श्री राम नवमी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी और विजयदशमी त्योहार धूमधाम से आयोजित किए जाते हैं। यहां समय-समय पर विद्वानों के उपदेश, सत्संग और भजन कीर्तन कार्यक्रम होते रहते हैं। यहां विशेष धार्मिक अवसरों पर शोभायात्रा निकालकर विभिन्न उत्सवों को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट के एकमात्र सोल ट्रस्टी महाराज डाक्टर कर्ण सिंह की देखरेख में धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा 102 मंदिरों की देखरेख की जा रही है। मंदिर के पृष्ठ भाग में श्री रणवीर संस्कृत अनुसंधान संस्थान में हस्तलिखित ग्रंथ रखे गए हैं, जहां देश-विदेश से शोधार्थी रिसर्च हेतु आते हैं। दाएं भाग में रघुनाथ पाठशाला में विद्यार्थी निशुल्क शिक्षा ग्रहण करते हैं। मंदिर के साथ ही एक सराय भी है, जहां रात्रि विश्राम किया जा सकता है। लेखक एचआरडी मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली द्वरा स्थापित श्री रणवीर केंद्रीय संस्कृत विद्यापीठ जम्मू से 1980 से 1985 की अवधि में शास्त्री एवं शिक्षा शास्त्री उपाधि धारक हैं। सुरक्षा प्रबंधों के चलते मंदिर के भीतर कैमरा, मोबाइल और बैग इत्यादि ले जाना प्रतिबंधित है। जिन्हें 20 रुपए के शुल्क पर मंदिर के बाहर लॉकर्स में रखा जाता है। श्री रघुनाथ मंदिर में हिंदू धर्म के सभी देवताओं, अवतारों और 33 करोड़ देवताओं के दर्शन कर मन को असीम संतोष और देवकृपा का आभास होता है। 

- अनुज कुमार आचार्य, बैजनाथ

Related Stories: