Tuesday, November 19, 2019 03:47 AM

रिश्वतखोर पटवारी को जेल

जिला सत्र एवं विशेष न्यायाधीश राकेश चौधरी ने सुनाई पांच साल की सजा

बिलासपुर - जिला सत्र एवं विशेष न्यायाधीश राकेश चौधरी ने जिला न्यायवादी एवं विशेष लोक अभियोजक विनोद भारद्वाज के तेजतर्रार बहस व जिला न्यायाधीश नारायण सिंह चौहान के ठोस सबूतों को पेश करने पर सुरेश कुमार चोपड़ा पटवारी को पांच साल का कठोर कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले की जानकारी देते हुए जिला न्यायवादी एवं लोक अभियोजक विनोद भारद्वाज जिन्होंने सरकारी पक्ष के केस की पैरवी शिकायतकर्ता की तरफ  से विशेष अदालत में की, ने बताया कि 30 अक्तूबर 2015 को खजाना राम गांव सैलही तहसील सुंदरनगर जिला मंडी हिमाचल प्रदेश की शिकायत पर एफआईआर थाना बिलासपुर में दर्ज हुई थी। जिसके तथ्य यह थे कि शिकायतकर्ता की बेटी रीना देवी की शादी सुनील कुमार पुत्र गुलाब राम गांव हरनोड़ा जिला बिलासपुर के साथ हुई थी, जिसमें उनके दामाद 15 सितंबर, 2015 को पैर फिसलने से हाटकोटी पब्बर नदी में बह गया था, जिसमें उसकी मृत्यु हो गई थी। उसने अपना एक ट्रक नंबर एचपी 24सी-3939 डाल रखा था, जो बरमाणा यूनियन में सीमेंट ढोने के लिए लगाया था। उस वजह से ट्रक के दस्तावेज व बैंक का खाता रीना देवी के नाम ट्रांसफर कराने के लिए जायज वारसान प्रमाण पत्र चाहिए था जिस पर शिकायतकर्ता अपनी बेटी को लेकर दोषी पटवारी सुरेश चोपड़ा पुत्र रतन लाल चोपड़ा गांव मतवाना के पास गए तो शिकायतकर्ता ने मृतक सुनील कुमार का मृत्यु प्रमाण पत्र पटवारी के पास पेश किया तथा उसकी विरासत चढ़ाकर जायज वारसान प्रमाण पत्र देने को कहा तो दोषी पटवारी उन्हें इस काम के लिए चार-पांच दिन तक बुलाता रहा। जब शिकायतकर्ता पुनः 29 अक्तूबर, 2015 को पटवारी के पास पटवारखाना गया तो दोषी ने मृत्यु प्रमाण पत्र का इंद्राज अपने रजिस्टर में कर लिया तथा कहा कि वह कानूगो से भी हस्ताक्षर करवा लेगा तथा इस काम को करने के लिए चार हजार रुपए की मांग की। इस पर शिकायतकर्ता ने कहा कि उसके पास पैसे नहीं है, तब पटवारी ने कहा कि कल सुबह 11 बजे बामटा में जहां से चांदपुर की तरफ  सड़क जाती है वहां पर मिलो तथा अपनी बेटी को भी साथ लेकर आओ और वहां उसे पैसे दे देना। उसके बाद वह तहसीलदार से काम करवा देगा। शकायतकर्ता ने कहा कि वह रिश्वत नहीं देना चाहता था, जिस पर वह भ्रष्टाचार विरोधी थाना बिलासपुर गया और वहां तत्कालीन थाना प्रभारी उप अधीक्षक तरणजीत सिंह के पास शिकायत दर्ज करवाई तथा यह मुकदमा अन्वेषण के लिए निरीक्षक पवन कुमार भ्रष्टाचार निरोधी थाना बिलासपुर को दी गई, जिस पर निरीक्षक पवन कुमार ने एक ट्रैप टीम जिसमें उपनिरीक्षक बख्तावर सिंह, आरक्षी पवन कुमार, मानक मुख्य आरक्षी राजकुमार, सुनील कुमार, धर्म सिंह व संत राम, कनिष्ठ अभियंता लोक निर्माण विभाग अनूप गौतम के साथ मिलकर एक ट्रैप टीम बनाई गई तथा उन्हें सभी नियम बताए गए। फिनोल पैथेलीन के साथ सोडियम कार्बोनेट की प्रतिक्रिया का प्रयोगात्मक प्रदर्शन किया गया व गवाहों को समझाया गया। फिर उपरोक्त करंसी नोटों को फिनोल पैथेलीन पाउडर के साथ ट्रीट किया गया तथा शिकायतकर्ता को यह भी निर्देश दिए कि इन करेंसी नोटों को तब तक नहीं छूएगा, जब तक पटवारी रिश्वत की मांग नहीं करता है, जिस पर टीम मुताबिक प्लान मौका बामटा चैक पर पहुंचती है तो दोषी करीब 11 बजे अपनी टाटा सूमो जीप में घुमारवीं की तरफ  से आया। वह शिकायतकर्ता व गवाहों की विपरित दिशा में दाहिनी तरफ  पहुंचा और मांग करने पर चार हजार रुपए की करंसी नोट दोषी को दिए, जो दोषी ने उन्हें अपने हाथ से पकड़ कर उसके पास बैठे व्यक्ति के पास दिए उतने में छाया गुवाह के इशारा करने पर भ्रष्टाचार निरोधी टीम ने दोषी को दबोच लिया तथा नोटों की बरामदगी की तथा दोषी के हाथ धुलाए गए, जिस पर सोडियम कार्बोनेट के धोने पर पानी रंग गुलाबी हो गया। उन्होंने बताया कि सभी सबूत इकट्ठे करने के बाद व अभियोजन मंजूरी लेने के बाद दोषी के खिलाफ धारा 72 प्राइस ऑफ कॉरपोरेशन एक्ट 1988 के तहत चालान विशेष अदालत में पेश किया गया। उन्होंने बताया कि बचाव पक्ष की दलीलों को नकारते हुए विशेष अदालत ने अभियुक्त सुरेश चोपड़ा को दोषी करार देते हुए धारा 7 के अंतर्गत दो साल का कठोर कारावास व दो हजार रुपए का जुर्माना तथा जुर्माना अदा न करने की सूरत में तीन महीने अतिरिक्त साधारण कारावास व धारा 13(2) पीसी एक्ट के अंतर्गत पांच साल का कठोर कारावास व पांच हजार रुपए जुर्माना व जुर्माना अदा न करने की सूरत में छह महीने का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि यह सारी सजाएं एक साथ चलेंगी।