Monday, April 06, 2020 06:10 PM

राष्ट्रीय आपदा के मायने

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने कोरोना वायरस को ‘राष्ट्रीय आपदा’ अधिसूचित कर दिया है। यह राज्य सरकारों पर भी लागू होगा। अब कोरोना से मरने वालों के परिजन को 4 लाख रुपए की मदद सरकार देगी। राज्य भी इस आपदा कोष का इस्तेमाल कर सकेंगे। ‘आपदा’ पुराना शब्द है। जब कुदरती प्रकोप के कारण बाढ़, भूकंप, तूफान, सुनामी, हिमस्खलन, ओलावृष्टि और आगजनी के रूप में आपदाएं कहर बरपाती हैं अथवा इनसानी और दुर्घटना के कारण आपदा की स्थिति आती है, तो सरकार ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करती ही है। उसके तहत विभिन्न व्यवस्थाएं करने, उपकरण और दवाएं खरीदने, नागरिकों को विशेष रियायतें मुहैया कराने आदि को लेकर सरकारें निर्बाध और यथाशीघ्र निर्णय कर सकती हैं। मौजूदा दौर में कोरोना वायरस से बढ़कर आपदा और क्या हो सकती है! दुनिया में इस वायरस से 5600 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। अमरीका और स्पेन की सरकारों ने ‘आपातकाल’ घोषित किए हैं। कोरोना के जानलेवा प्रभाव का केंद्र अब यूरोप है। स्पेन में एक ही दिन में 1500 संक्रमित मामले सामने आए हैं। स्पेन के प्रधानमंत्री की पत्नी भी संक्रमित बताई जा रही है। इटली में मौत का आंकड़ा 1400 को पार कर चुका है। भारत के हालात अमरीका और स्पेन, इटली (यूरोप) से बेहतर हैं। बीती 15 फरवरी को भारत में  सिर्फ  3 संक्रमित बीमार थे और एक महीने के बाद संख्या अब 108 मरीजों तक पहुंच गई है। इस दौरान 2 मरीजों की मौत हो गई और 10 लोग ठीक होकर घर लौट चुके हैं। फिर भी आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता, क्योंकि विशेषज्ञ डाक्टरों का मानना है कि भारत में कोरोना दूसरे चरण में पहुंच चुका है। यदि यहीं नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह तीसरे चरण में भी पहुंच सकता है। सरकारों के पास सिर्फ  30 दिन का वक्त है। शायद ऐसे ही खतरे और संकट को आंकते हुए केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस को ‘राष्ट्रीय आपदा’ अधिसूचित किया है। बेहतर यह है कि भारत में कोरोना का फैलाव सामुदायिक नहीं है। यह विदेशों से भारत में आने वालों के संपर्क के कारण फैल रहा है, लेकिन अगला चरण सामुदायिक विस्तार का हो सकता है। अब तो खतरा यहां तक फैल चुका है कि देश के 15 राज्यों में लॉक डाउन के हालात हैं। एक चिकित्सक का विश्लेषण है कि यदि कोरोना की यह महामारी ज्यादा फैलती है, तो हालात बदतर होंगे और मौत के आंकड़ों पर नियंत्रण करना बड़ा मुश्किल होगा। कारण, भारत में अब भी स्वास्थ्य के संसाधनों का आधारभूत ढांचा मजबूत और व्यापक नहीं है। देश में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की स्थिति भी खराब है। अलगाव केंद्रों और प्रमुख अस्पतालों में भी इस वायरस की जांच की व्यवस्था नहीं है। दवाओं और उपकरणों  को लेकर भी हम चीन के भरोसे हैं। चीन में सामान्य हालात होने में अभी कुछ वक्त लगेगा। चीन, इटली और स्पेन में कोरोना का फैलाव और प्रभाव छठे चरण तक पहुंच चुका है। बहरहाल कोरोना पर भारत सरकार और देश के नागरिक अपने ही स्तर पर सख्ती बरत रहे हैं। जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार ने मास्क और सेनिटाइजर को ‘अनिवार्य वस्तु’ घोषित कर दिया है। खेल के लगभग सभी आयोजन अगली तारीख तक स्थगित कर दिए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात का दो दिवसीय दौरा रद्द कर दिया है। संसद के परिसर में आमजन के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि संसद में बजट पारित करने के बाद सत्र को समय से पहले ही स्थगित किया जा सकता है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कारों के समारोह भी फिलहाल टाल दिए गए हैं। नई तारीखों की घोषणा अभी होनी है। बहरहाल कोरोना पर खौफ  का जो माहौल बन गया है, उसके मद्देनजर ‘आपदा’ के मायने समझे जा सकते हैं।