Friday, December 13, 2019 07:24 PM

रेलगाड़ी नहीं होती तो कहां जाते लोग

 देहरा के गांव सड़क सुविधा न होने से आज भी गुलामी की जिंदगी बसर करने को मजबूर

भटेहड़ बासा -सरकारें और उनके मंत्रिमंडल के सिपहसालार विकास के लाखों दावे करते हों बात चाहे गांवों को सड़कों से जोड़ने कि हो या हिमाचल के पिछड़े क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की, अगर धरातल पर देखें तो विकास की सचाई देख कर आप सरकारों को कोसे बिना नहीं रह सकोगे। कहते हैं कि वोट लिया और खिसक गए फिर कुर्सी से चिपक गए यही तो होता आया है  72 सालों से हिमाचल के सबसे बड़े जिला कांगड़ा के देहरा हलके के दुर्गम क्षेत्र में बसे धार लुणसू बाग हाली बस्ती, मंदराटा, टिल्ला चत्रा इत्यादि गांवों के बाशिंदों की जो आज भी ऊबड़-खाबड़ रास्तों में जिंदगी तलाश रहे हैं। सड़क क्या होती है इन लोगों को पता ही नहीं। शुक्रगुजार हैं ये लोग अंग्रेजों के जिन्होंने पठानकोट रेलवे ट्रैक किसी जमाने मेंं बिछा दिया था और रेलवे आज भी यहां लोगों को आवागमन की सुविधा मुहैया करवा रहा है। मुसीबतें तो तब बढ़ जाती हैं जब बरसात के दिनों में रेल सेवा भी रेलवे द्वारा ल्हासे गिरने के अंदेशे के चलते बंद कर दी जाती है फिर क्या लोग तो शेष विश्व से ही कट जाते हैं। बीमार होना तो यहां गुनाह के समान है पहले मीलों पैदल चलकर मरीज को कंधों या पालकी पर उठा कर मुख्य मार्ग गुलेर तक पहुंचाया जाता है फिर किसी वाहन के सहारे हरिपुर, नगरोटा सूरियां या देहरा जाकर अस्पताल की चौखट नसीब होती है। जिंदगी की इसी जद्दोजहद में अब तक कई लोग समय रहते स्वास्थ्य सुविधा न मिल पाने के कारण जान भी गंवा चुके हैं। स्कूली बच्चों के स्कूल तक पहुंचने के खौफनाक सफर बारे तो आप पूछिए ही मत नन्हे-मुन्ने नौनिहाल और स्कूली बच्चे लुणसू से लेकर गुलेर तक रेलवे के चार खतरनाक पुलों को क्रॉस करते हुए जान जोखिम मेंं डाल कर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण यहां से लोग अपने घर बार जमीन जायदाद छोड़ पलायन कर चुके हैं। लेकिन सत्तानशीनोंं की इलाके के प्रति बेरुखी किसी से छिपी नहीं है। शासन-प्रशासन भी सब जानते हुए आंखे मूंद कर मूक बने सब देख कर भी अनजान बना बैठा है। हर बार जब मीडिया मंे इस क्षेत्र की बदहालत बारे मामला उठता है तो प्रशासन और हुकमरानों की तरफ से बयान आते हैं कि जल्द ही इन गांवों को सड़क से जोड़ा जाएगा  लेकिन वह दिन आखिरकार आएगा कब यह बहुत बड़ा सवाल है।  बहरहाल ये गांव कब तक सड़क से जुड़ेंगे यह सरकारों और उनके आला अमले की दिलचस्पी पर निर्भर है।