Wednesday, July 17, 2019 07:57 AM

रजिस्ट्रेशन-लाइसेंस से कमाए 58.40 लाख

मंडी—लोगों के खान पान की सेहत परखने वाला फूड सेफ्टी एंड रेगुलेशन विभाग सरकार के लिए कमाऊ पूत साबित हो रहा है। कमाऊ पूत इसलिए कि मात्र एक अधिकारी के सहारे ही साल में 50 लाख से ज्यादा का राजस्व जुटाया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि इन अधिकारी के पास भी इंस्पेक्शन के लिए न तो गाड़ी है और न ही अन्य स्टाफ। जिला में फूड सेफ्टी एंड रेगुलेशन विभाग ने एक साल में ही 58.40 लाख रुपए का राजस्व जुटाया है। गौर करने वाली बात यह है कि यह राजस्व केवल मात्र रिजस्ट्रेशन और लाइसेंस से ही कमाया गया है, क्योंकि विभाग में एक मात्र अधिकारी के अलावा कोई है ही नहीं। विभाग फूड बिजनेस आपरेटर से पैसा कमा कर खूब चांदी तो कूट रहा है, लेकिन असल में जनता के लिए विभाग कुछ कर ही नहीं रहा है। इंस्पेक्शन के अलावा फूड क्वालिटी मेंटेन रखने के लिए धरातल पर कुछ खास असर नहीं दिख रहा है। मंडी जिला की करीब दस लाख से ज्यादा की आबादी (2011 के आंकड़े) मात्र एक असिस्टेंट कमिश्नर के सहारे छोड़ दी गई है। ऐसे में इतने बड़े जिला में न तो इंस्पेक्शन हो पाती हैं और न ही लगातार फूड क्वालिटी पर चैक रखा जाता है। फूड सेफ्टी अफसर न होने की वजह से खाद्य पदार्थों के सैंपल भी नहीं उठाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में मंडी जिला से फूड सेफ्टी विभाग को लाइसेंस से 49 लाख 67 हजार 100 रुपए प्राप्त हुए, जबकि रजिस्ट्रेशन से आठ लाख 73 हजार 250 रुपए प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़े एफएलआरएस से लिए गए हैं। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हर साल लाखों रुपए का राजस्व देने वाले विभाग की हालत क्या है। फिलहाल विभाग में एकमात्र असिस्टेंट कमिश्नर ही हैं। इसके अलावा इंस्पेक्शन के लिए अधिकारी के पास गाड़ी तक नहीं है। खाद्य नियमों को जांचने के लिए की गई इंस्पेक्शन में साल भर में 16 हजार रुपए जुर्माना ही वसूला गया है।

शिवरात्रि में चला था गुड फूड, गुड मूड

इतने बड़े जिला के लिए एकमात्र अधिकारी होने के बावजूद इस मर्तबा शिवरात्रि में गुड फूड गुड मूड कैंपेन भी शुरू किया गया था। हालांकि विभाग में मात्र एक ही अफसर होने से इस कैंपेन की निगरानी भी पूरी तरह से नहीं हो सकी। यह तो साफ है कि विभाग में करने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन स्टाफ ही नहीं है।