Wednesday, April 24, 2019 05:22 AM

रातोंरात सीमेंट 30 रुपए महंगा

पाकिस्तान से आयात बंद, मांग बढ़ने पर कंपनियों ने बढ़ा दिए दाम

 सोलन -एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान से सीमेंट आयात बंद होने का लाभ अब हिमाचल प्रदेश में स्थापित अधिकांश सीमेंट निर्माता कंपनियों ने उठाना शुरू कर दिया है। हिमाचल में सीमेंट के दामों में रातों-रात 25 से 30 रुपए प्रति बैग की बढ़ोतरी हो गई है। ये दाम लगभग सभी कंपनियों ने बढ़ा दिए हैं तथा अन्य राज्यों की सीमा से सटे इलाकों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है। हालांकि इस बढ़ोतरी को दबे स्वरों से लोकसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा रहा है, किंतु पाकिस्तान से सीमेंट की आपूर्ति बंद होने व प्रदेश में सीमेंट की मांग बढ़ जाने का फायदा सीमेंट निर्माता कंपनियों ने बेतहाशा दाम वृद्धि करके उठा लिया है। आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान से भारत को सीमेंट का आयात वर्ष 2007-08 से शुरू हुआ था। वर्ष 2006 तक अफगानिस्तान ही पाकिस्तान से सबसे अधिक सीमेंट आयात करने वाला देश था। वर्ष 2007-08 में भारत ने पाकिस्तान से सात लाख 86 हजार 672 टन सीमेंट के आयात से डील शुरू कर थी तथा वर्ष 2016-17 तक यह आंकड़ा 1.253 मिलियन टन तक पहुंच गया। फरवरी 2019 में भारत पर हुए पुलवामा अटैक व भारत द्वारा पाकिस्तान पर की गई एयर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई। भारत ने पाकिस्तान से आने वाले सीमेंट पर 200 प्रतिशत आयात शुल्क की बढ़ोतरी कर दी। पाकिस्तान से आयात होने वाला 70 प्रतिशत सीमेंट बाघा बोर्डर व शेष शिपिंग के द्वारा मुंबई बंदरगाह से होकर आता था। पाकिस्तान से आने वाला सीमेंट यहां पर बिकने वाले सीमेंट से 10 प्रतिशत सस्ता भी होता था। देश में स्थापित सीमेंट कंपनियों में से कई नामी कंपनियों ने इसका लाभ उठाने की एक गुप्त रणनीति बनाई तथा बढ़ती मांग को देखते हुए सीमेंट के दामों में बढ़ोतरी कर दी। हिमाचल में भी अंबुजा, अल्ट्राटेक व कई अन्य कंपनियों ने लोकसभा चुनावों व ढीली सरकारी पकड़ को खूब भुनाया तथा 25 से 30 रुपए की वृद्धि मैदानी इलाकों में बिकने वाले सीमेंट पर कर दी है। प्रदेश में अब सीमेंट प्रति बैग 325 व 330 से बढ़कर 360 रुपए तक पहुंच गया है। प्रदेश में औसतन सीमेंट का प्रतिवर्ष उत्पादन 11.50 मिलियन टन तक का होता है। प्रमुख पहलू यह है कि इस अहम् मुद्दे पर किसी भी सीमेंट कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है तथा आम उपभोक्ता पसोपेश में है कि इस घड़ी में कौन सी सरकारी मशीनरी तक अपनी आवाज पहुंचाए।