राज्य स्तरीय वामन द्वादशी मेला

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर की तहसील पच्छाद के मुख्यालय सराहां में एक मंदिर है, जहां भगवान विष्णु के राम व कृष्ण रूप के साथ वामन अवतार की भी पूजा की जाती है। प्रतिवर्ष भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को उनके जन्म दिवस के सुअवसर पर यहां राज्य स्तरीय मेले का आयोजन किया जाता है। भगवान वामन की पूजा-अर्चना करने के उपरांत, उनकी पालकी को स्थानीय देवता शिरगुल के साथ, शोभा यात्रा निकालते हुए यहां के शिरगुल ताल में नौका विहार करवाया जाता है। वैसे तो आधिकारिक रूप से यह मेला दो दिवसीय होता है, लेकिन मेला इलाके में लोकप्रिय होने के चलते पांच-छह दिन तक चलता है, जिसमें स्थानीय निवासियों के अलावा साथ लगते जिलों व प्रदेशों से भी लोग और दुकानदार शिरकत करते हैं। सृष्टि में धर्म की स्थापना तथा अत्याचारियों व आततायियों का नाश करने के उद्देश्य से भगवान विष्णु समय-समय पर अवतार लेते रहे हैं। इन्हीं में से भगवान विष्णु के पांचवें अवतार को वामन अवतार कहा जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार दैत्य सेनापति बलि ने देवताओं को पराजित करके स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। उसने इसी खुशी में अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। देवताओं ने पराजय से दुखी होकर भगवान विष्णु की शरण ली। भगवान विष्णु उनकी सहायता करने का आश्वासन देते हैं। भगवान विष्णु ने देवताओं को वामन रूप में माता अदिति के गर्भ से उत्पन्न होने का वचन भी दिया। दैत्यराज बलि द्वारा देवों के पराभव के बाद कश्यप जी के कहने से माता अदिति पयोव्रत का अनुष्ठान करती हैं, जो पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है। तब भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन अदिति के गर्भ से विष्णु भगवान ने वामन के रूप में अवतार लिया। वामन अवतार लेकर विष्णु भगवान ब्राह्मण वेश धर कर राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने पहुंचते हैं। वामन रूप में श्री विष्णु भिक्षा में तीन पग भूमि मांगते हैं, राजा बलि अपने वचन पर अडिग रहते हुए श्री विष्णु को तीन पग भूमि दान में दे देते हैं। वामन रूप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया और अभी तीसरा पैर रखना शेष था। ऐसे में राजा बलि अपना वचन निभाते हुए अपना सिर भगवान के आगे रख देते हैं और वामन भगवान के पैर रखते ही राजा बलि पाताल लोक पहुंच जाते हैं। बलि के द्वारा वचन का पालन करने पर भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और बलि को पाताल लोक का स्वामी बना देते हैं। इस तरह भगवान वामन देवताओं की सहायता कर उन्हें पुनः स्वर्ग का अधिकार प्रदान करते हैं। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी सराहां का राज्य स्तरीय वामन द्वादशी मेला 10, 11 व 12 सितंबर को बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। 10 सितंबर को प्रातः काल से वामन भगवान के मंदिर में पूजा अर्चना के साथ हवन का भी आयोजन किया जाएगा, उसके उपरांत वामन भगवान की शोभा यात्रा मंदिर से खंड विकास अधिकारी के कार्यालय होते हुए नए बसस्टैंड तक निकाली जाएगी। इस अवसर पर स्थानीय महिला मंडल की भजन कीर्तन मंडली भी शोभा यात्रा के साथ भजन कीर्तन करेगी तथा सराहां के ऐतिहासिक शिरगुल ताल में भगवान वामन व शोभायात्रा में उपस्थित देवी-देवताओं को नोका विहार करवाया जाएगा। उसके उपरांत तालाब के किनारे आतिशबाजी होगी तथा दिन में वॉलीबाल व कबड्डी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। वहीं दूसरे दिन प्रातः 11 बजे से विशाल दंगल का आयोजन किया जाएगा। मेले के तीसरे दिन जहां रस्साकशी इत्यादि कई खेल प्रतियोगिताएं होंगी व महिला पहलवान भी महिलाओं के दंगल में अपना दम दिखाएंगी। मेले के तीनों दिन रात्रि 10 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

— संजय राजन, सराहां