Tuesday, September 25, 2018 12:57 PM

रिश्ते मेरी जिदंगी का खालीपन नहीं भर सकते

बॉलीवुड की क्वीन कंगना रनौत के सितारे इस समय बुलंदी पर हैं। कई बेहतरीन फिल्में दे चुकीं कंगना की फिल्म ‘मणिकर्णिका’ ‘क्वीन ऑफ झांसी’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है। जल्दी ही उनकी फिल्म ‘मेंटल है क्या’ भी आएगी। हमसे उन्होंने नई फिल्मों, परिवार और फिल्ममेकर्स के बारे में खुलकर बात की...

कबड्डी के साथ पंगा लेने की हिम्मत आप में ही है?

हंसते हुए, जरूर।  मैं इसे बचपन से खेल रही हूं। बस कभी कोई प्लैटफॉर्म नहीं मिला इसके लिए। आज जब मैं कोई मैच देखती हूं, तो उसमें जोश दिखाने से नहीं चूकती ,लेकिन यह कहानी सिर्फ खेल के बारे में नहीं है। अश्विनी डायरेक्टर अश्विनी अय्यर और नितेश सर उनके लेखक पति ने इस कहानी में परिवार और बच्चे दिखाए हैं, रिश्ते हैं और वैल्यूज हैं। रेलवे की नौकरी के आसपास की कहानी है, जो फिल्म को मजेदार बनाती है। यह एक ऐसी दुनिया है, जिससे मैं अब तक अनजान थी। साथ ही यह कहानी है, हर उस महिला की जो सपने देखती है।

आपका परिवार आपके कितना साथ रहता है?

मेरा परिवार बहुत इमोशनल है हमेशा मेरा साथ देता है। कई बार थोड़ा कंट्रोल करने की कोशिश भी होती है। मैं उन पर ही निर्भर थी जब तक कि मैंने एक्ट्रेस बनने का सपना देखना नहीं शुरू किया। बड़ी हुई तो आजाद होने की मेरी चाहत मुझे उनसे दूर मुंबई ले आई, लेकिन फिल्में, बिजी सोशल लाइफ  और बहुत सारे रिश्ते मेरी जिंदगी का खालीपन नहीं भर सकते थे और जब प्रोफेशनल जिंदगी में उतार आया तो मेरी बहन रंगोली ने इस गैप को खत्म कर दिया।

आपको घर में शादी के लिए नहीं बोला जाता?

हां, मां तो हमेशा कहती हैं, खासकर जबसे मैं 31 साल की हुई, लेकिन परिवार को पता है कि मुझे ऐसा लाइफ  पार्टनर चाहिए, जो बिलकुल मेरे जैसा हो और इसलिए मुझे कोई ज्यादा बाध्य नहीं किया जाता। हालांकि मेरे रिश्ते रहे हैं, लेकिन स्त्री और पुरुष रिश्तों से अलग-अलग चीजें चाहते हैं। पुरुष अपनी पुरानी धारणा के मुताबिक चलते हैं, लेकिन स्त्रियां नहीं। वे शारीरिक खुशी से ज्यादा चाहत रखते हैं और इसी लिए चिपकू कहे जाते हैं। फिलहाल मैं सिंगल हूं और किसी रिश्ते में बंधना भी नहीं चाहती।

‘मेंटल है क्या’ फिल्म की शूटिंग करते वक्त कैसा लगा?

मैं ऐसी फिल्म करना चाहती थी जिसमें ऐसी सिचुएशन हो जो दो पक्षों को दिखाती हो। एक फिल्म जो दो वर्जन दिखाती है और दोनों सही होते हैं। कर्णिका ढिल्लो एक नई लेखिका हैं, उनके विचार अलग हैं और बहुत शानदार स्क्रिप्ट लिखी है। डायरेक्टर प्रकाश कोवेलामुडी का अपना टैलंट है, जो आपको अलग ही दुनिया में ले जाता है।

‘काइट्स’ के 8 साल बाद और ‘गैंगस्टर’ के 12 साल बाद अनुराग बसु और आप साथ आए हैं?

अनुराग के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि जब मैं पहली बार कैमरा फेस कर रही थी, तो वह मुझे बार-बार कहते थे, कंगना एक्टिंग क्यों कर रही हो। मैं चौंक जाती कि क्या कह रहे हैं यही तो मेरा काम है, लेकिन अब मुझे यह बात समझ आ गई है। अनुराग ने मुझे सिखाया कि असली एक्टिंग क्या होती है। उनके साथ मेरा शानदार कोरियोग्राफ  रहा है। हम लंबे समय के बाद साथ आए हैं, मैं एक एक्ट्रेस के तौर पर बड़ी हो गई, लेकिन उनके सामने अब भी बच्ची ही हूं जिसके पास सीखने को बहुत  कुछ है।