Sunday, January 26, 2020 09:35 PM

राम मंदिर पर न हो राजनीति

-राजेश कुमार चौहान, जालंधर

आजकल एक बार फिर से अयोध्या का मसला सुर्खियों में है। सबसे पहले तो यह कहना उचित होगा कि जब तक अयोध्या मसले पर ओछी राजनीति होती रहेगी और मुसलमान समाज के धर्म गुरु या अन्य लोग अपनी झूठी शान के लिए अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का विरोध करते रहेंगे, तब तक अयोध्या विवाद का मसला कभी हल नहीं होने वाला है। भारत बेशक एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिस कारण यहां हर धर्म के लोगों को हर तरह की आजादी अपने-अपने धार्मिक स्थानों के निर्माण करने की आजादी है, लेकिन अयोध्या विवाद काफी संवेदनशील है, इस पर सरकारों और आमजन को सहनशीलता और समझदारी दिखानी चाहिए।  राम से बड़ा राम का नाम है, राम का नाम कहीं भी लिया जा सकता है, श्रीराम मंदिर पर अब तक जितनी घटिया राजनीति हो चुकी है, उस कारण अब तो वहां मंदिर बन जाने के बावजूद भी राम शायद ही आएं। श्रीराम जन्म भूमि पर मंदिर बनाने पर तो वैसे किसी को हर्ज तो नहीं होना चाहिए, लेकिन इसके साथ यह बात भी ख्याल रखनी चाहिए कि अगर इस पर विवाद होने की आशंका ज्यादा हो तो इसका फैसला लेने का अधिकार न्यायालय पर छोड़ देना चाहिए। श्री राम जन्मभूमि अयोध्या का मुद्दा काफी संवेदनशील है, इसलिए इस पर ओछी राजनीति नहीं होनी चाहिएए बल्कि कानून को इस पर अपना काम करने देना चाहिए।