रुचि से मिलता है रोजगार

समाजशास्त्र में करियर संबंधी विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने मोहन झारटा  से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश...

प्रो.मोहन झारटा

समाज शास्त्र विभाग, एचपीयू, शिमला

समाजशास्त्र का क्या महत्त्व है, इस क्षेत्र में करियर के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, इसका क्या कारण है?

समाजशास्त्र समाज में रहने वाले लोगों से जुड़ा हुआ विषय है। मौजूदा दौर में यह विषय एमबीए की तरह है।   इस विषय की महत्ता काफी ज्यादा बढ़ गई है।  यदि कोई व्यक्ति अपनी एनजीओ चलाना चाहता है तो विषय पर पकड़ होना जरूरी है। नए उद्योग व प्रोजेक्ट लगाए जाते हैं, वहां पुनर्वास का कार्य किस तरह होगा इसके लिए समाजशास्त्री की जरूरत होती है। इन क्षेत्रों में विषय ज्ञाताओं की जरूरत बढ़ने से नए शैक्षणिक संस्थान खुले हैं और विवि व कालेजों में यह विषय शुरू हुआ है। इस के कारण टीचिंग में भी काफी रोजगार की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

समाजशास्त्र में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए किन शैक्षणिक योग्यताओं का होना अनिवार्य है?

इस विषय में पीजी डिग्री करने के अलावा एमफिल व पीएचडी कर विषय में दक्षता हासिल की जा सकती है। एचपीयू एमए इन समाजशास्त्र व एमए इन सोशल वर्क की डिग्री प्रदान करता है। दोनों ही विषयों की काफी ज्यादा डिमांड है। एचपीयू में ये दोनों कोर्स करवाए जाते हैं। यदि छात्र ने यूजी में यह कोर्स न भी पढ़े तो भी वह इन में दाखिला ले सकता है। एमए सोशल वर्क के लिए प्रवेश परीक्षा के आधार पर एडमिशन है जबकि एमए सोशोलॉजी मे मैरिट के हिसाब से दाखिला मिलता है।

हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थियों के लिए समाजशास्त्र कितना रोजगारपरक है ?

हिमाचल में नए उद्योग व विद्युत प्रोजेक्टए सीमेंट कारखाने लग रहे हैं। यहां पर इन विषयों के ज्ञाताओं की जरूरत होती है। यह  प्रोफेशनल विषय है। बड़ी कंपनिया जहां पर अपना प्रोजेक्ट लगाती है वहां प्रभावितों को पुनर्वास के लिए प्लानिंग बनाने के लिए समाजशास्त्री की मदद लेती हैं। हिमाचल में वर्तमान परिप्रेक्ष्य को देखते हुए यह करियर ज्यादा रोजगारपरक है। इसके अलावा हिमाचल में कई गैर सरकारी संगठन भी है। जिसमें समाज शास्त्रियों की बहुत डिमांड रहती है।

समाजशास्त्र विषय में रोजगार के अवसर किन क्षेत्रों में हैं ?

समाज सेवी संस्थाएं मानवीय, सामाजिक और पर्यावरणीय समस्या सुलझाने में लगी रहती है। इसी कारण बड़ी संख्या में समाजशास्त्र के विशेषज्ञों की जरूरत इन संस्थाओं को पड़ती रहती है। ऐसे लोगों में सेवा का जज्बा होने के साथ-साथ संबंधित क्षेत्र की जानकारी होना भी आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली यूनिसेफ और रेड क्रॉस  ऐसी संस्थाएं जो हर साल समाज शास्त्र और समाज कार्य विशेषज्ञों की खोज के लिए सेमिनार का आयोजन भी करती हैं। इन संस्थाओं में निदेशक, प्रोग्राम आफिसर और टीम लीडर जैसे पदों पर नियुक्ति दी जाती है। इसके अलावा कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां छात्रों को को-आर्डिनेटर, सर्वे आफिसर या पब्लिक रिलेशन जैसे उच्च पदों पर नियुक्त किया जाता है। अपराध विज्ञान और सुधारात्मक प्रशासन में विशेषज्ञता रखने वालों को जेल सुधार गृहों, बाल गृहों में भी रोजगार उपलब्ध होता है।

इस विषय के विशेषज्ञ को शुरुआती वेतनमान कितना मिलता है?

यह कंपनी पर निर्भर करता है कि वह कितनी बड़ी है और उनका पैकेज कितना है। बड़ी कंपनियों में अच्छे पैकेज पर युवाओं को रोजगार मिलता है।

युवा पीढ़ी को इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आप क्या संदेश देंगे?

करियर के तौर पर किसी विषय को चुनना है तो इस के लिए विषय में गहन रुचि होनी चाहिए। रूचि के अलावा विषय की संपूर्ण जानकारी व उस पर अच्छी पकड़ जोना जरूरी है। तभी इस विषय में अपना रोजगार तलाश सकते हैं। 

—प्रतिमा चौहान, शिमला