Friday, December 13, 2019 07:26 PM

रेणु मंच से भगवान परशुराम महागाथा का चित्रण

 अंतिम सांस्कृतिक संध्या में संवाद थियेटर गु्रप चंडीगढ़ के कलाकारों ने किया मंचन

श्रीरेणुकाजी -रेणुका मेले की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में रेणु मंच से भगवान परशुराम महागाथा का सजीव चित्रण किया गया। संवाद थियेटर गु्रप चंडीगढ़ के कलाकारों ने भगवान परशुराम के जन्म की कथा से लेकर तपस्या तक की विभिन्न लीलाओं का चित्रण किया। सहस्रबाहु के रावण को परास्त करने व कैदी बनाए रखने के साथ-साथ सहस्रबाहु के अत्याचारों का वर्णन भी किया। इस राजा ने साधु-संतों को प्रताडि़त करने व भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि की कामधेनु गाय को ले जाने के दृश्य दिखाए। माता रेणुका का सिर काटकर भगवान परशुराम ने पिता के वचनों को पूरा किया। ऋषि जमदग्नि ने परशुराम को वर मागने के लिए कहा तो परशुराम ने माता को जीवित करने का वर मांगा। ऋषि ने भगवान परशुराम को सर्वश्रेष्ठ पुत्र व अजय अमर बनने का वरदान दिया। कलाकारों ने भगवान परशुराम को हिंसा न करने व उसके प्राश्चित करने के लिए कहा। सहस्रबाहु के पुत्रों ने ऋषि जमदग्नि का आश्रम में जाकर वध कर दिया, जिसके बाद माता रेणुका ने 21 बार अपनी छाती को पीटा। भगवान परशुराम ने 21 बार आततायी क्षत्रियों का वध  किया, लेकिन किसी भी कर्मयोगी क्षत्रिय का वध नहीं किया। उसके बाद भगवान परशुराम विंधयाचल में तपस्या करने चले गए। हर वर्ष कार्तिक शुक्ल दशमी को वह अपनी मां से मिलने रेणुकाजी आते हैं, जिस उपलक्ष्य पर यहां मां-पुत्र के मिलन स्वरूप मेला लगता है। इस दौरान उन्होंने परशुराम गाथा खत्म होने के बाद सीता स्वंबर भी दिखाया। इस अवसर पर रेणुका के विधायक विनय कुमार, डा. प्रमोद पारिख, अंडर सेक्रेटरी मनोज शर्मा, हेमंत शर्मा, अभिषेक, संवाद थियेटर गु्रप चंडीगढ़ के डायरेक्टर मुकेश शर्मा, प्रधान मधु, विक्रम सिंह सहित कई कलाकार मौजूद रहे।