Sunday, November 17, 2019 03:54 PM

राफेल हुआ ‘भारतीय’

कितना ऐतिहासिक संयोग था! विजयादशमी का पर्व, हमारी आक्रामक वायुसेना का 87वां स्थापना दिवस, फ्रांस में राफेल विमान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शस्त्र-पूजा, विमान पर रौली से ‘ऊं’ लिखकर और कलावा बांधकर आस्था की अभिव्यक्ति और आकाश मार्ग में ग्रह, नक्षत्र, योग की वही स्थिति, जो त्रेता युग में राम-रावण युद्ध और फिर लंकेश के वध के समय थी। चूंकि यह प्रभु राम की विजय-गाथा का दौर है, तो रामभक्त बजरंगबली को कैसे भूला जा सकता है? कई विशेषज्ञों ने राफेल की तुलना संजीवनी बूटी लाने वाले हनुमान से की है। हमारी वायुसेना ही ‘हनुमानस्वरूपा’ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राफेल की पूजा करते हुए उस पर नारियल और फूल रखे। विमान के दोनों पहियों के नीचे नींबू रखे गए, ताकि नकारात्मक ताकतों को कुचला जा सके। पहली बार रक्षा मंत्री को विदेशी जमीं पर भारतीय संस्कृति और संस्कारों को जीते हुए देखा गया। बहरहाल इन ऐतिहासिक लम्हों में फ्रांस का राफेल ‘भारतीय’ हो गया। भारत-फ्रांस सरकारों ने करीब 59,000 करोड़ रुपए का जो सौदा किया था, उसमें 36 राफेल भारतीय संस्करण के साथ आएंगे। अभी प्रतीकात्मक तौर पर विमान भारत के सुपुर्द किया गया है, लेकिन हमारी जमीन पर उतरने में अब भी 2-3 महीने और लगेंगे। मई 2020 में चार विमानों का बेड़ा हमें मिलेगा और फिर 4-4 विमान मिलते रहेंगे। सितंबर 2022 तक सभी 36 राफेल विमान भारत आ चुके होंगे और हमारी वायुसेना का हिस्सा बनेंगे। बेशक राफेल अभूतपूर्व लड़ाकू विमान है, जिसका तोड़ फिलहाल चीन के पास भी नहीं है और पाकिस्तान तो सपना भी नहीं ले सकता। राफेल के बाद भारतीय वायुसेना एशिया और दक्षिण एशिया महाद्वीप में एक ‘सुपरपावर’ के तौर पर स्थापित होगी। रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भारत किसी देश पर हमला करने की मंशा से अपनी वायुशक्ति का विस्तार नहीं कर रहा है। यह हमारी वायुसेना को सशक्त बनाने और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। राफेल ऐसा विमान है, जो पलक झपकते ही 60,000 फुट की ऊंचाई तक उड़ सकता है। पलक झपकते ही उसकी दोनों मिसाइलें-स्काल्प और मिटियोर दुश्मन को ‘मिट्टी’ कर सकती हैं। ये मिसाइलें ‘ब्रह्मास्त्र’ की प्रतिरूप हैं। पलक झपकते ही 3700 किलोमीटर की मारक क्षमता पैदा हो जाएगी। यह विमान पलक झपकते ही दुश्मन के रडार को जाम कर सकता है, रडार को चकमा देकर ‘अदृश्य’ हो सकता है, कहीं भी छिपे दुश्मन की टोह लेकर उसे मार सकता है। यह विमान 75 फीसदी हमेशा आपरेशन के लिए तैयार रहता है। यह विमान परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और परमाणु हमला भी कर सकता है। अपने देश की सीमा में रहते हुए ही दुश्मन पर वार करके ध्वस्त कर सकता है। राफेल पलक झपकते ही मात्र छह मिनट में अंबाला से लाहौर पहुंच सकता है और दिल्ली से बीजिंग पहुंचने में उसे सिर्फ  एक घंटा ही लगेगा। कह सकते हैं कि राफेल हवा में उड़ता ‘यमदूत’ ही है। यह हमारी वायु प्रतिरक्षा की बुनियादी जरूरत थी। अब 2025 तक वायुसेना के पास 3000 से ज्यादा विमान हो जाएंगे, जिनमें 770 लड़ाकू विमान होंगे। कोशिशें स्वदेशी स्तर पर की जाती रहेंगी कि हम ‘मेक इन इंडिया’ के तहत राफेल सरीखे विमान बनाएं। राफेल बनाने वाली कंपनी भी उस सूची में है, जिनसे भारत सरकार करार करने की सोच रही है। ऐसे 100 से अधिक लड़ाकू विमान भारत में ही बनने हैं। क्या हम इस दिन की कल्पना कर सकते थे? क्या हम एक दिन ‘आकाश के सिकंदर’ भी बनेंगे? लेकिन दुर्भाग्य और विडंबना है कि राफेल पर खूब राजनीति खेली गई। पूरे लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चीखते रहे-‘चौकीदार चोर है।’ हालांकि यह करार दोनों देशों की सरकारों के बीच हुआ था। सर्वोच्च न्यायालय ने मुहर लगा दी थी। कैग ने भी भ्रष्टाचार की दलील को नामंजूर किया था। उसके बावजूद कांग्रेस ने राजनीति खेली। शायद अब सबक सीखना चाहिए, क्योंकि राफेल घर आने को हैं। यह हमारी रक्षा तैयारियों में एक पीढ़ीगत बदलाव का दौर है। राफेल से हमारी सरहदें और भी सुरक्षित होंगी, लिहाजा अब यह एक राष्ट्रीय सरोकार है। उसे उसी भावना से ग्रहण करना चाहिए।