राहुल गांधी का राफेल

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री

वरिष्ठ स्तंभकार

कुछ लोग राफेल जहाज खरीदने की प्रक्रिया का मामला उच्चतम न्यायालय में भी ले गए। उनका कहना था कि उच्चतम न्यायालय अपनी निगरानी में इस पूरी प्रक्रिया की जांच करवाए। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में सरकार को क्लीन चिट दे दी और कहा कि प्रक्रिया में ऐसा कुछ नहीं है जिसके लिए जांच की जरूरत हो। टुकड़े-टुकड़े गैंग ने इस निर्णय की व्याख्या यह कर दी कि उच्चतम न्यायालय ने यह मान लिया है कि इस खरीद के मामले में गड़बड़ हुई है। गैंग ने यह व्याख्या राहुल गांधी को समझा दी। राहुल गांधी को चाहिए था कि इस संवेदनशील निर्णय को स्वयं पढ़ते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया...

उच्चतम न्यायालय के एक ही दिन में आए दो निर्णयों की चर्चा करना जरूरी है। पिछले साल हुए लोक सभा चुनावों में कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी के सुपुत्र राहुल गांधी ने एक जुमला दिया था कि राफेल लड़ाकू जहाज जो फ्रांस सरकार से खरीदे जाने थे, के मामले में हेराफेरी हुई है। इसमें जहाज सप्लाई करने वाली कंपनी से रिश्वत ली गई है। इसको आधार बना कर राहुल गांधी अपनी हर जनसभा में नारा लगाते थे कि चौकीदार चोर है। कुछ लोग ऐसा भी मानते हैं कि यह नारा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के टुकड़े-टुकड़े गैंग ने राहुल गांधी को तैयार करके दिया था। दरअसल राहुल गांधी को मुद्दों के मामले में यह टुकड़े -टुकड़े गैंग ही मार्ग दर्शन दे रहा था। कुछ लोग राफेल जहाज खरीदने की प्रक्रिया का मामला उच्चतम न्यायालय में भी ले गए। उनका कहना था कि उच्चतम न्यायालय अपनी निगरानी में इस पूरी प्रक्रिया की जांच करवाए।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में सरकार को क्लीन चिट दे दी और कहा कि प्रक्रिया में ऐसा कुछ नहीं है जिसके लिए जांच की जरूरत हो।  टुकड़े-टुकड़े गैंग ने इस निर्णय की व्याख्या यह कर दी कि उच्चतम न्यायालय ने यह मान लिया है कि इस खरीद के मामले में गड़बड़ हुई है। गैंग ने यह व्याख्या राहुल गांधी को समझा दी। राहुल गांधी को चाहिए था कि इस संवेदनशील निर्णय को स्वयं पढ़ते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। या तो समय की कमी रही होगी या फिर वैधानिक शब्दावली को समझने की दिक्कत रही होगी। उन्होंने चौकीदार चोर है का नारा उछाल दिया। और साथ ही यह भी जोड़ दिया कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी यही कहा है, लेकिन इसके साथ ही शायद राहुल गांधी की परोक्ष रूप से सहायता करने के लिए तथाकथित सिविल सोसायटी की त्रिमूर्ति अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण ने उच्चतम न्यायालय में गुहार लगा दी कि न्यायालय अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करे।

चुनावों में फिर इस मुद्दे पर संशय पैदा करने की कोशिश की गई, लेकिन राहुल गांधी ने चौकीदार चोर है , को न्यायालय ने भी मान लिया है, इस बात को लेकर न्यायालय की अवमानना का केस उच्चतम न्यायालय में दायर कर दिया। जो बात उच्चतम न्यायालय ने कही ही नहीं थी, राहुल गांधी वह झूठ न्यायालय का नाम लेकर फैला रहे थे। अब न्यायालय दो मामलों में विचार कर रहा था। क्या सचमुच राफेल खरीद मामले में उच्चतम न्यायालय को अपने पहले निर्णय पर पुनर्विचार की जरूरत है। क्या त्रिमूर्ति के पास कोई नई सामग्री थी जिसके आधार पर वे पुनर्विचार की मांग कर रहे थे। या यह सिर्फ राजनीतिक लिहाज से देश के लोगों के मन में सरकार के बारे में जानबूझ कर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही थी? राहुल गांधी मामले में लोगों की रुचि केवल यह जान लेने की थी कि न्यायालय की आड़ में झूठ फैलाने के लिए राहुल गांधी को क्या सजा मिलती है। यह केवल झूठ फैलाने की बात नहीं थी बल्कि न्यायालय के अपमान का मामला भी था।

दो दिन पहले इन दोनों मामलों में उच्चतम न्यायालय का निर्णण आ गया। जहां तक राहुल गांधी द्वारा झूठ फैलाने का मामला था, राहुल ने स्वयं ही समय से पहले ही बिना शर्त के शपथ पत्र दे दिया कि उसे मुआफ कर दिया जाए। न्यायालय ने मुआफी तो दे दी, लेकिन उसके साथ उसे चेतावनी भी दी की आप महत्त्वपूर्ण राजनीतिक हसीयत हो, इसलिए बोलने से पहले सोच भी लेना जरूरी है। अब राहुल गांधी आगे से कितना सोचते हैं, यह तो वही जानते होंगे, या फिर गंभीर विषयों पर उनके लिए ऐसा करना कितना संभव है, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन न्यायालय यदि इस मामले में विचार करते समय बड़ी या छोटी हैसियत को आधार न बनाता तो और भी अच्छा रहता क्योंकि लोकतंत्र में कम से कम न्यायालय के सामने तो हर नागरिक की हैसियत बराबर ही मानी जानी चाहिए।

जहां तक राफेल खरीद प्रक्रिया को लेकर दिए गए न्यायालय के पहले फैसले पर पुनर्विचार करने का मामला था, न्यायालय ने उसकी कोई जरूरत महसूस नहीं की। वह अपने पहले निर्णय पर कायम रहा, लेकिन शायद राहुल गांधी भी और त्रिमूर्ति भी इससे कुछ सीखने को तैयार नहीं हैं।

राहुल गांधी थाईलैंड व कंबोडिया के अज्ञात स्थानों पर साधना करने के बाद फिर संयुक्त संसदीय समिति से जांच करवाना चाहते हैं। वैसे विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा है कि परोक्ष रूप से राहुल गांधी ने इस अभियान के राफेल की विरोधी कंपनी को लाभ मिल रहा है। तो इस आरोप की भी जांच करवा लेनी चाहिए ।

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