Tuesday, August 20, 2019 11:32 AM

रिकांगपिओ में खुलेगा आयुष रिसर्च सेंटर

केंद्र सरकार ने दी स्वीकृति; क्षेत्र की जड़ी-बूटियों पर होगा काम, औषधीय पौधों पर आधारित होगा शोध

शिमला -जिला किन्नौर के रिकांगपिओ में आयुष रिसर्च सेंटर खुलेगा। प्रदेश सरकार ने पहले ही रिकांगपिओ के समीप शारबों में चिलगोजा अनुसंधान केंद्र खोला है, जिसमें केवल चिलगोजा पर ही काम होता है। अब किन्नौर व लाहुल-स्पीति जिलों में पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों के लिए भी एक रिसर्च सेंटर खोलने की तैयारी हो चुकी है। इसमें कई प्रकार की जड़ी-बूटियों पर काम होगा। शीघ्र ही केंद्र सरकार का आयुष मंत्रालय किन्नौर के रिकांगपिओ में एक और रिसर्च सेंटर खोलने जा रहा है। इस में पहाड़ी क्षेत्र में उगने वाली जड़ी-बूटियों के बारे में अनुसंधान का काम किया जाएगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक लाहुल-स्पीति और किन्नौर में अभी तक पंजीकृत 78 स्थानीय बैद्य काम कर रहे है और इन सभी के पास स्थानीय जड़ी-बूटियों से ही इलाज अभी भी होता है। अब केंद्रीय आयुष मंत्रालय दोनों जिलों में पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों पर काम शुरू होगा। प्रदेश के कृषि मंत्री रामलाल मार्कंडेय ने गत सप्ताह अपने दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय आयुष मंत्रालय में जा कर बात की और क्षेत्र मंे पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों पर काम करने का अनुरोध किया है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने इस क्षेत्र में एक रिसर्च सेंटर खोलने की स्वीकृति दे दी है। जिला किन्नौर और लाहुल-स्पीति दोनों जिलों में पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों पर काम करने के लिए वैज्ञानिक दौर पर काम करवाया जाएगा। इसके साथ ही लाहौल-स्पिति और किन्नौर की जड़ी-बूटियों को देश-विदेश में भेजा जाएगा। उल्लखेनीय है कि इन दोनों जिलों करोड़ों की ऐसी जड़ी-बूटियां लुप्त होने लगी हैं। अब केंद्रीय आयुष मंत्रालय इन लुप्त होने वाली जुटी-बूटियों की पैदावार बढाने में भी काम करेगा।