Friday, September 20, 2019 12:32 AM

लंदन में ना‘पाक गुंडे

पाकिस्तान की बौखलाहट एक बार फिर बेनकाब हुई है। बीते एक माह के दौरान कश्मीर और पाकिस्तान सबसे उत्तेजित मुद्दे रहे हैं, लिहाजा विश्लेषण हमारी मजबूरी है। कश्मीर पर पाकिस्तान की कुंठा और बौखलाहट समझ के परे है। यदि संयुक्त राष्ट्र समेत दुनिया के प्रमुख बड़े देश मान रहे हैं कि भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत हटाया है, तो पाकिस्तान क्यों तिलमिला रहा है? इस सवाल का सटीक जवाब आज तक नहीं मिला है। क्या पाकिस्तान के अवाम की रोजी-रोटी, डूबती आर्थिक विकास दर, बढ़ते कर्ज, गरीबी, अशिक्षा और धर्मांधता से बढ़कर कश्मीर का मुद्दा है? न भी हो, लेकिन कूटनीतिक उठा पटक के लिए पाकिस्तानी हुकूमत को दिखावा करना मजबूरी है कि वह कश्मीर के लिए लड़ रही है। बेशक अवाम ऐसा न सोचे, लेकिन भारत के खिलाफ  नफरत का जहर फैलाना पाकिस्तानी हुकूमत की मजबूरी है। कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान ने चौतरफा पिटने के बाद अपनी कुंठित फितरत दिखाई है। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग की इमारत पर पत्थरबाजी की गई। अंडे और टमाटर फेंके गए। यहां तक कि ‘स्मोक बम’ भी छोड़े गए। ऐसी हिंसक हरकतें एक ही महीने से कम वक्त में दोबारा की गई हैं। भारत के स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त पर भी उच्चायोग पर हमले किए गए थे। मौजूदा हमले में हमारत की खिड़कियों के शीशे भी टूटे हैं। आखिर ये हमलावर कौन हैं? जाहिर है कि ब्रिटिश नागरिक तो ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उनके साथ हमारे शत्रु-भाव वाले संबंध नहीं हैं। ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी और कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म करने से तमतमाई एक जमात के लोग ही ऐसा कर सकते हैं। उस हमलावर भीड़ ने मार्च भी निकाला और भारत-विरोधी नारे भी लगाए। क्या ब्रिटेन ऐसे गुंडों को भी अपनी सरजमीं पर आने की इजाजत देता है? लिहाजा भारत के विदेश मंत्रालय ने आग्रह किया है कि उस जमात के खिलाफ  कार्रवाई की जाए। यदि विशुद्ध पाकिस्तानी हैं, तो उन्हें देश से निकाल देना चाहिए। यह लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया नहीं है। भारतीय उच्चायोग ने ट्विटर के जरिए फोटो भी जारी किए हैं। उस भीड़ में पाकपरस्त आतंकवादी भी हो सकते हैं, जिन्होंने किसी अन्य रूप में ब्रिटेन में प्रवेश पाया हो! बेशक इन हमलों ने उच्चायोग की इमारत को कुछ छील दिया होगा, लेकिन एक बार फिर पाकिस्तान की ना’पाक गुंडई सामने आई है। सवाल तो यह है कि इन हमलों से पाकिस्तान को, किसी भी रूप में, क्या हासिल होगा या हुआ है? अनुच्छेद 370 को दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा। कश्मीर आजाद होकर पाकिस्तान की गोद में नहीं जाएगा। बल्कि पाकिस्तान का हिंसक और आतंकी चेहरा भी उजागर हुआ है। यह साबित करना भी जरूरी नहीं है कि पाकपरस्त लोगों ने ही उच्चायोग की इमारत पर हमला किया है। वह रपट तो ब्रिटिश सरकार ही आने वाले कुछ दिनों में दे देगी, लेकिन कश्मीर में हमारी सेना ने लश्कर-ए-तैयबा के जो दो जिंदा आतंकी पकड़े हैं, क्या पाकिस्तान उन्हें अपने नागरिक होने से इनकार करेगा? कश्मीर में सेना की 15वीं कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लन ने ब्रीफ  किया है कि वीडियो पर दोनों आतंकियों ने कबूल किया है कि वे पाकिस्तानी हैं। उन्होंने पीओके में लश्कर से आतंकियों की टे्रनिंग ली थी। सिर्फ  उन्होंने ही कश्मीर में घुसपैठ करने की कोशिश नहीं की, बल्कि 10-15 और मुजाहिदीन भी घुसपैठ करने की फिराक में हैं। परमाणु युद्ध की धमकियां देने वाला पाकिस्तान, दरअसल ऐसी ही छोटी-छोटी साजिशें कर सकता है। लिहाजा देश पूरी शिद्दत के साथ आग्रह कर रहा है कि जहां आतंकी अड्डे होने की पुख्ता जानकारियां हों, वहां एक और बार एयर स्ट्राइक की जाए और बड़े पैमाने पर हमला किया जाए। आतंकवाद को नेस्तनाबूद किया जाए, बेशक उसकी परिणति जंग ही हो।